870 साल की हुई ऐतिहासिक जैसलमेर नगरी: CM भजनलाल शर्मा ने दी बधाई; सोनार दुर्ग का म्यूजियम टिकट फ्री रखा गया – Jaisalmer News

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870 साल की हुई ऐतिहासिक जैसलमेर नगरी:  CM भजनलाल शर्मा ने दी बधाई; सोनार दुर्ग का म्यूजियम टिकट फ्री रखा गया – Jaisalmer News

870 साल की हुई ऐतिहासिक जैसलमेर नगरी: CM भजनलाल शर्मा ने दी बधाई; सोनार दुर्ग का म्यूजियम टिकट फ्री रखा गया – Jaisalmer News

जैसलमेर। सोनार दुर्ग पर रियासत कालीन पीला-केसरिया ध्वज फहराया गया।

जैसलमेर नगरी आज पूरे 870 साल की हो गई। इस ऐतिहासिक मौके पर जैसलमेर में राजशाही परंपराओं के तहत ध्वज पूजन, गायत्री यज्ञ और कुलदेवी मां स्वांगिया की विधिवत पूजा के साथ भव्य आयोजन हुए। राजमहल परिसर में भाटी वंश की कुलदेवी मां स्वांगिया के मंदिर में परंप

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सोनार दुर्ग में होती पूजा अर्चना, पूर्व राजपरिवार सदस्यों ने लिया हिस्सा।

लोक गीतों से गूंजा सोनार दुर्ग

जैसलमेर के स्थापना दिवस पर सोनार दुर्ग में लोक कलाकारों ने लोक गीतों की प्रस्तुतियां दी। आलमखाना के संगीतकार हसन खान व उनके परिवार के सदस्यों ने आज सोनार दुर्ग में पहुंचे और जैसलमेर के लोक गीतों से इतिहास की व्याख्या की। इस दौरान आए सैलानियों को म्यूजियम फ्री में दिखाया गया।

CM भजनलाल शर्मा ने दी बधाई

इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने बधाई दी। उन्होंने लिखा – स्वर्णनगरी जैसलमेर के स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! तनोट माता जी की असीम कृपा से यह जिला सदैव विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे। समस्त नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो।

1156 ईस्वी में रखी गई थी नींव

संवत 1212 (1156 ईस्वी) में भाटी वंश के संस्थापक महारावल जैसलसिंह ने जैसलमेर की नींव रखी थी। पूर्व राजपरिवार सदस्य ठाकुर विक्रम सिंह नाचना ने बताया- पीले पत्थरों से बने इस शहर में बना सोनार किला, कलात्मक हवेलियां, मंदिर, बंगलियां और गड़ीसर सरोवर जैसलमेर को केवल एक शहर नहीं, एक जीवित धरोहर बनाते हैं। देश-दुनिया से लाखों पर्यटक यहां आते हैं और राजस्थान की अनोखी मरु संस्कृति को आत्मसात करते हैं।

गौरवशाली इतिहास को सहेजे है जैसलमेर

जहां देश के अन्य ऐतिहासिक शहर आधुनिकता के साथ अपनी विरासत को खोते जा रहे हैं, वहीं जैसलमेर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और संस्कृति को जीवंत रूप में सहेजे हुए है। 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में जैसलमेर के वीरों ने सेना के साथ मिलकर मातृभूमि की रक्षा की मिसाल पेश की। आज भी जैसलमेर की रग-रग में वही देशभक्ति, वही जुनून और वही गौरव है।

सोनार दुर्ग गूंजा लोक गीतों से।

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