2026 में ‘जीरो ट्रस्ट’ मॉडल से होगी साइबर सुरक्षा: डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने दी चेतावनी, AI का दुरुपयोग बढ़ेगा – Jaunpur News h3>
अंकित श्रीवास्तव | जौनपुर3 मिनट पहले
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जौनपुर में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा है कि वर्ष 2026 साइबर सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण साबित होगा। उन्होंने आम नागरिकों से साइबर अपराधियों से निपटने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहने की अपील की।
डॉ. राठौर ने कहा कि साइबर दुनिया में ‘जीरो ट्रस्ट मॉडल’ अपनाए बिना सुरक्षा संभव नहीं है। आभासी दुनिया में किसी भी व्यक्ति, कॉल, लिंक या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा करना बड़ी भूल है। जब तक लोग डिजिटल संदेशों पर अंधविश्वास करना नहीं छोड़ेंगे, तब तक साइबर अपराधों से पूरी तरह बचाव मुश्किल रहेगा।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को शिकार बनाने के लिए डर और भरोसे जैसी भावनाओं का दुरुपयोग करते हैं। ‘साइबर अरेस्ट’ जैसे नए तरीकों में भय का माहौल बनाकर लोगों को तुरंत जाल में फंसा लिया जाता है।
डॉक्टर ने बढ़ते AI के इस्तेमाल पर चिंता जताई
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डॉ. राठौर ने आधुनिक साइबर अपराधों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI के जरिए अपराधी आसानी से लोगों का विश्वास जीत लेते हैं और वर्ष 2026 में इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अब केवल ओटीपी मांगना पुराना तरीका हो गया है। नए पैटर्न में अपराधी मोबाइल हैक कर सीधे ओटीपी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में केवल सतर्कता ही नहीं, बल्कि तकनीकी समझ और निरंतर जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
डॉ. राठौर ने जोर देकर कहा कि साइबर अपराधों से लड़ाई केवल तकनीक या केवल जागरूकता से नहीं, बल्कि दोनों के समन्वय से ही जीती जा सकती है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से ‘पहले सत्यापन, फिर विश्वास’ की नीति अपनाने का आग्रह किया।
साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां
- सोशल मीडिया प्रोफाइल को लॉक रखें।
- ईमेल का पासवर्ड मजबूत बनाएं और समय-समय पर बदलें।
- मोबाइल पर आने वाले संदेशों को ध्यान से पढ़ें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- कोई फोन कर ओटीपी मांगे तो कभी साझा न करें।
- APK फाइल डाउनलोड न करें।
- अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल रिसीव न करें।
- सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो केवल अपनों तक सीमित रखें।
- फोन नंबर और ईमेल आईडी सोशल मीडिया अकाउंट पर सार्वजनिक न करें।
- अपनी गतिविधियां तुरंत सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।
- मोबाइल और कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर रखें।
- साइबर कैफे के कंप्यूटर से क्रेडिट/डेबिट कार्ड पेमेंट न करें।
- ट्रूकॉलर जैसे ऐप इंस्टॉल रखें, जिससे संदिग्ध कॉल की पहचान हो सके।
- दूसरे के मोबाइल में अपनी ईमेल आईडी लॉगिन न करें।
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अंकित श्रीवास्तव | जौनपुर3 मिनट पहले
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जौनपुर में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा है कि वर्ष 2026 साइबर सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण साबित होगा। उन्होंने आम नागरिकों से साइबर अपराधियों से निपटने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहने की अपील की।
डॉ. राठौर ने कहा कि साइबर दुनिया में ‘जीरो ट्रस्ट मॉडल’ अपनाए बिना सुरक्षा संभव नहीं है। आभासी दुनिया में किसी भी व्यक्ति, कॉल, लिंक या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा करना बड़ी भूल है। जब तक लोग डिजिटल संदेशों पर अंधविश्वास करना नहीं छोड़ेंगे, तब तक साइबर अपराधों से पूरी तरह बचाव मुश्किल रहेगा।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को शिकार बनाने के लिए डर और भरोसे जैसी भावनाओं का दुरुपयोग करते हैं। ‘साइबर अरेस्ट’ जैसे नए तरीकों में भय का माहौल बनाकर लोगों को तुरंत जाल में फंसा लिया जाता है।
डॉक्टर ने बढ़ते AI के इस्तेमाल पर चिंता जताई
डॉ. राठौर ने आधुनिक साइबर अपराधों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI के जरिए अपराधी आसानी से लोगों का विश्वास जीत लेते हैं और वर्ष 2026 में इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अब केवल ओटीपी मांगना पुराना तरीका हो गया है। नए पैटर्न में अपराधी मोबाइल हैक कर सीधे ओटीपी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में केवल सतर्कता ही नहीं, बल्कि तकनीकी समझ और निरंतर जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
डॉ. राठौर ने जोर देकर कहा कि साइबर अपराधों से लड़ाई केवल तकनीक या केवल जागरूकता से नहीं, बल्कि दोनों के समन्वय से ही जीती जा सकती है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से ‘पहले सत्यापन, फिर विश्वास’ की नीति अपनाने का आग्रह किया।
साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां
- सोशल मीडिया प्रोफाइल को लॉक रखें।
- ईमेल का पासवर्ड मजबूत बनाएं और समय-समय पर बदलें।
- मोबाइल पर आने वाले संदेशों को ध्यान से पढ़ें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- कोई फोन कर ओटीपी मांगे तो कभी साझा न करें।
- APK फाइल डाउनलोड न करें।
- अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल रिसीव न करें।
- सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो केवल अपनों तक सीमित रखें।
- फोन नंबर और ईमेल आईडी सोशल मीडिया अकाउंट पर सार्वजनिक न करें।
- अपनी गतिविधियां तुरंत सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।
- मोबाइल और कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर रखें।
- साइबर कैफे के कंप्यूटर से क्रेडिट/डेबिट कार्ड पेमेंट न करें।
- ट्रूकॉलर जैसे ऐप इंस्टॉल रखें, जिससे संदिग्ध कॉल की पहचान हो सके।
- दूसरे के मोबाइल में अपनी ईमेल आईडी लॉगिन न करें।
