जौनपुर में पेंशनरों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन: पुरानी पेंशन बहाली समेत 7 मांगों को लेकर सैकड़ों लोग धरने पर बैठे – Jaunpur News

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जौनपुर में पेंशनरों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन:  पुरानी पेंशन बहाली समेत 7 मांगों को लेकर सैकड़ों लोग धरने पर बैठे – Jaunpur News

जौनपुर में पेंशनरों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन: पुरानी पेंशन बहाली समेत 7 मांगों को लेकर सैकड़ों लोग धरने पर बैठे – Jaunpur News

अंकित श्रीवास्तव | जौनपुर8 मिनट पहले

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सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने धरना दिया।

जौनपुर में मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने धरना प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष सी बी सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी मांगें रखीं। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने इस आंदोलन का समर्थन किया।

सरकार ने 1 जनवरी 2026 से वेतन और पेंशन के पुनरीक्षण का वादा किया था। लेकिन आयोग के गठन की कार्यवाही अभी तक शुरू नहीं हुई है। फाइनेंशियल बिल 2025 के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन का पुनरीक्षण नहीं होगा।

पेंशनरों ने छह प्रमुख मांगें प्रस्तुत कीं। फाइनेंशियल बिल 2025 में किए गए पेंशन नियमों में बदलाव को निरस्त करने की मांग की गई। पेंशनरों को फाइनेंशियल एक्ट 2025 के वैलीडेशन क्लॉज से संरक्षण की मांग की। केंद्रीय आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग रखी। पेंशन राहत का शासनादेश कर्मचारियों के महंगाई भत्ते के साथ जारी करने की मांग की। एनपीएस और यूपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग रखी। पेंशन के राशिकरण की कटौती 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करने की मांग की।

22 अप्रैल 2025 को पूरे देश में धरना प्रदर्शन हुआ था। कोरोना काल में रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते के एरियर का भुगतान की मांग भी की गई। प्राथमिक विद्यालयों को मर्ज या बंद न करने की मांग भी रखी गई, क्योंकि इससे गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी।

सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने धरना दिया।

सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने धरना दिया।

(1) फाइनेंशियल बिल 2025 के माध्यम से पेंशनरी नियमों में किये गये बदलाव को तत्काल निरस्त कर सेवानिवृत्त होने की तिथि के आधार पर पेंशनर समूह में भेद न पैदा किया जाय। फाइनेंशियल एक्ट 2025 के वैलीडेशन क्लॉज से पेंशनरों को प्रोटेक्शन दिया जाये।

(2) केन्द्रीय आतवें वेतन आयोग के गठन की कार्यवाही पूर्ण कर उसके नियम एवं शों में पेंशन के पुनरीक्षण का विषय भी संदर्भित किया जाये। कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों के वेतन पुनरीक्षण की तिथि एवं वेतन निर्धारण के प्रचलित नियमों के अनुरूप ही पेंशनरों की पेंशन के पुनरीक्षण की तिथि एवं सिद्धांत में समानता रखी जाये।

(३) पेशमरों की पेंशन राहत का शासनादेश कर्मचारियों, शिक्षकों के महंगाई भत्ते के शासनादेश की तिथि को ही जारी किया जाये। महंगाई राहत को महंगाई भत्ते से जी-लिंक न किया जाये।देश में एन०पी०एस० और यू०पी०एस० की व्यवस्था के स्थान पर कर्मचारियों एवं शिक्षकों को परिभाषित लाभ योजना ओ०पी०एस० ही प्रदान की जाये।

(5) पेंशन के राशिकरण की हो रही कटौती 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष लायी जाये।

(6) कोरोना काल में कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों के रोके गये 18 महीने के डी०ए० के एरियर का भुगतान तत्काल किया जाये।

(7) अनिवार्य शिक्षा अधिनियम को दृष्टि में रखते हुए गरीब बच्चों की पढ़ाई हेतु बने प्राथमिक विद्यालयों को न तो किसी अन्य विद्यालय में मर्ज किया जाये और न ही किसी प्राथमिक विद्यालय को बन्द किया जाये। सरकार का मर्ज करने का निर्णय गरीब बच्चों को पढ़ाई से महरूम करेगा।

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