122 किलो वजनी महिला का जोधपुर एम्स में सफल ऑपरेशन: हार्ट की अंदरूनी परत फटी गई थी, सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक से बचाई जान – Jodhpur News

3
122 किलो वजनी महिला का जोधपुर एम्स में सफल ऑपरेशन:  हार्ट की अंदरूनी परत फटी गई थी, सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक से बचाई जान – Jodhpur News

122 किलो वजनी महिला का जोधपुर एम्स में सफल ऑपरेशन: हार्ट की अंदरूनी परत फटी गई थी, सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक से बचाई जान – Jodhpur News


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने एक बहुत ही कठिन और इमरजेंसी सर्जरी को सफलतापूर्व पूरा कर 57 साल की महिला की जान बचाई है। मरीज तीव्र एओर्टिक डिसेक्शन जैसी गंभीर स्थिति से पीड़ित थी। उसका वजन 122 किलोग्राम था और वह मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप व ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी। डॉक्टरों के अनुसार मरीज की महाधमनी (एओर्टा) की अंदरूनी परत फट गई थी, जिससे शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित हो रहा था। मरीज ने पहले श्रीगंगानगर और बीकानेर में इलाज करवाया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे एम्स जोधपुर रेफर किया गया। एम्स में रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. पवन गर्ग द्वारा सीटी स्कैन किए जाने पर एओर्टिक डिसेक्शन की पुष्टि हुई। इसके बाद तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया। सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक का किया उपयोग अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र पटेल के निर्देशन में ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान एसेन्डिंग एओर्टा और हेमिआर्च रिप्लेसमेंट डैक्रॉन ग्राफ्ट की सहायता से किया गया। इस प्रक्रिया में सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक का उपयोग किया गया। एक्टपर्ट ने बताया कि इस सर्जरी के दौरान सर्जन हृदय रोग वाले महाधमनी के हिस्से को काट कर बाहर निकाल देते हैं और उसकी जगह डैक्रॉन ग्राफ्ट को टांके लगाकर (stitching) जोड़ देते हैं। आमतौर पर, इस प्रक्रिया में हृदय को अस्थायी रूप से रोककर हृदय-फेफड़े की मशीन (Cardiopulmonary bypass) का उपयोग किया जाता है इस मामले में भी एओर्टिक वाल्व को बदलने की बजाय सफलतापूर्वक संरक्षित व रिपेयर किया गया। मरीज के अत्यधिक वजन, छोटी गर्दन और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं के कारण ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण था। सामान्य ऑपरेशन टेबल पर मरीज फिट नहीं हो रही थी, जिसके चलते विशेष साइड-आर्म सपोर्ट की व्यवस्था करनी पड़ी। ऑपरेशन के अगले दिन मरीज को एक्सट्यूबेट किया गया, लेकिन लगभग दो सप्ताह तक उसे नॉन-इनवेसिव रेस्पिरेटरी सपोर्ट व BiPAP की आवश्यकता रही। डायफ्राम ऊपर उठने के कारण श्वसन समस्याएं रहीं, इसलिए मरीज लगभग 20 दिन ICU व हॉस्पिटल में भर्ती रही। विशेषज्ञ टीम की सतर्क देखभाल के चलते मरीज अंततः बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुई। एओर्टिक डिसेक्शन — क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार एओर्टिक डिसेक्शन वह हालत है जिसमें एओर्टा की अंदरूनी परत फट जाती है और रक्त परतों के बीच प्रवेश कर गंभीर आंतरिक समस्या उत्पन्न कर देता है। इसमें छाती या पीठ दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी, उच्च रक्तचाप और अंगों में रक्त आपूर्ति में बाधा जैसे लक्षण होते हैं। समय पर निदान व आपात सर्जरी जीवन बचा सकती है। डॉक्टर्स ने कहा कि मोटापा उच्च रक्तचाप, मधुमेह व हृदय संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ाता है। बरतें ये सावधानियां टीम में ये लोग रहे शामिल इस सफल सर्जरी में डॉ. आलोक कुमार शर्मा, डॉ. अनुरुद्ध माथुर, रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. बजरंग, डॉ. विक्रम, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. राकेश कुमार, डॉ. मनोज कमल, डॉ. गुरुसरण, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल कौशिक और परफ्यूजनिस्ट कमलेश की अहम भूमिका रही। विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि विभाग अब तक 10 जटिल एओर्टिक सर्जरी और हेमिआर्च रिपेयर सफलतापूर्वक कर चुका है। वहीं कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने पूरी टीम को बधाई दी।

राजस्थान की और समाचार देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Rajasthan News