22 घंटे तक पूर्व MLC के कॉलेज में रही ED: दिल्ली से मेरठ पहुंची टीम अपने साथ ले गई हार्ड डिस्क, लैपटॉप और जरूरी कागजात – Meerut News h3>
मेरठ के खरखौदा में बने पूर्व भाजपा MLC के मेडिकल कॉलेज एनसीआर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में छापेमारी के दौरान लगभग 22 घंटे तक ED की टीम मौजूद रही। ईडी की टीम रात करीब 2:15 बजे जांच पूरी करने के बाद वापस लौटी।
.
कॉलेज में पहुंची स्थानीय पुलिस
सभी डाटा लिया कब्जे में
कार्रवाई के दौरान टीम ने कॉलेज से छात्रों की पंजीयन संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, फैकल्टी का पूरा विवरण, वित्तीय दस्तावेज, कार्यालय से डिजिटल रिकॉर्ड तथा मैनेजिंग डायरेक्टर समेत संबंधित लोगों की कॉल डिटेल्स अपने कब्जे में ले लीं। ईडी की टीम गुरुवार सुबह 4:15 बजे कॉलेज पहुंची।
अपनी बेटी के साथ पूर्व MLC सरोजनी अग्रवाल
35 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का हिस्सा है छापेमारी
यह छापेमारी सीबीआई द्वारा 30 जून 2025 को दर्ज की गई 225 एफआईआर और 35 आरोपियों के खिलाफ शुरू की गई श्रृंखलाबद्ध कार्रवाई का हिस्सा रही। इन्हीं आरोपियों में डॉ. सरोजिनी अग्रवाल की बेटी और कॉलेज की असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. शिवानी अग्रवाल का भी नाम शामिल है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अधिकारियों पर रिश्वत लेने और गोपनीय सूचनाएं लीक करने के एक बड़े मामले की जांच से जुड़ी है।
NCR मेडिकल कॉलेज
सीबीआई की जांच में मिला सबूत
सीबीआई को जांच के दौरान डॉ. शिवानी अग्रवाल के मोबाइल से कुछ महत्वपूर्ण चैट और कॉल रिकॉर्डिंग के रूप में सबूत मिले थे। इनमें एनसीआर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटें बढ़ाने के आवेदन के बाद गीतांजलि विश्वविद्यालय (उदयपुर) के रजिस्ट्रार मयूर रावल, तथा दिल्ली स्थित एमएस टेक्नीफाई सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड के.आर. रणदीप नायर से हुई बातचीत शामिल थी। इन्हीं सबूतों के आधार पर ईडी ने यह व्यापक छापेमारी की।
स्थानीय पुलिस नहीं थी शामिल
SD की कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय तरीके से की गई। स्थानीय पुलिस को छापेमारी की सूचना नहीं दी गई,ईडी टीम पैरामिलिट्री फोर्स के साथ परिसर में दाखिल हुई। शुरुआत में कर्मचारियों में यह चर्चा तक हो गई कि शायद दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद कोई विशेष जांच दल पहुंचा है। लेकिन जब टीम प्रशासनिक कार्यालय और महानिदेशक के कक्ष में जाकर रिकॉर्ड मांगने लगी, तब स्पष्ट हुआ कि यह ईडी की कार्रवाई है। पूछताछ के दौरान जिन अधिकारियों से बातचीत की गई, उनके मोबाइल फोन बंद करा दिए गए, ताकि बाहर किसी भी तरह की जानकारी लीक न हो सके।
