3.45 लाख ने नहीं कराई ई-केवायसी, अब तक 62 हजार मिले अपात्र, ऐसे भी ले रहे राशन जो मृत हो चुके – Sagar News h3>
सरकारी राशन दुकानों से राशन प्राप्त करने वाले सभी लोगों का ई-केवायसी के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। इसके लिए अंतिम तिथि को कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है, फिर भी अब तक 3.45 लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने ई-केवायसी नहीं कराई है। इसका मतलब है कि इन व्यक
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राशन दुकान संचालक, खाद्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी इस कार्य को पूर्ण करने में लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जिले में कुल 18,82,967 लोग राशन के लिए पंजीकृत हैं, जिन्हें हर महीने राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। सत्यापन का अभियान पिछले छह महीनों से चल रहा है, परंतु यह अब तक अधूरा है।
वर्तमान में जिले में 3,45,248 लोग ऐसे हैं जिनकी ई-केवायसी नहीं हो पाई है। इसका यह अर्थ नहीं कि ये सभी लोग फर्जी हैं। इनमें कुछ लोग शहर से बाहर रह रहे हैं या उनके आधार कार्ड में तकनीकी समस्याएं हैं, जिससे ई-केवायसी नहीं हो पा रही है। एक वजह राशन दुकान संचालकों की लापरवाही भी है, जो इस कार्य में गंभीरता नहीं बरत रहे हैं।
दुकानें बंद, कार्य अधूरा शुक्रवार को भगवानगंज और गुरुगोविंद सिंह वार्ड में अधिकांश दुकानें बंद पाई गईं। सदर में एक दुकान खुली थी। इन दुकानों पर 80-82 प्रतिशत लाभार्थियों की ही ई-केवायसी हो पाई है। जिले में कुल 1,078 राशन दुकानें हैं, और किसी एक में भी 100% ई-केवायसी का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। अधिकांश दुकानों में 75-80% लोगों की ई-केवायसी हो चुकी है।
जमीनी हकीकत: क्यों नहीं हो पा रही ई-केवायसी?NEWS4SOCIALद्वारा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों की पड़ताल में यह सामने आया कि लोग मौजूद हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से ई-केवायसी नहीं करा रहे हैं।
- कुछ के आधार कार्ड या फिंगरप्रिंट में समस्या है।
- कुछ लोग शहर से बाहर रह रहे हैं, और वहीं राशन ले रहे हैं।
- तकनीकी समस्याएं और व्यस्तता भी बड़ी वजह हैं।
व्यक्तिगत उदाहरणों से स्थिति स्पष्ट:
- वार्ड से बाहर रहने वाले: भगवानदास अहिरवार और रेखा बंसल की ई-केवायसी नहीं हुई क्योंकि वे वार्ड में नहीं रह रहे हैं।
- मृतक: रामचरन अहिरवार और पूना बाई अब जीवित नहीं हैं, फिर भी उनके नाम पर राशन वितरित हो रहा था।
- विवाह के बाद स्थान परिवर्तन: पूजा अहिरवार और दुर्गा जैसी कई महिलाएं विवाह के बाद शहर से बाहर चली गईं, जिनकी ई-केवायसी नहीं हो पाई।
- फिंगरप्रिंट का न मिलना: रजनीश और विवेक अहिरवार की उंगलियों के निशान आधार से मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे ई-केवायसी अटकी हुई है।
बच्चे और बुजुर्ग भी वजह सेमरा हाट और कुड़ारी गांव की राशन दुकानों में 90% ई-केवायसी हो चुकी है। शेष लाभार्थियों में अधिकांश बच्चे और बुजुर्ग हैं, जिनके फिंगरप्रिंट मेल नहीं खा रहे हैं। इन्हें पहले आधार अपडेट करवाना होगा, फिर ई-केवायसी संभव हो पाएगी।
62 हजार अपात्र पाए गए जिले में 62,000 लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। संबंधित पंचायतों को इनके नाम काटने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अब तक सभी नाम नहीं हटाए जा सके हैं। पंचायतों की जिम्मेदारी तय की गई है, पर कार्य अभी अधूरा है। अब तक करीब 40,000 अपात्रों को हटाया गया है।
82% कार्य पूर्ण जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल के अनुसार, मार्च में 56% ई-केवायसी पूरी हुई थी, जो अब बढ़कर 82% हो गई है। लगभग 40,000 अपात्रों को हटाया जा चुका है। अब बहुत कम लोग सत्यापन के लिए आ रहे हैं, लेकिन 100% लक्ष्य हासिल करने के प्रयास जारी हैं।
