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800 साल पुराने मंदिर पर अब दावा क्‍यों? भगवान हैं तो पूजा का हक… कुतुब मीनार पर दिल्‍ली कोर्ट में सुनवाई की बड़ी बातें

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800 साल पुराने मंदिर पर अब दावा क्‍यों? भगवान हैं तो पूजा का हक… कुतुब मीनार पर दिल्‍ली कोर्ट में सुनवाई की बड़ी बातें

800 साल पुराने मंदिर पर अब दावा क्‍यों? भगवान हैं तो पूजा का हक… कुतुब मीनार पर दिल्‍ली कोर्ट में सुनवाई की बड़ी बातें

कुतुब मीनार मामले पर दिल्‍ली की साकेत कोर्ट में मंगलवार को तीखी बहस हुई। हिंदू पक्ष की ओर से एडवोकेट हरिशंकर जैन ने अपील की थी। सिविल जज ने याचिका खारिज कर दी थी जिसमें कहा गया था कि कुतुब मीनार परिसर में बनी कुव्‍वत-ए-इस्‍लाम मस्जिद को मंदिर परिसर की जगह पर बनाया गया। याचिका में मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की गई थी। सिविल जज के फैसले को साकेत कोर्ट में चुनौती दी गई। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जैन ने AMASR ऐक्‍ट से लेकर पुराने फैसलों का हवाला दिया। ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ने इस मांग का विरोध किया। ASI की ओर से पेश अधिवक्ता सुभाष गुप्ता ने कहा कि पूजा का मौलिक अधिकार है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है। साकेत कोर्ट ने कहा कि वह 9 जून को फैसला सुनाएगी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान क्‍या-क्‍या दलीलें दी गईं, पढ़‍िए।

‘मस्जिद से पहले मंदिर था जो पूजा क्‍यों नहीं कर सकते?’

याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि सरकार ने कुतुब मीनार को संरक्षित स्‍मारक घोषित कर रखा है। पिछले 800 साल से इसे मुस्लिम इस्‍तेमाल नहीं कर रहे थे। जब वहां मस्जिद बनने से काफी पहले मंदिर था तो उसका जीर्णोद्धार क्‍यों हो सकता? (सिविल) जज ने कहा है कि अगर इसकी अनुमति दी गई तो संविधान के ढांचे, सेकुलर चरित्र को नुकसान पहुंचेगा। जैन ने कहा कि वह देवताओं की पुर्नप्रतिष्‍ठा और फिर से पूजा शुरू करने की अनुमति चाहते हैं।

800 साल पुराने मंदिर पर अब दावा कैसे : कोर्ट?

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जैन के दावे पर अदालत ने पूछा कि अब आप जीर्णोद्धार कहकर इस स्‍मारक को मंदिर बनाना चाहते हैं। मेरा सवाल है कि अगर यह मान लें कि 800 साल पहले मंदिर था तो भी आप यह दावा कैसे करेंगे कि वादियों का उसपर कानूनी अधिकार बनता है? जैन ने कहा कि अगर यह हिंदू मंदिर है तो इसकी इजाजत क्‍यों नहीं दी जा सकती? कानून यही कहता है कि एक बार संपत्ति देवता की हो गई तो उन्‍हीं की रहती है। इसपर अदालत ने अयोध्‍या केस में अदालत की टिप्‍पणियां पूछीं।

हिंदू पक्ष ने किस आधार पर किया है दावा?

साकेत कोर्ट के सामने जैन ने कहा कि मंदिर विध्‍वंस के बावजूद देवता का चरित्र नहीं बदलता। मैं एक श्रद्धालु हूं। वहां की तस्‍वीरें मौजूद हैं, अब भी। वहां लोहे का एक स्‍तंभ है, करीब 1,600 साल पुराना। मेरी दलील है कि देवता कभी गुम नहीं होते। यही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देवता बच गए तो पूजा का अधिकार बच जाता है। इसपर अदालत ने हल्‍के लहजे में कहा कि देवता 800 साल से बिना पूजा के बचे हुए हैं, उन्‍हें ऐसे ही बचे रहने दीजिए। फिर अदालत ने पूछा कि पूजा के अधिकार की प्रकृति क्‍या है और इससे जुड़े क्‍या-क्‍या अधिकार उपलब्‍ध हैं। अदालत ने कहा कि मूर्ति की मौजूदगी पर विवाद नहीं है। सवाल पूजा के अधिकार का है।

पूजा के अधिकार पर तगड़ी बहस

जैन ने कहा कि उनके संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है। अदालत ने पूछा कैसे तो जैन ने अनुच्‍छेद 25 का जिक्र किया। फिर अनुच्‍छेद 13(1) का जिक्र करते हुए जैन ने कहा कि मूल अधिकार कभी समाप्‍त नहीं होता। अदालत ने पूछा कि क्‍या यह (पूजा) मूल अधिकार है? जैन ने हां कहा तो कोर्ट ने पूछा कि कैसे? जैन ने कहा कि भारत में हजार साल पुराने मंदिर है, उनकी तरह यहां भी पूजा हो सकती है। न्‍यायिक प्रक्रिया से तय होगा कि मेरा कोई अधिकार नहीं है। अयोध्‍या केस की व्‍यवस्‍था के हिसाब से अगर भगवान बच गए तो पूजा का अधिकार बच जाता है यानी पूजा का मेरा अधिकार बचा हुआ है।

एक बार चरित्र तय हो गया फिर बदला नहीं जा सकता : ASI

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जैन की दलीलों के बाद बारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की थी। एडवोकेट सुभाष गुप्‍ता ने कहा कि अदालत के आदेश से छेड़छाड़ का कोई आधार नहीं है। गुप्‍ता के मुताबिक, 1958 एक्‍ट की परिधि में आने पर किसी जगह के चरित्र का निर्धारण होता है। एक बार स्‍मारक का चरित्र तय हो गया तो बदला नहीं जा सकता। जब ASI एक्‍ट के तहत कोई स्‍मारक आता है तो आपत्ति के लिए 60 दिन का वक्‍त होता है। उन आपत्तियों पर विचार होता है। इसी वजह से देश में कई स्‍मारक हैं जो पूजा स्थल नहीं हैं।

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पूर्ण नहीं पूजा का अधिकार, ASI ने कहा

अगर कोई सुरक्षा स्थान बिना किसी व्यवधान के 800 वर्षों से जारी हैं तो उसे जारी रहना चाहिए। पूजा का मौलिक अधिकार है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में बताया है।

सुभाष गुप्ता, ASI के वकील

9 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

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गुप्‍ता ने कहा कि कुतुब मीनार पूजा स्‍थल नहीं है जैसा कि जैन ने भी माना है। उन्‍होंने कहा कि स्‍मारक सालों पहले बना था… किसी बदलाव के लिए कोई याचिका नहीं आई। अभी ये सब चीजें उठाई जा रही हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि इमारत के चरित्र का सवाल मूल में है। इसके बाद अदालत ने आदेश सुनाना शुरू कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को हफ्ते भर का वक्‍त दिया और कहा कि वह 9 जून को फैसला सुनाएगी।

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