सोशल मीडिया के बहकावे में न आएं! सिगरेट पीने वालों में कोरोना का खतरा कहीं ज्यादा
हाइलाइट्स:
- सोशल मीडिया पर अफवाह है कि स्मोकिंग वालों को कोरोना का खतरा कम है
- डॉक्टरों ने लोगों को इस तरह की अफवाहों से दूर रहने को कहा है
- स्मोकर्स में कोरोना का खतरा भी है और उन्हें गंभीर बीमारी भी होने का खतरा है
नई दिल्ली
सोशल मीडिया के जरिए शायद आप तक भी सूचना पहुंची होगी कि स्मोकिंग करने वालों में कोरोना का खतरा कम है। यानी जो लोग सिगरेट नहीं पीते हैं, उन्हें सिगरेट पीने वालों की तुलना में कोरोना का ज्यादा खतरा है। यह भी बताया जा रहा है कि यह स्टडी मेडिकल जरनल में पब्लिश हुई है। लेकिन, यह पूरी तरह से गलत है। स्मोकर्स में कोरोना का खतरा भी है और उन्हें गंभीर बीमारी भी होने का खतरा है। स्मोकिंग की वजह से उनके लंग्स पहले से ही खराब होते हैं। कोरोना का सबसे ज्यादा अटैक लंग्स पर ही होता है। इसलिए, इस गलतफहमी में न रहें, नहीं तो आपकी परेशानी और बीमारी दोनों बढ़ सकती हैं।
देश के जाने-माने लंग्स सर्जन और मेदांता अस्पताल के एक्सपर्ट डॉ अरविंद कुमार ने कहा कि इस कथित स्टडी को खारिज करते हुए कहा कि यह तंबाकू कंपनियों की स्पॉन्सरशिप न्यूज है। किसी स्टैंडर्ड साइंटिफिक जरनल में आज तक ऐसा कोई आर्टिकल नहीं छपा है और न ही इस सूचना का कोई साइंटिफिक एविडेंस है। यह सरासर गलत है। डॉक्टर अरविंद ने कहा कि सबको पता है कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनके लंग्स पहले से खराब होते हैं। हमने देखा है कि ऐसे लोगों में कोरोना कितना सीवियर हो जाता है। उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है। इसलिए, इस सूचना पर भरोसा करने के बजाय कोरोना से बचाव के लिए जो गाइडलाइंस हैं, उनपर भरोसा करके अमल करें।
फोर्टिस कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ तपस्वनी प्रधान ने कहा कि दरअसल, यह सूचना या स्टडी जो दुनिया के सामने लाई गई है, वह तंबाकू इंडस्ट्री की एक चाल है। अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि स्मोकर्स को कोरोना का खतरा कम है। डॉक्टर ने कहा कि इस स्टडी में 5 ऑथर थे, जिसमें से 3 तंबाकू कंपनी में काम करते थे। बाद में उन्हें हटा दिया गया और इस स्टडी को भी वापस ले लिया गया है। इसलिए, इस तरह की स्टडी पर विश्वास नहीं करें, यह भ्रामक है।
धर्मशिला कैंसर अस्पताल के कैंसर सर्जन डॉ अंशुमान कुमार ने कहा कि स्मोकर के लंग्स डैमेज होते हैं, उनकी इम्युनिटी भी कमजोर होती है। ऐसे में जब ऐसे लोग संक्रमित होते हैं और वायरस लंग्स तक पहुंचता है तो खतरा भी ज्यादा होता है। इस तरह की स्टडी पर विश्वास नहीं करें। अगर ऐसा कुछ है भी तो मल्टीसेंटर ऐसी स्टडी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न हो कि यह सूचना लोगों को भ्रमित न कर दें। जो लोग स्मोकर नहीं थे, वो कहीं इससे बचने के लिए स्मोकिंग न करने लगे। इसलिए, यह सूचना जानी चाहिए कि स्मोकर को संक्रमण होने पर ज्यादा खतरा है।
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