डार्क वेब से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़: मोतिहारी पुलिस ने 5 आरोपी पकड़े, 30 लाख रुपये और हथियार बरामद; मास्टरमाइंड फरार – Motihari (East Champaran) News h3>
मोतिहारी में साइबर थाना पुलिस ने डार्क वेब के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह देशभर में ठगी का जाल फैला कर लोगों से ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने सोमवार को इस गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड सम
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पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 30 लाख भारतीय रुपए, 1 लाख नेपाली रुपए, नोट गिनने की तीन मशीनें, 7 मोबाइल फोन, दो देसी रिवॉल्वर, 16 पासबुक, 49 एटीएम कार्ड, 37 चेकबुक और SBI ढाका शाखा की नकली मुहर जब्त की है। ये सभी सबूत गिरोह के संगठित और हाईटेक नेटवर्क को साबित करते हैं।
अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
एक शिकायत से बड़ा रैकेट का खुलासा
साइबर डीएसपी अभिनव पराशर ने बताया कि, “उत्तर प्रदेश राज्य से प्रतिबिंब पोर्टल पर ₹50,000 की साइबर ठगी की शिकायत मिली थी। जांच में मोतिहारी के रघुनाथपुर निवासी दीपांशु का नाम सामने आया। छापेमारी में दीपांशु को पकड़ा गया, जिसने कबूला कि वह एक हफ्ते में करीब ₹70 लाख की कमाई कर चुका था।”
दीपांशु की निशानदेही पर पुलिस ने सुमित को पकड़ा, जिसके घर से नकद रकम और मशीनें मिलीं। सुमित के बयान पर सत्यम, आयुष, यश और अंश नामक आरोपियों की पहचान हुई। सत्यम के घर से दो देसी रिवॉल्वर बरामद हुए, जबकि मीना बाजार से दया शंकर को पकड़ा गया। – अभिनव पराशर, साइबर डीएसपी
जियो मार्ट ऑपरेटर भी गिरफ्तार
साइबर डीएसपी अभिनव पराशर ने बताया कि, “दीपांशु से पूछताछ में घोड़ासहन निवासी पुरुषोत्तम का नाम सामने आया, जो जियो मार्ट चलाता है। पुलिस ने घोड़ासहन में छापा मारकर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 14 लाख रुपए भारतीय और 1 लाख रुपए नेपाली मुद्रा बरामद किया गया।
उससे पूछताछ में यह खुलासा भी हुआ कि पुरुषोत्तम का पिता भी 2014-15 में इसी तरह के साइबर अपराध में जेल जा चुका है।
दिल्ली से कंट्रोल होता था नेटवर्क
साइबर डीएसपी के अनुसार, पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह का संचालन मोतिहारी के सत्यम के निर्देश पर किया जाता था। उसके तीनों रिश्तेदारी में भाई- आयुष, यश और अंश दिल्ली से पूरे नेटवर्क का प्रबंधन करते थे।
गिरोह के सदस्य फोन कॉल, फेक आईडी, ब्लैक मेल सहित अन्य तरीकों से लोगों के खाते से फ्रॉड कर पैसा निकालते थे। इसके बाद साइबर ठगी का पैसा मोतिहारी में बैठा सत्यम अलग-अलग अकाउंट में भेज कर उसे कैश कराता था।
आरोपियों के पास से भारतीय रुपए, नेपाली रुपए, नोट गिनने की मशीनें, मोबाइल, देसी रिवॉल्वर और पासबुक-एटीएम कार्ड बरामद किया।
ठगी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी से करते थे व्हाइट
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ठगी से कमाए गए काले धन को RSN (रियल स्टेट नेटवर्क) और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए सफेद करता था। यह नेटवर्क तकनीकी रूप से इतना एडवांस था कि पैसे की ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो जाती थी।
गिरोह के सदस्यों की सभी गाड़ियों का नंबर 8055 यानी BOSS है।
गिरोह का टैगलाइन था- “बॉस”
गिरोह से जुड़े हुए जितने भी लोग हैं, उनके पास मौजूद सभी गाड़ियों का नंबर 8055 है, जो कि “BOSS” की तरह लिखा हुआ दिखता है। मिली जानकारी के अनुसार, सभी आरोपी फोन, मैसेज पर बात करने से पहले “बॉस” शब्द बोलते थे। यही शब्द गिरोह की पहचान थी।
आरोपी सत्यम के पास तीन गाड़ियां हैं- स्कोडा, स्कॉर्पियो N और थार। इसके अलावा स्कूटी और बुलेट भी है, जिस पर बॉस (8055) नंबर लिखा हुआ है। साथ ही इसके साथियों के पास भी जो गाड़ी है, उसका भी नंबर बॉस (8055) है।
बॉस गिरोह के सभी ऐसे करते थे काम
पुलिस की छापेमारी में गिरफ्तारी पांच आरोपियों में सुमित एक सौरभ स्कूल चलाता है। उसका काम ठगी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलना था। दूसरा आरोपी संजीव कुमार तीसरे आरोपी सत्यम का चचेरा भाई है, जो मोतिहारी हवाई अड्डा चौक पर परचून का दुकान खोला है। इसका काम पैसा जमा होने के बाद उसे सही जगह तक पहुंचाना था।
चौथा आरोपी पप्पू कुमार ने पांचवें दीपांशु को अपने साथ जोड़ा था। दीपांशु एक खाद्य कंपनी में तीन जिले का मैनेजर था, जो अलग-अलग जगहों से आए पैसे को कैश में तब्दील कराता था। छठवां आरोपी सुनील श्रीवास्तव आरोपी सत्यम का पिता है। पुलिस की छापेमारी में उनके घर से कैश, हथियार और पासबुक आदि बरामद हुआ। फरार आरोपियों की तलाश जारी
साइबर पुलिस ने मास्टरमाइंड और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी है। पुलिस ने कहा है कि “इस गिरोह के नेटवर्क को जल्द ही पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।”
