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आपकी रसोई में तो नहीं ये ‘जहरीली’ पालक-गोभी?: फैक्ट्रियों के केमिकल वाले पानी से तैयार सब्जियां, बन सकती हैं किडनी फेल, कैंसर की वजह – Rajasthan News

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आपकी रसोई में तो नहीं ये ‘जहरीली’ पालक-गोभी?:  फैक्ट्रियों के केमिकल वाले पानी से तैयार सब्जियां, बन सकती हैं किडनी फेल, कैंसर की वजह – Rajasthan News

आपकी रसोई में तो नहीं ये ‘जहरीली’ पालक-गोभी?: फैक्ट्रियों के केमिकल वाले पानी से तैयार सब्जियां, बन सकती हैं किडनी फेल, कैंसर की वजह – Rajasthan News

पालक में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, लेकिन हो सकता है जो पालक आप खा रहे हैं, उसमें किडनी और लीवर फेल करने वाले हेवी मेटल हों।

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फाइबर, विटामिन (C, K) और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर जो गोभी हार्ट, स्किन और हड्‌डियों को मजबूत बनाती है, हो सकता है, वही कैंसर का कारण बन जाए।

ये डर हकीकत बन सकता है…

क्योंकि जयपुर के आसपास के दर्जनों गांवों में हाईकोर्ट के कार्रवाई के आदेश के बावजूद फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के गंदे पानी से सब्जियां उगाई जा रही हैं।

NEWS4SOCIALरिपोर्टर ने 3 दिन तक पड़ताल की तो सामने आया कि बड़े-बड़े नालों में पंप लगाकर खेतों तक ये खतरनाक पानी पहुंचाया जा रहा है। इसी गंदे पानी से तैयार सब्जियां आपकी रसोई तक पहुंच रही हैं।

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पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

सांगानेर सदर से चंदवाजी तक 26 किलोमीटर लंबे नाले में इसी तरह लोगों ने पंप लगा रखे हैं।

पहला दिन : पंप के जरिए खेतों में पहुंचा रहे केमिकल वाला पानी

NEWS4SOCIALटीम सांगानेर सदर इलाके में पहुंची। यहां फैक्ट्रियों के पास एक नाला बहता दिखाई दिया। कुछ देर नाले के साथ चले तो पता चला कि नालों में पंप लगे हुए थे। पंप का एक सिरा केमिकल में डूबा था दूसरा सिरा जमीन पर गढ़ा हुआ था।

आसपास के लोगों से पूछा तो पता चला कि कुछ किसान खेती के लिए पंप चलाकर यही केमिकल वाला पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ और दूर गए तो पंपों की लाइन लगी हुई थी। हमारी टीम नाले के साथ-साथ करीब 10 किलोमीटर चलकर रिंग रोड पहुंची। वहां हालात और भी चौंकाने वाले थे।

मुख्य सड़क पर खुले में पंप चला कर नाले का केमिकल वाला पानी खेतों में पहुंचाया जा रहा था। चौकीदारी के लिए हर पंप पर एक व्यक्ति खड़ा था।

उसका काम पंप में डीजल डालना और पंप में कचरा आ जाए तो उसे साफ करना था। यह काम करने के बाद ये लोग अपने-अपने पंप के पास सो जाते या बैठ कर बातें करने लगते।

नाले में लगाए ये पाइप खेतों तक पहुंच रहे हैं। इसी पानी से सब्जियां उगाई जा रही हैं।

दूसरा दिन : महिला किसान बोली- जयपुर गंदे पानी की ही सब्जी खा रहा है

NEWS4SOCIALरिपोर्टर ने खेत तक जाने की कोशिश की। आसपास कई किलोमीटर तक खेतों में गए, लेकिन किसी ने अंदर नहीं जाने दिया। पूछने पर कहा- हम लोग साफ पानी से ही खेती कर रहे हैं। आखिरकार रिपोर्टर ने एक लोकल व्यक्ति को अपने साथ लिया। वह रिपोर्टर को खेत तक ले गया। उसने लोकल लैंग्वेज में खेत में मौजूद महिला से बातचीत की..

  • व्यक्ति : घर पर कुछ बड़ा आयोजन है। सब्जी चाहिए।
  • महिला : ले जाओ, जितनी चाहिए।
  • व्यक्ति : घर के लिए चाहिए। साफ पानी की होनी चाहिए।
  • महिला : यहां तो गंदे पानी की है। साफ पानी की यहां नहीं मिलेगी।

महिला ने बताया- जयपुर तो सांगानेर की कपड़ा फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी की ही सब्जी खा रहा है। किसान साफ पानी की खेती करेगा तो 200 रुपए किलो बेचनी पड़ेगी।

गंदे पानी की खेती खराब तो है, लेकिन क्या करें? सालों से यही चल रहा है। अब तो इस जमीन को भी गंदे पानी की आदत पड़ गई है। साफ पानी या बारिश का पानी आता है तो उससे खेती ही नहीं होती।

महिला किसान बोली- साफ पानी से खेती करेंगे तो हरी सब्जी काफी महंगी होगी।

तीसरा दिन : नाले का सीधा पानी खेतों में

हम खेत की वह जगह देखना चाहते थे, जहां से केमिकल का पानी नाले से पंप के माध्यम से खींचकर लाया और खेत में फैलाया जाता है। तीसरे दिन एक खेत में पाइप मिला। पाइप के चारों तरह देखा तो केमिकल और गंदे जले हुए प्लास्टिक के टुकड़े मिले। मौके पर किसी भी प्रकार का ट्रीटमेंट प्लांट नहीं मिला। नाले से आने वाला गंदा पानी सीधे पौधों को दिया जा रहा था।

NEWS4SOCIALरिपोर्टर वो पाइप दिखाते हुए, जिसके जरिए केमिकल वाला पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।

इस तरह आपकी रसोई तक पहुंच रही बीमारियों वाले पानी की सब्जी

फैक्ट्रियों से नाले में पहुंचता है केमिकल वाला पानी

  • सांगानेर के इस इलाके में कपड़ा छपाई की सैकड़ों फैक्ट्रियां हैं। इनमें कपड़े पर पेंटिंग, डाइंग, ब्लीचिंग और वॉशिंग का काम किया जाता हैं। इस काम के लिए विभिन्न डाई का प्रयोग किया जाता है। इसमें रिएक्टिव डाई, डिस प्रेस डाई, वेट डाई और सल्फर डाई इस्तेमाल होती है। यह डाई पानी में आसानी से घुल जाती है। पानी को रंगीन बना देती हैं। कपड़े रंगने के बाद इस केमिकल वाले पानी को फैक्ट्री से बाहर नाले में छोड़ देते हैं।

सांगानेर में कई फैक्ट्री हैं, जिनमें कपड़े रंगाई का काम होता है।

नाले से 26 किलोमीटर तक जा रही गंदे पानी की लाइन

  • यह गंदा पानी 26 किलोमीटर तक नाले में बहता हुआ चंदवाजी तक पहुंचता हैं। इस बीच में करीब 1 हजार से अधिक जनरेटर, छोटी पानी की मोटर लगाकर लोग 15 किलोमीटर तक अंडर ग्राउंड पाइप लाइन डाल कर यह केमिकल वाला पानी अपने खेतों में ले जाकर उसी पानी से सब्जियां उगा रहे हैं। यहां उगने वाली सब्जी मुहाना मंडी, सांगानेर मंडी और हटवाड़े में बेच दी जाती है। वहां से ये आपके किचन तक पहुंच जाती हैं।

जमीन बंजर का खतरा, भूजल को भी खराब कर रहा केमिकल वाला पानी

एक्सपट्‌र्स का कहना है कि लगातार केमिकल वाले पानी से खेती के कारण मिट्टी का पीएच धीरे-धीरे बदल जाएगा। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घटती चली जाएगी।

अच्छी खेती के लिए केंचुए और माइक्रोब्स की बहुत जरूरत होती है, बार-बार केमिकल से यह मर जाएंगे। इसके अलावा लगातार केमिकल वाले पानी के इस्तेमाल से ग्राउंड वाटर भी खराब होता है।

केमिकल वाले पानी से जमीन बंजर होने का खतरा है। इसके अलावा भूजल को भी नुकसान पहुंच रहा है।

इन गांव में हो रही केमिकल वाले पानी से खेती

जयपुर में मंडरियावाला, कूकस, शिकारपुरा, बुआरिया खेतापुरा, सांगानेर, नेवटा, मुहाना, मदरामपुरा, चंदलाई में सबसे ज्यादा कपड़ा फैक्ट्रियां हैं।

सांगानेर सदर से चंदलाई 26 किलोमीटर की दूरी में नारिया, मलवा, बुरारिया, खेतापुरा, वाटिका, नीमड़ी की ढाणी, सूरजपुरा, शिकारपुरा, मंडरियावाला, रातलिया सहित दर्जनों गांवों में लोग पंप लगाकर ये गंदा पानी खेतों तक पहुंचा रहे हैं।

जयपुर के अलावा राजस्थान में जोधपुर, पाली, भिवाड़ी, भीलवाड़ा, बालोतरा में भी कई जगह केमिकल वाला पानी खेती में इस्तेमाल हो रहा है।

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