Suchitra Sen की कहानी : 15 साल में शादी, लेती थीं हीरो से ज्यादा फीस, ठुकरा दिया था दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड h3>
‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ जैसे खूबसूरत गीत को भला किसने नहीं सुना होगा। इस गीत में जान डालने वाली सुचित्रा सेन (Suchitra Sen) की आज जन्मतिथि (Suchitra Sen Birth Anniversary)है। आइए इस मौके पर आपको बॉलिवुड की दमदार और खूबसूरत अदाकारा की कहानी से रूबरू करवाते हैं जिनकी असल कहानी किसी सिनेमा से कम नहीं। वह अभिनेत्री जिनका बंगाली फिल्मों से लेकर बॉलिवुड में डंका बजता था। ऑस्कर पाने वाले निर्देशक सत्यजीत रे से लेकर राज कपूर जैसे बड़े-बडे़ डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए तरसते थे। लेकिन सुचित्रा वो ऐक्ट्रेस थीं जो सिर्फ अपने असूलों पर काम करती थीं। कई बार बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को ठुकरा देती थीं। एक बार तो उन्होंने दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड को भी लेने से मना कर दिया था। हिंदी सिनेमा की पहली पारो को देख दर्शकों की सांसें आज भी थम जाती हैं। उनकी सादगी और अदाकारी की खूब प्रंशसा होती हैं।
आज सुचित्रा सेन हमारे बीच नहीं है। 82 साल की उम्र में कोलकत्ता में उन्होंने अंतिम सांस ली। 6 अप्रैल 1931 को जन्मी सुचित्रा सेन ने ‘मुसाफिर’, ‘हॉस्पिटल’,’ मुंबई का बाबू’, ‘ममता’ और ‘आंधी’ जैसी फिल्मों से बॉलिवुड में ढंका बजाया। उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा इंडस्ट्री के पहले ‘महानायक’ उत्तम कुमार के साथ खूब पसंद किया गया।
महज 6 बॉलिवुड फिल्में और दुनियाभर में मच गई धूम
सुचित्रा सेन ने अपने करियर में महज 61 फिल्में कीं। इनमें से बॉलिवुड में सिर्फ 6 फिल्में थी। बाकि सभी फिल्में बांग्ला की रही। इनमें देवदास और आंधी जैसी फिल्में उनकी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उन्होंने अपने करियर में 25 से ज्यादा फिल्मों को रिजेक्ट कर दिया।
सुचित्रा सेन के बचपन की कहानी
सुचित्रा सेन के पिता हेड मास्टर और मां गृहणि थीं। ब्राह्माण परिवार में 6 अप्रैल 1931 में उनका जन्म हुआ। परिवार ने कम उम्र में बेटी की शादी करवा दी। शादी के बाद सुचित्रा सेन ने फिल्मों में कदम रखा और अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।
15 साल में शादी और 16 साल में दिया बेटी को जन्म
सुचित्रा सेन ने 15 साल की उम्र में दीबानाथ सेन से शादी कर ली। शादी के एक साल बाद उन्होंने बेटी मुनमुन सेन को जन्म दिया। मुनमुन भी मां की तरह एक फिल्म अभिनेत्री बनीं। सुचित्रा सेन ने शादी के बाद अपने अभिनय के सपने को पूरा किया। इस सपने को पूरा करने में उनके ससुर और पति ने मदद की। इस तरह उन्होंने चौत्तोर फिल्म से डेब्यू किया। पहली फिल्म में उत्तम कुमार और सुचित्रा की जोड़ी को दर्शकों का खूब प्यार मिला। इस जोड़ी ने पर्दे पर 20 साल राज किया। यही वजह है कि उन्होंने अपने करियर में 61 में से 30 फिल्में उत्तम कुमार के साथ ही कीं।
किरदारों में फूंक देती थीं जान
सुचित्रा ने अपने करियर में अलग-अलग तरह की फिल्में की। वह किरदार की गंभीरता को बहुत जल्दी भांप लेती थीं और फिल्में चुनने में भी एकदम सटीक फैसला लेती थीं। यही वजह है कि इंदिरा गांधी पर बनी ‘आंधी’ हो या आइकॉनिक फिल्म देवदास। हर फिल्म में वह अपने किरदार को जीवंत बना देती हैं।
महज 6 बॉलिवुड फिल्में और दुनियाभर में मच गई धूम
सुचित्रा सेन ने अपने करियर में महज 61 फिल्में कीं। इनमें से बॉलिवुड में सिर्फ 6 फिल्में थी। बाकि सभी फिल्में बांग्ला की रही। इनमें देवदास और आंधी जैसी फिल्में उनकी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उन्होंने अपने करियर में 25 से ज्यादा फिल्मों को रिजेक्ट कर दिया।
सुचित्रा सेन के बचपन की कहानी
सुचित्रा सेन के पिता हेड मास्टर और मां गृहणि थीं। ब्राह्माण परिवार में 6 अप्रैल 1931 में उनका जन्म हुआ। परिवार ने कम उम्र में बेटी की शादी करवा दी। शादी के बाद सुचित्रा सेन ने फिल्मों में कदम रखा और अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।
15 साल में शादी और 16 साल में दिया बेटी को जन्म
सुचित्रा सेन ने 15 साल की उम्र में दीबानाथ सेन से शादी कर ली। शादी के एक साल बाद उन्होंने बेटी मुनमुन सेन को जन्म दिया। मुनमुन भी मां की तरह एक फिल्म अभिनेत्री बनीं। सुचित्रा सेन ने शादी के बाद अपने अभिनय के सपने को पूरा किया। इस सपने को पूरा करने में उनके ससुर और पति ने मदद की। इस तरह उन्होंने चौत्तोर फिल्म से डेब्यू किया। पहली फिल्म में उत्तम कुमार और सुचित्रा की जोड़ी को दर्शकों का खूब प्यार मिला। इस जोड़ी ने पर्दे पर 20 साल राज किया। यही वजह है कि उन्होंने अपने करियर में 61 में से 30 फिल्में उत्तम कुमार के साथ ही कीं।
किरदारों में फूंक देती थीं जान
सुचित्रा ने अपने करियर में अलग-अलग तरह की फिल्में की। वह किरदार की गंभीरता को बहुत जल्दी भांप लेती थीं और फिल्में चुनने में भी एकदम सटीक फैसला लेती थीं। यही वजह है कि इंदिरा गांधी पर बनी ‘आंधी’ हो या आइकॉनिक फिल्म देवदास। हर फिल्म में वह अपने किरदार को जीवंत बना देती हैं।