जेईई मेन में टॉपर रहे थे कबीर, अब दूसरी रैंक: 6 रैंक पर रहे शुभम एडवांस में टॉपर, 10 साल बाद कोटा से आई टॉप 3 रैंक – Kota News

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जेईई मेन में टॉपर रहे थे कबीर, अब दूसरी रैंक:  6 रैंक पर रहे शुभम एडवांस में टॉपर, 10 साल बाद कोटा से आई टॉप 3 रैंक – Kota News

जेईई मेन में टॉपर रहे थे कबीर, अब दूसरी रैंक: 6 रैंक पर रहे शुभम एडवांस में टॉपर, 10 साल बाद कोटा से आई टॉप 3 रैंक – Kota News

जेईई एडवांस का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। कोटा कोचिंग के क्लासरूम स्टूडेंटस ने टॉप दस में जगह बनाई है। कोटा में कोचिंग में पढे़ शुभम और कबीर ने पहली और दूसरी रैंक हासिल की है। टॉप 10 में से टॉप 3 स्टूडेंटस कोटा कोचिंग की क्लासरूम में रेगुलर स्टूडेंट

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शुभम को जेईई मेन में छठी रैंक मिली थी, एडवांस में उसने ऑल इंडिया टॉप किया है

जेईई एडवांस में वह ऑल इंडिया दूसरी रैंक पर आया है। वहीं शुभम कुमार जेईई मेन में 6 रैंक पर था, लेकिन जेईई एडवांस में उसने टॉप किया और ऑल इंडिया पहली रैंक हासिल की है। कबीर का तो सपना ही आईआईटी में जाने का रहा है, वहीं शुभम को नवीं कक्षा तक आईआईटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। दसवीं पढ़ाई करने लगा तो फिजिक्स अच्छी लगने लगी। बड़ी बहन से इंस्पायर होकर इंजीनियरिंग फिल्ड में ही आने का सोचा। हालांकि उनके पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन बच्चे की इच्छा देखकर उसे आईआईटी की तैयारी के कोटा भेज दिया।

कबीर ने दूसरी रैंक हासिल की है, वह बोले- पेपर में गलती भी हो जाती है।

कबीर बोले-पेपर में गलती भी हो जाती है, चलता है कबीर छिल्लर से जब पूछा कि मेन में आपकी पहली रैंक बन रही थी परफेक्ट स्कोर था लेकिन एडवांस में दूसरी रैंक आई है तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि टॉपर्स में ये चलता है। ऐसा नही है कि मैं एडवांस के लिए अपनी तैयारी में चेंज करता। पेपर के लास्ट में मेरा दिमाग फ्लकचुएट सा हो गया था। पेपर के लास्ट में मुझे लगा कि टाइम कम पड़ रहा है, हालांकि टाइम कम नहीं पड़ रहा था दस मिनट बचे हुए थे और मैं कंफर्टेबल भी था, पर मुझे बस लगा कि पेपर खत्म नहीं हो रहा है तो दो तीन प्रश्न गलत हो गए लास्ट में। बाकि शुभम मेरा दोस्त है। हमने साथ पढ़ाई की है, दोनों एक साथ डाउट क्लियर करते थे। वहीं शुभम ने कहा कि मेरी तैयारी जैसी मेन की थी वैसी ही एडवांस के लिए थी। जैसा फेकल्टी बताते, टेस्ट पेपर साल्व करना, रिविजन जो चल रहा था वैसा ही करता रहा था और रैंक फर्स्ट आ गई।

रिजल्ट आने के बाद कोटा में जश्न का माहौल हो गया।

माता पिता टीचर, बेटा जाएगा आईआईटी क्लासरूम स्टूडेंट अर्णव गौतम ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की है। कोटा निवासी अर्णव ने 10वीं कक्षा 95.8 प्रतिशत नंबर के साथ पास की थी। 2023 में जूनियर साइंस ओलंपियाड के ओसीएससी, 2024 में एस्ट्रो ओलंपियाड के ओसीएससी और 2025 में फिजिक्स ओलंपियाड के ओसीएससी में भाग लिया। इसके अलावा एशियन फिजिक्स ओलंपियाड 2025 में ब्रॉन्ज मेडल मिला। जेईई-मेन में अर्णव ने एआईआर 5 हासिल की थी।

जेईई-मेन में अर्णव ने एआईआर 5 हासिल की थी। एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की है।

अर्णव ने कहा कि मेरे दिमाग में हमेशा टारगेट रहता था कि मुझे यह हासिल करना है। अब मैं आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस ब्रांच में बीटेक करना चाहता हूं। अर्णव ने बताया कि जब-जब रिजल्ट आते हैं और कोटा की बात आती है तो गर्व महसूस होता है कि मैं कोटा से ही हूं। मुझे अच्छा गाइडेंस मिला और इससे कमजोरियां दूर होती चली गई। जेईई जैसे एग्जाम की तैयारी में डाउट्स का तुरंत समाधान होना बेहद जरूरी है।

स्टूडेंट कनिष्क जैन ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की है। उसके जेईई मेन्स में ऑल इंडिया रैंक 36 थी।

आईजेएसओ में जीता था गोल्ड स्टूडेंट कनिष्क जैन ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की है। उसके जेईई मेन्स में ऑल इंडिया रैंक 36 थी। कनिष्क का चयन वर्ल्ड रैंकिंग नंबर 1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में हो चुका हैं। परिवार मूलतः कोटा से है, पिता रितुल जैन पुणे में आईटी प्रोफेशनल हैं तथा मां सरिता गृहिणी हैं। 10वीं कक्षा में एशियन फिजिक्स ओलंपियाड (एपीएचओ) में ऑनरेबल मेंशन, 11वीं में इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड (आईपीएचओ) में गोल्ड मेडल तथा एपीएचओ में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं, 12वीं में उसका चयन आईपीएचओ के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आईजेएसओ में गोल्ड मेडल जीतने के साथ थ्योरी टॉपर रहा। उसका कहना है कि हर स्टूडेंट का सीखने का तरीका अलग होता है, इसलिए अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार पढ़ाई करनी चाहिए।

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