शौक के लिए खरीदी बुलेट बाइक, उसी ने ली जान: महिला दरोगा के पिता बोले- जिस घर से बेटी को विदा करना था, शव लेकर कैसे कदम रुखूंगा – Ghaziabad News h3>
पुलिस लाइन में अंतिम विदाई के समय बिलखतीं रिचा की मां रेखा सचान, बहन विभा और अन्य परिजन।
गाजियाबाद में महिला दरोगा रिचा सचान (25 साल) की सड़क हादसे में मौत हो गई। वह कानपुर नगर की रहने वाली थीं। मेरठ पीटीएस में पिछले साल ही ट्रेनिंग पूरी होने के बाद गाजियाबाद में पहली पोस्टिंग मिली। सोमवार को जब पुलिस लाइन में अफसरों ने सब इंस्पेक्टर के श
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गाजियाबाद में विलाप करते परिजन।
पिता चाहते थे बेटी अफसर बने
कानपुर नगर के सजेती थाना क्षेत्र के असधना गांव निवासी बाबूराम सचान पेशे से किसान हैं। इनके बड़े बेटे कपिल सचान सिंचाई विभाग में जेई हैं, दूसरे बेटे विकास फतेहपुर में सरकारी शिक्षक हैं। तीसरा बेटा विनय सचान हरिद्वार में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। बड़ी बेटी विभा की शादी हो चुकी है, पांच बहन भाइयों में रिचा सचान सबसे छोटी थीं, जिनकी रविवार देररात गाजियाबाद में बुलेट बाइक पर ड्यूटी से घर जाते समय मौत हो गई। सामने से डॉग सड़क पर आ गया, जिससे बाइक फिसल गई, इसी दौरान सामने से आ रही कार ने बुलेट में टक्कर मार दी, चौकी की पुलिस दरोगा रिचा सचान को सर्वोदय अस्पताल लेकर पहुंची, जहां मृत घोषित कर दिया।
दैनिक NEWS4SOCIALसे बात करते रिचा के पिता बाबूराम सचान।
पिता बाबूराम सचान ने बताया कि मैंने खेती की है, लेकिन बेटे और बेटियों को पढ़ाने में कोई कमी नहीं की। 3 बेटों को खूब पढ़ाया और वह सरकारी नौकरी में हैं। बेटी को मैं अफसर बनाना चाहता था। बेटी रिचा ने आईएएस की तैयारी की, जहां कानपुर में कोचिंग भी की, इसी दौरान 2023 में यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती हो गईं। जिसके बाद आगे की तैयारी छूट गई।
पासिंग आउट परेड में आए थे भाई और मां पिता
रिचा सचान की टोली की एक महिला सब इंस्पेक्टर ने बताया कि 13 मार्च 2023 को रिचा की मेरठ पीटीएस में ट्रेनिंग शुरू हुई। जहां परिवार के सदस्य उन्हें छोड़ने आए थे। एक साल तक ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 16 मार्च 2024 को पासिंग आउट परेड हुई। पासिंग आउट परेड में पिता, मां रेखा सचान और भाई व अन्य सदस्य भी आए थे।
पिता ने बताया कि 16 अगस्त को फोन पर रिचा से आखिरी बार बात हुई थी। जो करीब 2 महीने से छुट्टी लेकर घर नहीं आई थी, रक्षाबंधन पर भी भाई, भाभी, अपनी मम्मी से भी बात की। वह बहुत खुश थी, आखिरी बार कॉल पर मां और पापा से कहा था कि मैं ठीक हूं, अपना ख्याल रखना। अगले महीने छुट्टी लेकर आउंगी। जहां अपने भैया और भाभी से भी बात की थी। इससे पहले भी एक बार रिचा को हल्की चोट लगी लगी थी।
शौक के लिए खरीदी थी बुलेट बाइक
रिचा सचान को अंदाजा भी नहीं था कि अपने शौक पूरा करने के लिए जिस बुलेट बाइक को खरीद रही हूं, एक दिन वही मेरी जान ले लेगी। लेकिन रिचा के साथ यही हुआ। रिचा की कविनगर में थाने में पोस्टिंग थी।
रिचा सचान ने गाजियाबाद में 3 अप्रैल 2024 को बुलेट बाइक खरीदी थी। यह फाइल फोटो है।
3 अप्रैल 2024 को रिचा सचान ने 350 सीसी में बुलेट बाइक गाजियाबाद से खरीदी थी। जिसमें उन्होंने कविनगर थाने का ही एड्रेस लिखा है। वह अपने किराए के आवास से लेकर थाने और ड्यूटी पर बुलेट बाइक से ही आती जाती थीं, उनके इसी थाने में एक रिश्तेदार महिला दरोगा भी तैनात हैं। साथ में ट्रेनिंग करने वाली कहतीं थीं कि रिचा की हाइट बहुत अच्छी है, ऐसी पर्सनेलिटी मिलती नहीं है। जिसके चलते अक्सर व बुलेट बाइक से ही चलती थीं, उनकी बुलेट बाइक को दूसरी महिला दरोगा भी कई बार चला लेते थे।
रविवार रात में थाने में साथ की महिला दरोगा और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ खाना भी खाया था, जिसमें कहा था कि मुझे कुछ काम करना है, एक विवेचना के पर्चे काटने हैं। जिसके बाद एक महिला पुलिसकर्मी को वह थाने के गेट पर भी रात के 10 बजे छोड़ने आई आईं थीं, ओर कहा कि आराम से जाना।
जहां से उठनी थी डोली वहां पहुंची अर्थी
पिता बाबूराम सचान कभी अपने माथे पर हाथ रख लेते तो कभी भावुक होकर कहा कि मैंने बेटी को अफसर बनाया, लेकिन यह दिन देखना पड़ेगा ऐसा सोचा नहीं था। जिस बेटी की जल्द ही शादी करनी थी, आज उसका शव देख रहा हूं। ऊपर वाले ने कैसा दिन मुझे दिखाया है।
इसी बुलेट बाइक से रिचा की जान गई, देखते हुए परिजन।
आगे कहा कि जिस घर से बेटी की शादी में डोली उठनी थी, विदाई होनी थी सर्दियों में इसकी तैयारी थी। लेकिन आज मैं अपनी बेटी की लाश लेकर घर जाउंगा। मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी हो जाएगा। जब भी रिचा अपनी मम्मी से या भाइयों से बात करती तो यह जरूर पूछती थी कि पापा ठीक हैं। 2 दिन पहले भी फोन पर बात हुई थी, तो भी यही कहा था कि पापा अपना ध्यान रखना।




