गढ़चिरौली: 40 साल बाद गोलियों की जगह जले दीये, बिनागुंडा ने मनाई पहली 'माओवाद मुक्त दिवाली'
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के बिनागुंडा इलाके में इस साल दिवाली का नजारा कुछ और ही था। करीब चार दशकों तक जहां माओवादी हिंसा के कारण गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, वहीं इस बार दीयों की रोशनी और…
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के बिनागुंडा इलाके में इस साल दिवाली का नजारा कुछ और ही था। करीब चार दशकों तक जहां माओवादी हिंसा के कारण गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, वहीं इस बार दीयों की रोशनी और पटाखों की गूंज ने माहौल बदल दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऐतिहासिक मौके पर स्थानीय लोगों ने पुलिस जवानों के साथ मिलकर पहली 'माओवाद मुक्त दिवाली' मनाई।
यह बदलाव जनवरी 2026 में बिनागुंडा में एक अग्रिम परिचालन अड्डे (AOP) की स्थापना के बाद संभव हुआ। गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक (SP) एम. रमेश ने बताया कि इसके बाद चलाए गए ऑपरेशन 'अंतिम प्रहार' ने जिले को पूरी तरह माओवाद से मुक्त करने में सफलता दिलाई है। अब पुलिस का लक्ष्य इलाके में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों के मन से डर निकालकर विश्वास का माहौल बनाना है।
जवानों के त्याग को किया याद
बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र पहुंचकर स्थानीय लोगों और जवानों के साथ त्योहार मनाने वाले एसपी एम. रमेश ने इस बदलाव का श्रेय सुरक्षाबलों को दिया। उन्होंने कहा, "पहले इस जंगल में नक्सल के डर का अंधेरा था, गोलियों की आवाज आती थी। आज 40 साल के संघर्ष के बाद यहां दिवाली के पटाखों की आवाज है। हम घर-घर जाकर दीया जलाकर लोगों के मन में प्रकाश और विश्वास जगा रहे हैं। इसका पूरा श्रेय सी-60, सीआरपीएफ, एसआरपीएफ और जिला पुलिस के जवानों के त्याग को जाता है।"
पूरे जिले में मना जश्न
यह आयोजन सिर्फ बिनागुंडा तक सीमित नहीं था। रविवार को गढ़चिरौली पुलिस ने पूरे जिले के सभी 70 पुलिस थानों, उपथानों और पुलिस सहायता केंद्रों पर स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर दिवाली मनाई। इस दौरान लोगों में मिठाइयां और पटाखे भी बांटे गए। जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विभिन्न दुर्गम इलाकों में पहुंचकर जश्न में हिस्सा लिया। अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधिरा गर्देवाड़ा में, अपर पुलिस अधीक्षक (प्रशासन) गोकुल राज पेंढरी में और अपर पुलिस अधीक्षक अहेरी हर्षवर्धन बी.जे. जिमलगट्टा में नागरिकों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे।
समाज की मुख्यधारा से जुड़े लोगों के साथ भी दिवाली
इस अवसर पर उन लोगों को भी याद किया गया, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया था। गढ़चिरौली स्थित नवजीवन वसाहत में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों के साथ दिवाली मनाई और पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया। इसके अलावा, पुलिस ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को अनाज और खाद्य सामग्री भी वितरित की। एसपी ने कहा कि सामाजिक सद्भाव और जनभागीदारी के बिना सुरक्षित और विकसित गढ़चिरौली का निर्माण संभव नहीं है।
इनपुट: IANS



