भारतीय सिनेमा में महमूद (Mehmood) जैसा कोई हास्य अभिनेता नहीं हुआ. उन्होंने फिल्मी पर्दे पर दर्शकों को खूब हंसाया और रुलाया भी. उस दौर में महमूद एक-मात्र हास्य अभिनेता थे, जिनकी मौजूदगी भर से दर्शक चहक उठते थे. आज ही के दिन 1932 में कॉमेडी के इस बादशाह का जन्म हुआ था. वह करीब 300 हिंदी फिल्मों में नजर आए.
हीरो से ज्यादा मिलता था पैसा
उनकी शख्सीयत और अभिनय ऐसा था कि थियेटर में मुख्य हीरो से ज्यादा दर्शक उनके लिए तालियां बजाते थे. फिल्म नर्देशक भी यह बात बखूबी जानते थे. इसलिए फिल्म हिट कराने के लिए महमूद को फिल्म में लेने के लिए तैयार रहते थे और उन्हें हीरो से ज्यादा पैसे देते थे.
किशोर कुमार के थे बड़े प्रशंसक
तब के बड़े-बड़े अभिनेता भी उनका लोहा मानते थे और उनसे भय खाते थे. सेट पर उनकी मौजूदगी में हीरो अपनी शर्ट की बटन बंद करना नहीं भूलते थे. पर क्या आप जानते हैं कि फिल्मी पर्दे पर ऐसा दबदबा रखने वाले महमूद भी किसी से डरते थे. वह थे किशोर कुमार. एक बार महमूद ने किशोर कुमार के बारे में कहा था, ‘मैं सभी अभिनेताओं के बारे में जानता हूं कि कौन कितने पानी में हैं. पर किशोर कुमार का पता लगाना थोडा मुश्किल है. वो कभी कुछ भी कर जाते हैं अपने किरदार के साथ.’ महमूद और किशोर कुमार ने फिल्म पड़ोसन में साथ काम किया था. तभी तो यह फिल्म बहुत सफल रही. अपने आखिरी दिनों में भी वह फिल्मों को लेकर उत्साहित रहते थे. वह कहते थे कि जिंदगी में गम बहुत है. इसलिए कुछ भी हो जाए, हर हाल में मुस्कराते रहें. इसी मूलमंत्र के साथ उन्होंने अपनी असल जिंदगी को फिल्मी पर्दे पर जिया और लोगों का खूब मनोंरजन किया.












