जयपुर में मिट्टी ढहने से तीन-परिवारों की उम्मीदें भी ढही: चार बच्चों से छीन ली मां की ममता; मजदूर बोली- साथ खाना खाया, फिर हादसा हो गया – Jaipur News h3>
जयपुर के वैशाली नगर गांधी पथ वेस्ट में हुए दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के बेसमेंट में काम के दौरान गुरुवार को अचानक मिट्टी ढह गई। इसमें दबकर तीन महिला मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वाली महिला
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हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी मजदूरों ने जान जोखिम में डालकर मिट्टी में दबी महिलाओं को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
मरने वालों में बिहार निवासी सुनीता देवी, अनुती कुमारी और प्रतिमा कुमारी शामिल हैं। प्रतिमा कुमारी के दो बच्चे हैं और सुनीता के दो बच्चे हैं।
साथ काम करने वाली मजदूर सीमा देवी ने बताया- दोपहर में सभी मजदूरों ने एक साथ खाना खाया था। रोज की तरह खाने के बाद सभी अपने-अपने काम पर लौट गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद ऐसा हादसा हो जाएगा।
सीमा ने बताया कि मजदूरों की सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है।
310 रुपए की दिहाड़ी पर लाए, सुरक्षा कुछ नहीं
सीमा ने बताया कि अचानक जोर की आवाज सुनाई दी। हम भागकर वहां पहुंचे तो देखा कि मिट्टी ढह गई है। तीन महिलाएं उसके नीचे दब गई थी। हमने मिलकर उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक वे बेसुध हो चुकी थीं। बाद में हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीमा की आवाज में दर्द और गुस्सा दोनों साफ झलकते दिखे। उनका आरोप है कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए गए।
उन्होंने कहा- हमें बिहार से यहां मजदूरी के लिए लाया गया। रोज 310 रुपए की दिहाड़ी मिलती है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया गया। न हेलमेट, न सुरक्षा जैकेट और न ही कोई अन्य सुरक्षा उपकरण। अगर सुरक्षा इंतजाम होते तो शायद तीन महिलाओं की जान बच सकती थी।
प्रतिमा कुमारी की बेटी की उम्र महज सवा साल है।
सवा साल की बच्ची को मां का इंतजार
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू उन मासूम बच्चों की आंखों में दिख रहा है, जिन्हें अभी तक यह समझ नहीं आया कि उनकी मां अब कभी वापस नहीं आएगी। मृतका प्रतिमा कुमारी की बेटी की उम्र महज सवा साल है। वह लगातार अपनी मां को तलाश रही है। भूख लगने पर रो पड़ती है और हर बार दरवाजे की तरफ देखती है। मानो उसकी मां अभी आकर उसे गोद में उठा लेगी। उसे क्या पता कि जिस मां के दूध का इंतजार वह कर रही है, वह अब इस दुनिया में नहीं रही।
हादसे के बाद मजदूर बस्ती में मातम पसरा हुआ है। कई महिलाएं उस मासूम को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मां की कमी कौन पूरी कर सकता है।
सुनीता देवी का बेटो प्रिंस ने कहा- मम्मी जल्द आ जाएंगी।
मम्मी जल्दी आ जाएंगी और मेरे साथ खेलेंगी
सुनीता देवी के 6 वर्षीय बेटे प्रिंस की बातें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। मासूम प्रिंस को अभी तक मां की मौत की सच्चाई नहीं बताई गई है। प्रिंस ने मासूमियत से कहा- किसी ने पापा को बताया कि मम्मी मिट्टी में दब गई है। फिर पापा उन्हें अस्पताल लेकर गए। मेरी मम्मी मुझे बहुत प्यार करती हैं। वह मेरे साथ खेलती हैं। वह जल्दी आ जाएंगी और फिर मेरे साथ खेलेंगी।
उधर, सुनीता की 4 साल की छोटी बेटी पिंकी अपनी मां को याद कर लगातार रो रही है। उसे बार-बार यही लग रहा है कि उसकी मां कहीं गई है और थोड़ी देर में लौट आएगी। शायद यह इंतजार अब कभी खत्म नहीं होगा।
ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप
हादसे के बाद स्थानीय मजदूरों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि बेसमेंट निर्माण जैसे जोखिम भरे कार्य में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी था। मजदूरों का आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। मजदूरों ने कहा- रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार से आए इन परिवारों को यह उम्मीद नहीं थी कि जयपुर में मजदूरी करते हुए उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ेगी।
एसएमएस अस्पताल में महिलाओंं के शव।
तीन मौतें और कई सवाल
गांधी पथ वेस्ट का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर गया है। आखिर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को जोखिम भरे काम में क्यों लगाया गया? क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था और यदि नहीं, तो जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित परिवारों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं इन कानूनी प्रक्रियाओं से उन मासूम बच्चों को उनकी मां वापस नहीं मिलेगी, जो आज भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसी को अपनी मां की गोद चाहिए, किसी को मां के हाथ का खाना, तो किसी को मां के साथ खेलना है। मगर गांधी पथ वेस्ट में ढही मिट्टी अपने साथ तीन महिलाओं की जिंदगी ही नहीं, तीन परिवारों के सपने और चार बच्चों का बचपन भी दबाकर ले गई।
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जयपुर के वैशाली नगर के गांधी पथ में मिट्टी ढहने से तीन महिलाओं की मौत हो गई। निर्माणाधीन बिल्डिंग की बेसमेंट खुदाई के दौरान मिट्टी ढह गई थी। हादसा गुरुवार दोपहर 2:30 बजे हुआ। (पूरी खबर पढ़ें)
