केंद्रीय विद्यालय का क्लर्क 60 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार: देवास में CBI ने रंगे हाथों पकड़ा; लंबित बिल पास कराने के बदले रुपए मांगे थे – Dewas News h3>
देवास के केंद्रीय विद्यालय में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एंटी करप्शन ब्रांच, भोपाल ने गुरुवार देर रात बैंक नोट प्रेस परिसर स्थित केंद्रीय विद्यालय के एक क्लर्क को 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड
.
सीबीआई ने यह कार्रवाई इंदौर निवासी विनीत राणा की शिकायत पर की है। विनीत राणा एमएस खेड़ापति सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। उन्होंने 22 दिसंबर को एसपी एसीबी भोपाल को शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बीएनपी केंद्रीय विद्यालय में पदस्थ सीनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट रंजन भारती ने सिक्योरिटी और मैनपावर से संबंधित बिलों को पास कराने के लिए 60 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
3 लाख 84 हजार का भुगतान लंबित था शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी सिक्योरिटी एजेंसी स्कूल को सेवाएं दे रही थी, जिसके एवज में कुल 3 लाख 84 हजार 696 रुपए का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ था। बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद बिल पास नहीं किए जा रहे थे। इसी दौरान क्लर्क रंजन भारती ने भुगतान की स्वीकृति के बदले रिश्वत की मांग की।
सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 23 दिसंबर को रंजन भारती के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। गुरुवार देर रात सीबीआई की टीम बीएनपी पहुंची और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी भोपाल ने पूरे मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया। यह सत्यापन उप निरीक्षक प्रयांशु विष्णोई ने एक गवाह की मौजूदगी में किया। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि हुई और यह सामने आया कि बिल पास कराने के लिए वास्तव में अवैध लाभ की मांग की गई थी। एसीबी की रिपोर्ट के अनुसार सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके आधार पर मामले को संज्ञेय अपराध मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
भ्रष्टाचार निवारण की धारा में केस दर्ज शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर एसीबी भोपाल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इस मामले में 23 दिसंबर को प्रकरण पंजीबद्ध किया था। बताया गया है कि यह धारा लोक सेवक द्वारा किसी कार्य के बदले अवैध पारितोषिक की मांग या स्वीकार करने से संबंधित है, जिसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
सीबीआई, एसीबी भोपाल को सौंपी जांच मामले की आगे की जांच सीबीआई, एसीबी भोपाल के निरीक्षक सतीश बरवाल को सौंपी गई है। जांच के दौरान भुगतान प्रक्रिया, संबंधित फाइलें, विद्यालय प्रशासन की भूमिका और अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जाएगी।
