1 मर्डर में 2 FIR, 2 चार्जशीट: SHO ने कोर्ट को दी गलत जानकारी, एएसपी ने शिकायतकर्ता को किया अरेस्ट, नहीं माने ADGP के आदेश – Rajasthan News

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1 मर्डर में 2 FIR, 2 चार्जशीट:  SHO ने कोर्ट को दी गलत जानकारी, एएसपी ने शिकायतकर्ता को किया अरेस्ट, नहीं माने ADGP के आदेश – Rajasthan News

1 मर्डर में 2 FIR, 2 चार्जशीट: SHO ने कोर्ट को दी गलत जानकारी, एएसपी ने शिकायतकर्ता को किया अरेस्ट, नहीं माने ADGP के आदेश – Rajasthan News

नागौर में एक युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने 6 महीने में 2 FIR दर्ज कर ली। पहली FIR में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर जेल भेज दिया।

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दूसरी FIR में परिवादी (शिकायतकर्ता) को ही आरोपी मानकर उसे भी जेल भेज दिया। इतना ही नहीं, कोर्ट में भी एक ही हत्या के मामले में 2 अलग-अलग ट्रायल चल रहे हैं।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

नागौर के खींवसर के खडखाली गांव में चचेरे भाइयों उम्मेदाराम पुत्र हरिराम और चुनाराम पुत्र ताजुराम की शादी उसी गांव के मोहनराम की बेटी सरोज और शोभा से हुई थी।

चचेरे भाई होने के अलावा उम्मेदाराम और चुनाराम आपस में साढ़ू भी थे। दोनों भाइयों के दो साले दुर्गाराम और किशनाराम थे। उम्मेदाराम दोनों सालों के साथ पार्टनरशिप में काम करता था। वहीं चुनाराम की दोनों सालों से बनती नहीं थी।

11 मार्च 2024 को ताजुराम ने पांचौड़ी थाने में रिपोर्ट दी कि 10 मार्च की रात 10 बजे उम्मेदाराम की पत्नी सरोज बेटे अर्जुन के साथ पीहर में ही थी। उसने वहीं से अपनी बहन यानी चुनाराम की पत्नी शोभा को फोन लगाया।

इसी दौरान वहां सरोज और शोभा का भाई दुर्गाराम भी आ गया। सरोज से फोन लेकर शोभा से बात की और उसके पति चुनाराम को लेकर ताने कसे। चुनाराम उस वक्त वहीं था। उसने शोभा से फोन लिया।

इसके बाद चुनाराम और दुर्गाराम के बीच फोन पर काफी बहस हुई। दुर्गाराम ने शोभा को ससुराल में खुश नहीं रखने को लेकर चुनाराम को खरी-खोटी सुनाई। दोनों ने एक-दूसरे को धमकियां दी।

दुर्गाराम ने फोन काटा और छोटे भाई किशनाराम को साथ लेकर ट्रेलर में बैठ चुनाराम के घर की तरफ रवाना हो गए। ये देखकर सरोज ने पति उम्मेदाराम को फोन किया। मौके पर जाकर समझाइश के लिए कहा। उम्मेदाराम भी चुनाराम के घर की तरफ चला गया।

इधर, दुर्गाराम और किशनाराम ट्रेलर लेकर पहुंच गए और टक्कर मारकर चुनाराम के घर का गेट और पटि्टयां तोड़ दी। उन्हें समझाने के लिए उम्मेदाराम, चुनाराम के पिता ताजुराम और मां चुकी देवी वहां पहुंचे। दोनों भाइयों ने उन पर व्हील पाने और लोहे की रॉड से हमला कर दिया और ट्रेलर चढ़ा दिया। चुकी देवी, ताजुराम तो बच गए, लेकिन टायर ऊपर से निकलने के कारण उम्मेदाराम की मौत हो गई।

वारदात में इस्तेमाल किया गया ट्रेलर।

दुर्गाराम-किशनराम को किया गिरफ्तार

मौके पर हाहाकार मचने के बाद आस-पड़ोस के लोग वहां पहुंचे। उन्होंने वहां से पैदल भाग रहे दुर्गाराम और किशनाराम को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया।

मामले में पुलिस ने मुकदमा संख्या 25/2024 दर्ज कर दुर्गाराम और किशनाराम को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। तत्कालीन पांचौड़ी SHO खेताराम को मामले की जांच सौंपी गई।

लंबी इन्वेस्टिगेशन के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के बयान और 27 लोगों की गवाही के साथ सभी फिजिकल व टेक्निकल एविडेंस के साथ एक जून 2024 को चार्जशीट पेश कर दी गई। गवाहों में उम्मेदाराम की पत्नी सरोज और उम्मेदाराम के भाई जगदीश की गवाही भी शामिल थी।

मृतक की पत्नी ने शिकायतकर्ता पर लगाया आरोप

इसके बाद अगस्त 2024 में मृतक उम्मेदाराम की पत्नी और हत्या के आरोपी दुर्गाराम व किशनाराम की बहन सरोज ने नागौर कोर्ट में इस्तगासा पेश कर बताया कि उसके चाचा ससुर ताजुराम और उनके दोनों बेटे चुनाराम व मोहनराम उसके पति उम्मेदाराम से द्वेष रखते थे। दोनों परिवारों के बीच में जमीन विवाद भी था।

इसी के चलते 10 मार्च की रात को जब उसने पति उम्मेदाराम को अपने भाइयों व चुनाराम के बीच लड़ाई को शांत करने भेजा तो चुनाराम व उसके भाई मोहनराम ने पिता ताजुराम के साथ मिलकर उसके पति उम्मेदाराम की हत्या कर दी।

हत्या का आरोप उसके भाइयों दुर्गाराम और किशनाराम पर लगा दिया। बाद में इन्हीं आरोपियों ने उसे व उसके बेटे अर्जुन को जान से मारने की धमकी देकर भाइयों के खिलाफ पुलिस में मुझसे झूठी गवाही भी दिलवा दी।

कोर्ट ने पांचौड़ी एसएचओ से मांगी जानकारी

उम्मेदाराम की हत्या के मामले में ये नए फैक्ट थे। ऐसे में कोर्ट ने इस मामले में नया मुकदमा दर्ज करने के आदेश देने से पहले पांचौड़ी एसएचओ को लेटर भेज पूछा कि क्या उम्मेदाराम की हत्या के सबंध में पहले से कोई मामला दर्ज है?

मामले में जांच कर चार्जशीट पेश कर चुके तत्कालीन पांचौड़ी एसएचओ खेताराम ने कोर्ट को बताया कि सरोज पत्नी उम्म्मेदाराम द्वारा इस संबंध में पहले से कोई मामला दर्ज नहीं है।

ऐसे में नागौर कोर्ट इस मामले में FIR दर्ज कर इन्वेस्टिगेशन के ऑर्डर कर देती है। 12 सितंबर को उम्मेदाराम की हत्या को लेकर ताजुराम और उसके दो बेटों चुनाराम व मोहनराम के खिलाफ भी पांचौड़ी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया।

तत्कालीन पांचौड़ी एसएचओ खेताराम ने कोर्ट को बताया कि सरोज पत्नी उम्म्मेदाराम द्वारा इस संबंध में पहले से कोई मामला दर्ज नहीं है।

तीन मामले मर्ज, लगा दी एफआर

12 सितंबर 2024 को ही मृतक उम्मेदाराम के सगे भाई जगदीश ने कोर्ट में इस्तगासा दायर कर बताया कि उम्मेदाराम का समझाइश के लिए चुनाराम के घर पहुंचना उसके पिता ताजुराम, उसके बेटों मोहनराम व चुनाराम व मां चुकी को नागवार गुजरा। तीनों ने मिलकर उस पर लाठी-सरियों और डंडों से हमला कर दिया।

सिर में चोट लगने से उम्मेदाराम नीचे गिर गया। इसी दौरान वहां पहुंचे दुर्गाराम और किशनाराम ने उम्मेदाराम को ट्रेलर से कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में इन सभी ने साजिश रचते हुए खुद को पीड़ित बताते हुए मर्डर की फर्जी कहानी बना दी।

जगदीश ने दावा किया कि चचेरे भाई होने के बावजूद उम्मेदाराम की मौत के बाद ताजुराम के अलावा कोई भी सदस्य उसके अंतिम संस्कार या शोक बैठकों में शामिल नहीं हुआ। जगदीश ने एक सीसीटीवी वीडियो का जिक्र कर दावा किया कि उसके भाई उम्मेदाराम की हत्या में ताजुराम, चुनाराम, मोहनराम व चुकी देवी भी शामिल हैं।

इसके बाद चुनाराम की पत्नी शोभा ने भी अपने पति व ससुराल वालों के खिलाफ इस्तगासा पेश कर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। इस पर कोर्ट ने उम्मेदाराम के भाई जगदीश और शोभा की ओर से पेश की गई शिकायत को सरोज की 12 सितंबर 2024 को दर्ज हुई FIR में मर्ज कर तीनों मामलों की एक साथ जांच करने के निर्देश पुलिस को दिए।

तीनों मामलों को मर्ज कर तत्कालीन पांचौड़ी एसएचओ हरजीराम ने जांच कर इन सभी मामलों को झूठा मानते हुए मामले में एफआर लगा दी।

उम्मेदाराम और दुर्गाराम की फोटो उस वक्त की है, जब ट्रेलर खरीदा गया था।

एसपी ने दोबारा जांच के निर्देश दिए

इतना सब कुछ होने के बाद 10 जनवरी 2025 को तत्कालीन नागौर एसपी नारायण टोगस ने नागौर क्विक इन्वेस्टिगेशन डिस्पोजल टीम के एडिशनल एसपी प्रवेंद्र सिंह महला को मामले में दोबारा जांच के निर्देश दिए। एडिशनल एसपी प्रवेंद्र सिंह महला मामले में जांच कर 6 अप्रैल 2025 को उम्मेदाराम की हत्या के मामले में उसके सगे साढ़ू और चचेरे भाई चुनाराम को गिरफ्तार कर लिया।

इधर चुनाराम की गिरफ्तारी के बाद उसके परिजन पुलिस मुख्यालय में न्याय की गुहार लेकर पहुंचे और वहां परिवाद पेश किए। तत्कालीन राजस्थान ADGP क्राइम दिनेश एमएन ने मामले में विभागीय जांच करवाते हुए नागौर एसपी को 26 जून 2025 को आदेश देते हुए बताया कि मृतक की पत्नी सरोज द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में तत्कालीन एसएचओ हरजीराम की जांच कर मामले को झूठा मानते हुए पेश की गई एफआर रिपोर्ट सही है। इस एफआर रिपोर्ट को कोर्ट में पेश कर 2 जुलाई 2025 तक इसकी पालना रिपोर्ट उन्हें भेजें।

राजस्थान ADGP क्राइम का 26 जून 2025 का आदेश।

नहीं माने तत्कालीन ADGP क्राइम दिनेश एमएन के आदेश

इधर, कोर्ट में ये चार्जशीट पेश होने से 5 दिन पहले तत्कालीन राजस्थान ADGP क्राइम दिनेश एमएन ने नागौर एसपी नारायण टोगस को एक नया आदेश भेजकर बताया कि मामले में सामने आया कि जब पहले से 1 FIR दर्ज थी तो बाद में 1 नई एफआईआर दर्ज नहीं करनी चाहिए थी।

अगर कोई नए फैक्ट्स सामने आए थे तो कोर्ट की अनुमति से इन्वेस्टिगेशन कर उसी FIR में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की जानी थी। इसके अलावा इसी आदेश में ये भी निर्देश दिए गए कि पूर्व में भेजे आदेशानुसार इस नए मामले में एफआर पेश कर 169 सीआरपीसी के तहत कार्यवाही कर चुनाराम की रिहाई करवाना सुनिश्चित किया जाए। वहीं इसकी पालना रिपोर्ट 4 जुलाई 2025 तक उन्हें पेश करें।

एडिशनल एसपी प्रवेंद्र सिंह महला ने आदेशों की अवहेलना करते हुए 7 जुलाई 2025 को कोर्ट में एफआर देने की जगह चुनाराम के खिलाफ एक नई चार्जशीट पेश कर दी।

राजस्थान ADGP क्राइम का 2 जुलाई 2025 का आदेश।

नई चार्जशीट में बताई ये कहानी…

इस चार्जशीट में बताया कि जब उम्मेदाराम समझाइश के लिए मौके पर आया तो वहां पहले से ताजुराम, उसकी पत्नी चुकी देवी, उसके बेटे चुनाराम, मोहनराम व चुनाराम की पत्नी शोभा दुर्गाराम और किशनाराम से लड़ने के लिए लाठी-डंडे हाथ में लेकर तैयार खड़े थे।

उम्मेदाराम को वहां देख ताजुराम ने उसे पूछा कि तू यहां क्यों आया है? इस पर उम्मेदाराम ने उन्हें बताया कि वह तो दुर्गाराम और किशनाराम को यहां लड़ने से रोकने के लिए आया हूं। तब ताजुराम व उसके बेटे उम्मेदाराम से कहते हैं कि दुर्गाराम और किशनाराम यहां ट्रेलर लेकर क्यों आए हैं? इस पर उम्मेदाराम उन्हें कहता है कि ये तो चुनाराम से पूछो।

इतने में चुनाराम ने उम्मेदाराम के सिर पर लाठी की मारी, जिससे वह नीचे गिर गया। इतने में दुर्गाराम जो अपने ट्रेलर में था, उसने आवेश में आकर ताजुराम व चुकी देवी पर चढ़ाने के लिए अपने ट्रक को आगे चला दिया। वहां पर पहले से नीचे पड़े उम्मेदाराम पर ट्रेलर चढ़ गया।

इधर, किशनाराम ने चुकी देवी और ताजुराम के साथ मारपीट कर दी। चार्जशीट में एक सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया, जिसमें साफ-साफ तो कुछ दिख तो नहीं रहा, पर कुछ आवाजें आ रही हैं।

दूसरी FIR में एएसपी द्वारा पेश की गई चार्जशीट का पहला पन्ना, जिसमें उन्होंने माना कि तीनों मामलों को तत्कालीन एसएचओ ने जांच में झूठा मान चार्जशीट तैयार की थी।

कोर्ट ने पुलिस इन्वेस्टिगेशन को संदिग्ध माना

इसके बाद चुनाराम के परिजन उसकी जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। यहां जज संदीप शाह ने 30 अक्टूबर 2025 को चुनाराम को जमानत देते हुए इस केस की पुलिस इन्वेस्टिगेशन को संदिग्ध बताते हुए ऑर्डर में लिखा कि चुनाराम पहली FIR का शिकायतकर्ता था, जिसमें पुलिस ने अपनी जांच के बाद दुर्गाराम और किशनाराम को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

बाद में जांच के दौरान मृतक उम्मेदाराम पर दुर्गाराम द्वारा ट्रेलर चढ़ाने का फैक्ट फिर से सामने आया। CCTV ट्रांसक्रिप्ट में चुनाराम द्वारा ट्रेलर चलाने का कोई उल्लेख नहीं है। वहीं मृतक उम्मेदाराम की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी उसके सिर पर कोई चोट नहीं है। ऐसे में इन्हीं तथ्यों को आधार मानते हुए चुनाराम को जमानत दे दी गई।

मामले में किसका क्या कहना है

  • तत्कालीन राजस्थान ADGP क्राइम दिनेश एमएन ने बताया कि राजस्थान क्राइम एडीजी रहते कई परिवाद आए थे। फिलहाल मैं एटीएस में हूं तो स्पेशल केस को लेकर ज्यादा कुछ याद नहीं है। आप वहीं क्राइम में ही बात कीजिए, वो आप को बता देंगे।
  • पांचौड़ी थाने के तत्कालीन एसएचओ हरजीराम ने बताया- मेरा रिटायरमेंट हो गया हैं और मैं अभी किसी रात्रि जागरण में बिजी हूं।
  • पांचौड़ी थाने में एसएचओ रहे खेताराम ने बताया- मेरा वहां से ट्रांसफर हो गया है। पुलिस लाइन में हूं। इस मामले में अब कुछ भी याद नहीं है।
  • NEWS4SOCIALने मामले में तत्कालीन नागौर एसपी नारायण टोगस से बात कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही रिपोर्टर ने बताया कि वो दैनिक NEWS4SOCIALसे है, टोगस ने फोन काट दिया।

रिटायर्ड DGP बोले- लापरवाह पुलिसवालों को चार्जशीट देनी चाहिए

  • NEWS4SOCIALने पूरे मामले में राजस्थान के रिटायर्ड DGP रवि प्रकाश मेहरड़ा से बात की। उन्होंने कहा कि हत्या के 1 ही मामले में 2 FIR दर्ज करना विधि सम्मत नहीं है। इस केस में अगर पुलिस के सामने नए फैक्ट्स आए भी थे तो उन्हें सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पेश किया जा सकता था। ऐसे में इस पूरे मामले में जिन भी अधिकारियों ने कोर्ट में झूठी रिपोर्ट भेजी, इन्वेस्टिगेशन में लापरवाही की और पुलिस मुख्यालय के उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की, उन सभी अधिकारियों को चार्जशीट दी जानी चाहिए।
  • वहीं राजस्थान पुलिस अकादमी में इन्वेस्टिगेशन और चार्जशीट एक्सपर्ट एक रिटायर्ड RPS ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस मर्डर केस में पुलिस ने अब तक पूरी तरह से दूषित इन्वेस्टिगेशन किया है। राजस्थान ADGP क्राइम दिनेश एमएन के आदेश एकदम सही थे, जिन्हें भी नहीं माना गया।

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