स्वास्थ्य को लेकर लोग अकसर सचेत रहते है, चाहे फिर वो शरीर का कोई भी भाग क्यों न हो लोग अपने शरीर के लिए बहुत से तरीके के विटामिन से भरपूर चीजे लेते है, ताकी उनका शरीर स्वास्थ्य रह सके, जिससे वो अपने जीवन में खुश रहे. लोग हर एक तरीका अपनाते है जिससे वे उन्हे किसी भी प्रकार की कोई बिमारी न हो सके. वहीं ये बहुत कम लोग जानते होगे कि मुंह खोलकर सोना केवल आदत ही नही है, बल्कि एक बडे खतरे का संकेत है. लोगों को इसकी जानकारी नही है कि यह एक बीमारी है. नींद के दौरान प्रर्याप्त ऑक्सीजन शरीर में नही जा पाती है. जो हमारे शरीर के लिए खतरा बन सकता है.
बता दें कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया नामक रोग में सोते समय अक्सर सांस लेने की प्रक्रिया कुछ पलों के लिए रुक जाती है और इसके बाद यह फिर शुरू हो जाती है. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया विकार से पीड़ित महिलाओं में कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है. खर्राटे, नींद की गड़बड़ी और थकान इसके सामान्य लक्षण हैं.
ग्रीस की थेसालोनिकी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता अथानेसिया पटका ने कहा, ‘19 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए अध्ययन से जाहिर होता है कि ओएसए का कैंसर से जुड़ाव हो सकता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं से इसका गहरा जुड़ाव पाया गया है महिलाओं में ओएसए की गंभीरता कैंसर का संकेत हो सकता है.’
मालूम हो की अगर आपके घर में सोते समय यदि कोई भी मुंह खोलकर सोता है और नाक की बजाय मुंह से सांस लेता है, तो सचेत रहे. मुंह खोलकर सोने से ऑक्सीजन का संचार सही तरीके से ब्रेन तक नही जाता है, जिसके कारण उसका मानसिक विकास अवरूद्ध होन लगता है. जिससे शरीर को काफी नुकसान हो सकता है, साथ ही कई बीमारीयों का भी आपको सामना करना पड़ सकता है.
बीमारी के लक्षण
सोते समय बीच-बीच में सांस रुकना
इतनी जोर से खर्राटे लेना कि अन्य लोगों की नींद में खलल पड़े
सोते हुए बीच-बीच में अचानक सांस नहीं आना, जिससे अक्सर पीड़ित व्यक्ति नींद से उठ जाता है
दिन भर सुस्ती छाई रहना, जिससे व्यक्ति काम के दौरान, टेलीविजन देखते हुए या वाहन चलाते हुए सो सकता है
किन लोगों को है जोखिम
मोटापे से ग्रस्त लोगों को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया होनी की आशंकाएं ज्यादा होती हैं
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया होने की संभावना उन लोगों में दोगुनी हो जाती है, जिन्हें रात में अक्सर नाक बंद होने की समस्या रहती है.
गर्दन के मोटे होने से सांस मार्ग छोटा हो सकता है और यह स्थिति मोटापे का संकेत हो सकती है. पुरुषों के लिए गर्दन की माप 17 इंच और महिलाओं के लिए 16 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए. इससे अधिक होने पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया का जोखिम बढ़ जाता है.
इलाज के सही तरीके
इसके लिए स्लीप स्टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी टेस्ट किया जाता है, जिसके अंतर्गत पल्स ऑक्सीजन, मस्तिष्क की तरंगें, दिल की धड़कन, सीने और आंखों की पूरी जांच की जाती है. कई स्तरों पर मरीजकी जांच कर उसके स्लीपिंग पैटर्न को समझने की कोशिश की जाती है. यदि सही समय पर समस्या को पहचान लिया जाए तो इलाज से काफी हद तक काबू पाया जा सकता है.
निरंतर हवा का सकारात्मक दबाव बने रहना : यह एक छोटा पोर्टेबल मैकेनिकल डिवाइस है. इस डिवाइस में एक पंखा लगा होता है, जो नींद के दौरान लगातार हवा देकर आपके सांस मार्ग को खुला रखता है.
कुछ ऐसे प्लास्टिक डिवाइस होते हैं, जिन्हें मुंह में पहना जाता है. दिखने में ये ऑर्थोडॉन्टिक रिटेनर्स या स्पोर्ट माउथ गार्ड्स की ही तरह होते हैं. ये ओरल डिवाइस सांस मार्ग को चिपकने से रोकते हैं.
सर्जिकल इलाज के अंतर्गत नाक, तालू, जीभ, जबड़ा, गर्दन और कई अन्य जगहों की समस्याओं को दूर किया जाता है. सबसे लोकप्रिय सर्जरी लेजर प्रक्रिया है, जो खर्राटे भरने और सोते वक्त सांस की समस्या को दूर करने में सक्षम हैं

