100 महिलाओं ने 27 तरह की वन भाजियां बनाईं: बड़वानी के लिम्बी में वन भाजी उत्सव में 350 से अधिक महिला-पुरुष शामिल हुए – Barwani News h3>
बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड के लिम्बी गांव में रविवार को ‘वनभाजी उत्सव’ का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 350 महिला-पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 27 तरह की दुर्लभ वन भाजियां थीं, जिन्हें 100 आदिवासी महिलाओं ने जंगलों से लाकर तैयार किया था।
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कार्यक्रम के आयोजक महाराष्ट्र के वैज्ञानिक और एनएमआई एमएस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सौरभ मारू थे, जो इसी विषय पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘वनभाजी उत्सव’ का मकसद आदिवासी समुदाय की उस परंपरागत ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जो शहरों में पलायन के कारण लुप्त हो रहा है।
प्रो. मारू ने बताया कि ये वन भाजियां पूरी तरह से ऑर्गेनिक और केमिकल रहित होती हैं। इनमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये भाजियां आदिवासियों को स्वस्थ रखने और बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकती हैं, जिससे वे अनावश्यक स्वास्थ्य खर्च से बच सकते हैं।
उनके अनुसार, ऐसे आयोजन आदिवासी क्षेत्रों में पोषण, स्वास्थ्य और आजीविका की समस्याओं का समाधान करने में मदद कर सकते हैं।
कई शोधार्थी भी शामिल हुए
उत्सव में कई शोधार्थी भी शामिल हुए, जो इन भाजियों के बारे में जानने के लिए आए थे। उन्होंने महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान की सराहना की। इसके अलावा एक क्षेत्रीय आदिवासी डॉक्टरों की टीम ने भी अपनी सेवाएं दीं। टीम ने निःशुल्क सिकल सेल की जांच की और दवाए भी वितरित कीं। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. महिमा डावर ने महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया।
आयोजकों ने इस ज्ञान को सहेजने के लिए एक छोटी-सी पुस्तक बनाकर गांव में वितरित करने की योजना बनाई है, ताकि आने वाली पीढ़ी भी इस पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठा सके। कार्यक्रम में गांव के सरपंच, पटेल, पुजारा और कई वरिष्ठ ग्रामीण मौजूद थे।
इन भाजियों को बनाया गया
झरकली, फांग की भाजी, भेंडन भाजी, गोइंदी, राजगिरे की भाजी, पोआडे की भाजी, कटले की भाजी, अंबाडी की भाजी, मोखा भाजी, खाटफूलिया की भाजी, आंबलि की भाजी, पांजने की भाजी, केनिया की भाजी, चीलीए की भाजी, कुंजरे की भाजी, सेगुआ की भाजी,सेमुआ की भाजी।
