ई-अटेंडेंस की विसंगति: 764 नियमित शिक्षकों को बगैर पंचिंग वेतन, 98 अतिथियों का रोका – rajgarh (MP) News h3>
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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस शिक्षा सत्र से अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था, शिक्षा विभाग की दोहरी नीति के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर विभाग ने 90% से अधिक शिक्षकों को सफलतापूर्वक ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से जोड़ दिया है, वहीं अटेंडेंस में लापरवाही बरतने पर नियमित शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए अपनाए गए अलग-अलग मापदंडों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। ई-अटेंडेंस व्यवस्था की सबसे बड़ी विसंगति ये कि विभाग नियमित शिक्षकों की लापरवाही पर पूरी तरह मेहरबान है, जबकि अतिथि शिक्षकों के साथ नियमों का पालन न करने पर तत्काल सख्ती बरती जा रही है। जिले में 764 नियमित शिक्षक ऐसे हैं जो अपने कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद भी नियमित रूप से ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये कि विभाग इन लापरवाह शिक्षकों पर कोई दंड या कार्रवाई नहीं कर रहा है, बल्कि उन्हें मैन्युअली वेतन जारी कर रहा है।
कई नियमित शिक्षक अभी भी समय पर स्कूल नहीं जा रहे या देरी से आ रहे हैं, लेकिन उनकी लापरवाही पर विभाग चुप है। दूसरी ओर, ई-अटेंडेंस व्यवस्था का पालन न करने पर ये नीति अतिथि शिक्षकों पर सख्ती से लागू की गई है। जिले के 98 अतिथि शिक्षकों को ऑनलाइन अटेंडेंस में लापरवाही बरतने के कारण वेतन जारी नहीं किया गया है, उन पर सीधे वेतन रोकने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग का तर्क है कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय ऑनलाइन सिस्टम से जारी किया जा रहा है। 764 नियमित शिक्षकों की लापरवाही पर वेतन जारी करना और 98 अतिथि शिक्षकों का वेतन रोक देने से शिक्षा विभाग की पारदर्शिता व ई-अटेंडेंस व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर विभाग की इस दोहरी नीति से न केवल कर्मचारियों में रोष है, बल्कि समय पर स्कूल न जाने और समय से पहले लौटने की प्रवृत्ति के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है। जानकार बताते हैं कि यदि विभाग नियमित शिक्षकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाता है, तो ये माना जाएगा कि ई-अटेंडेंस की ये व्यवस्था केवल अतिथि शिक्षकों को नियंत्रित करने तक ही सीमित रह गई है, और नियमित कर्मचारियों के लिए ये केवल एक औपचारिक नियम बनकर सीमित रह गई है।
नियमित शिक्षकों को मैन्युअली वेतन ^तकनीकी कारण हैं, अतिथि शिक्षकों को ई-अटेंडेंस पर ही वेतन जारी किया जा रहा है। ऑनलाइन सिस्टम से ही उन्हें वेतन जारी हो रहा है। अभी जिले के सभी नियमित शिक्षकों को मैन्यूअली वेतन दिया जा रहा है। जनवरी से ऑनलाइन अटेंडेंस सभी के लिए अनिवार्य हो सकती है। -केएस भिलाला, जिला शिक्षाधिकारी।
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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस शिक्षा सत्र से अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था, शिक्षा विभाग की दोहरी नीति के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर विभाग ने 90% से अधिक शिक्षकों को सफलतापूर्वक ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से जोड़ दिया है, वहीं अटेंडेंस में लापरवाही बरतने पर नियमित शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए अपनाए गए अलग-अलग मापदंडों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। ई-अटेंडेंस व्यवस्था की सबसे बड़ी विसंगति ये कि विभाग नियमित शिक्षकों की लापरवाही पर पूरी तरह मेहरबान है, जबकि अतिथि शिक्षकों के साथ नियमों का पालन न करने पर तत्काल सख्ती बरती जा रही है। जिले में 764 नियमित शिक्षक ऐसे हैं जो अपने कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद भी नियमित रूप से ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये कि विभाग इन लापरवाह शिक्षकों पर कोई दंड या कार्रवाई नहीं कर रहा है, बल्कि उन्हें मैन्युअली वेतन जारी कर रहा है।
कई नियमित शिक्षक अभी भी समय पर स्कूल नहीं जा रहे या देरी से आ रहे हैं, लेकिन उनकी लापरवाही पर विभाग चुप है। दूसरी ओर, ई-अटेंडेंस व्यवस्था का पालन न करने पर ये नीति अतिथि शिक्षकों पर सख्ती से लागू की गई है। जिले के 98 अतिथि शिक्षकों को ऑनलाइन अटेंडेंस में लापरवाही बरतने के कारण वेतन जारी नहीं किया गया है, उन पर सीधे वेतन रोकने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग का तर्क है कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय ऑनलाइन सिस्टम से जारी किया जा रहा है। 764 नियमित शिक्षकों की लापरवाही पर वेतन जारी करना और 98 अतिथि शिक्षकों का वेतन रोक देने से शिक्षा विभाग की पारदर्शिता व ई-अटेंडेंस व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर विभाग की इस दोहरी नीति से न केवल कर्मचारियों में रोष है, बल्कि समय पर स्कूल न जाने और समय से पहले लौटने की प्रवृत्ति के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है। जानकार बताते हैं कि यदि विभाग नियमित शिक्षकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाता है, तो ये माना जाएगा कि ई-अटेंडेंस की ये व्यवस्था केवल अतिथि शिक्षकों को नियंत्रित करने तक ही सीमित रह गई है, और नियमित कर्मचारियों के लिए ये केवल एक औपचारिक नियम बनकर सीमित रह गई है।
नियमित शिक्षकों को मैन्युअली वेतन ^तकनीकी कारण हैं, अतिथि शिक्षकों को ई-अटेंडेंस पर ही वेतन जारी किया जा रहा है। ऑनलाइन सिस्टम से ही उन्हें वेतन जारी हो रहा है। अभी जिले के सभी नियमित शिक्षकों को मैन्यूअली वेतन दिया जा रहा है। जनवरी से ऑनलाइन अटेंडेंस सभी के लिए अनिवार्य हो सकती है। -केएस भिलाला, जिला शिक्षाधिकारी।
