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‘हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरीं, पता नहीं बचूंगी या नहीं’: तेहरान में हर तरफ बारूद, मिडिल ईस्ट में फंसे 90 लाख भारतीयों को बचाना चुनौती

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‘हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरीं, पता नहीं बचूंगी या नहीं’:  तेहरान में हर तरफ बारूद, मिडिल ईस्ट में फंसे 90 लाख भारतीयों को बचाना चुनौती

‘हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरीं, पता नहीं बचूंगी या नहीं’: तेहरान में हर तरफ बारूद, मिडिल ईस्ट में फंसे 90 लाख भारतीयों को बचाना चुनौती


कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले बिलाल अहमद भट्ट की बेटी ईरान की राजधानी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। 9 मार्च की रात 3 बजे बिलाल के पास उसका फोन आया। वो रो रही थी। बिलखते हुए बोली- ‘अब्बू, मेरे हॉस्टल के पास मिसाइलें गिरने की आवाज आ रही हैं, बमबारी हो रही है। पता नहीं आज रात बचूंगी या नहीं। मुझे बचा लो।’ बिलाल कहते हैं, ‘ऐसे फोन कॉल ईरान में रहने वाले भारतीयों की नियति बन गए हैं। हर सुबह इस सुकून से होती है कि रात गुजर गई, लेकिन हर पल फिक्र रहती है कि आगे क्या होगा।’ ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का आज 12वां दिन है। ईरान में करीब 1300 मौतें हो चुकी हैं। युद्ध थमने के आसार नजर नहीं आ रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से कहा है कि वो बिना शर्त सरेंडर करे। वहीं, ईरान लगातार इजराइल और मिडिल ईस्ट के देशों में बने अमेरिकी बेस पर हमले कर रहा है। 12 हजार भारतीयों ने देश लौटने की अर्जी लगाई
इस युद्ध में भारत ने आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, लेकिन उसके दो हित दांव पर लगे हैं। पहला, मिडिल ईस्ट के देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और उन्हें बाहर निकालना। दूसरा, खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सप्लाई पर संकट। इन देशों में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से करीब 12 हजार ने भारत सरकार के पास देश लौटने की अर्जी लगाई है। वापसी के लिए सबसे ज्यादा एप्लीकेशन संयुक्त राज्य अमीरात यानी UAE से आए हैं। ईरान में फंसे करीब दो हजार कश्मीरी स्टूडेंट
लौटते हैं कश्मीर के रहने वाले बिलाल अहमद के पास। बिलाल अपनी बेटी का नाम और पहचान उजागर नहीं करना चाहते। उन्हें डर है कि मीडिया पर दिखने की वजह से बेटी को निशाना बनाया जा सकता है। बिलाल बताते हैं, ‘बेटी नाजिया (बदला हुआ नाम) का 25 फरवरी को एग्जाम था। हम एग्जाम खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। 3 मार्च को उसकी वापसी की टिकट थी। उससे पहले ही जंग शुरू हो गई।’ ‘नाजिया तेहरान में फंसी है। पिछले 10 दिन से कभी-कभार ही बात होती है। नाजिया जिस बिल्डिंग में रहती है, वहां भी मिसाइल अटैक हुए थे। उसके बाद से हम बहुत डर गए हैं। सरकार को सभी भारतीय स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट करके वापस लाना चाहिए। हमारे पास आखिरी जानकारी यही है कि भारतीय दूतावास ने नाजिया और उसकी भारतीय दोस्तों को हॉस्टल से निकाल लिया है। उन्हें किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया है।’ ‘ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं’
24 साल की महक हसन ईरान की उरमिया यूनिवर्सिटी एंड मेडिकल साइंस में चौथे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। जम्मू-कश्मीर के बडगाम की रहने वाली हैं। महक कहती हैं कि ईरान में अब रहने लायक हालात नहीं हैं। हर पल खौफ में गुजर रहा है। हमसे ज्यादा फैमिली हमारी जान की फिक्र कर रही है। महक बताती हैं, ‘एंबेसी ने कहा है कि जैसे निकल सकते हो, निकल जाओ। अब ये तो हमारे हाथ में नहीं है। हमें नहीं पता कि कैसे निकलें।’ ‘हर दिन के साथ उम्मीद जवाब दे रही’
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के रहने वाले राजा आसिफ की बेटी तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। युद्ध के बीच बीतते हर दिन के साथ उनकी उम्मीद जवाब दे रही है। ईरान के हालात के बारे में बात करते हुए सांसें फूलने लगती हैं। राजा आसिफ कहते हैं, ‘हमारे बच्चे पढ़ने के लिए गए थे। अब मौत के मुंह में हैं। बेटी से बात होती है, तो वो कहती है कि चारों तरफ बारूद ही बारूद है। हम विदेश मंत्री से गुजारिश करते हैं कि स्टूडेंट्स को पहले बचाकर लाया जाए।’ ‘भारतीय छात्र डरे हुए, तुरंत निकाला जाए’
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स यूनियन के नेशनल कन्वीनर नासिर खुलनेमानी बताते हैं कि उरमिया शहर में अभी हवाई हमले हुए हैं। इसके बाद से दहशत का माहौल है। हमने उरमिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों से बात की थी। उन्होंने बताया कि मिसाइल हमला उनके हॉस्टल से सिर्फ 300 मीटर दूर हुआ था। धमाके से पूरी बिल्डिंग हिल गई। नासिर कहते हैं कि हालात बहुत नाजुक हैं। छात्रों का कहना है कि आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई दे रही है। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग हमलों के डर से शहर छोड़कर जा रहे हैं। पूरे शहर में खौफ है। हमने विदेश मंत्रालय से कहा है कि ईरान की सरकार से मदद करने के लिए कहे। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने खाड़ी देशों में अपने दूतावासों से डेटा इकट्ठा करने के लिए कहा था कि कितने भारतीय ईरान छोड़कर भारत आना चाहते हैं। करीब 12 हजार लोगों ने अर्जी दी है। सरकार उन्हें निकालने के अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय ने अलग से डेस्क बनाई है। ये डेस्क इन लोगों को निकालने के लिए प्लान तैयार करेगी। ‘ईरान और लेबनान से भारतीयों को निकालना सबसे मुश्किल’
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहसिन रजा खान कहते हैं कि भारत के लिए ईरान में फंसे नागरिकों को निकालना सबसे मुश्किल काम होगा। ईरान में न एयरपोर्ट काम कर रहे हैं, न एयरस्पेस खुला है। ईरान से निकलने के लिए पहले जमीनी रास्ते से अजरबैजान जाना होगा। इसके अलावा इराक वाला रास्ता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान का रास्ता सुरक्षित नहीं होगा। ईरानी नागरिक भी अजरबैजान के रास्ते देश छोड़ रहे हैं। मोहसिन रजा खान आगे कहते हैं कि भारत की छवि बनी है कि वो इजराइल और अमेरिका के साथ है। ईरान पर हमले से दो दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री इजराइल में थे। हालांकि, इससे भारतीयों के रेक्क्यू पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ये मानवीय आधार पर किया जाएगा। कोई देश इसमें रुकावट पैदा नहीं करेगा। ‘ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा युद्ध, सीजफायर हो सकता है’
हालांकि, मोहसिन रजा खान कहते हैं, ‘ये युद्ध अब ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जंग से बाहर निकलने के रास्ते देख रहे हैं। अमेरिका दो वजहों से जंग में है। पहला, ईरान कोई एग्जिट ऑप्शन नहीं दे रहा। दूसरा- न्यूक्लियर मटीरियल अब तक हासिल नहीं हो सका है।’ ‘अमेरिका अब ईरान में सत्ता बदलने की बात भी उतनी मजबूती के साथ नहीं उठा रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई भी कट्टरपंथी माने जाते हैं।’ ‘भारत को ईरान युद्ध रोकने के लिए एक्टिव भूमिका निभानी होगी’
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर राजन राज कहते हैं कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच फंसे भारतीयों की जान बचाना सबसे बड़ी समस्या है। वहां करीब 90 लाख भारतीय हैं। ये किसी देश की आबादी के बराबर है। इतने लोगों को निकालना नामुमकिन है। खाड़ी देशों जैसे कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में ईरान के हमले तेज हो रहे हैं। ‘1990 में खाड़ी युद्ध के वक्त भी भारत के लिए अपने नागरिकों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था।’ राजन राज आगे कहते हैं, ‘फिलहाल युद्ध रुकने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ईरान में रहने वाले लोगों को तुरंत निकालना जरूरी होता जा रहा है। ईरान के अलावा UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब की सरकारें भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं। हालांकि, एयरस्पेस बंद है। होर्मूज की खाड़ी पर ईरान का कंट्रोल है। कोई भी जहाज खाड़ी से नहीं गुजरने दिया जा रहा।’ ‘अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत को दोनों पक्षों पर कुछ वक्त के लिए युद्ध रोकने का दबाव बनाना होगा। यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच भारत ने दोनों सरकार से स्पेशल परमिशन ली थी। हालांकि, यूक्रेन और रूस में भारतीयों की संख्या बहुत कम थी।’ राजन कहते हैं कि भारत को खाड़ी देशों को एकजुट कर युद्ध रोकने की मांग करनी चाहिए। भारत ईरान युद्ध में रूस-यूक्रेन युद्ध की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। उसे एक्टिव भूमिका निभानी होगी। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए तेल के दाम बढ़ेंगे, रुपया कमजोर होगा। भारत को सीजफायर करवाने के लिए पहल करनी चाहिए। अगर खाड़ी में काम करने वाले लोग स्थायी तौर पर वापस आते हैं, तो उनके रोजगार की बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है। अब ईरान का हाल
दिल्ली जैसी भीड़ वाले तेहरान में सन्नाटा
तेहरान शहर की आबादी लगभग 96 लाख है। पूरे मेट्रो रीजन को मिला दें तो आबादी करीब 1.6 करोड़ हो जाती है। ये दिल्ली की कुल आबादी 2.2 करोड़ से 60 लाख ही कम है। तेहरान में रहने वाले कियान कहते हैं कि सब बहुत डरे हुए हैं। बाहर जाने में भी डर लगता है और घर के अंदर भी। खाने-पीने की चीजें 30 से 35% तक महंगी हो गई हैं। कियान के मुताबिक, अब हमले से पहले सायरन नहीं बजता। खुद ही अंदाजा लगाना पड़ता है कि हमला हुआ है। ईरान पर इजराइल के पिछले हमले में मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आवाज आती थी, इस बार सीधे धमाका होता है और सब तबाह हो जाता है। तेहरान में ही रहने वाले हुसैन बताते हैं कि उनकी नींद सुबह धमाकों से टूटती है। एक अजीब सी गूंज सुनाई दी, ये 3-4 मिनट तक चलती रही और फिर धमाका हुआ। खिड़कियां और पर्दे हिल रहे थे। मैं पहले बीमार रहता था। जंग के तनाव की वजह से बीमारी दोबारा उभर आई है। अब दिन में 9 गोलियां खाता हूं। डॉक्टर ने कहा है कि मेरा तनाव जानलेवा हो गया है। इजराइली हमलों के बाद ईरान में काली बारिश
इजराइल और अमेरिका ने ईरान के तेल भंडारों पर हमले किए हैं। तेहरान की रिफाइनरी पर हमलों के बाद आग लग गई। रिफाइनरी से निकला तेल शहर की नालियों में पहुंच गया। इससे सड़कों के किनारे आग लग गई। आसमान में बादल छा गए। तेहरान में काली बारिश हुई। तेल मिला होने की वजह से पानी काला दिखाई दिया। दरअसल, लाखों गैलन कच्चा तेल जलता है, तो वह भारी मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और कालिख पैदा करता है। आमतौर पर धुआं ऊपर जाकर बिखर जाता है, लेकिन हमलों के दौरान तेहरान के ऊपर से एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल स्टॉर्म (तूफान) गुजर रहा था। इसकी वजह से उठने वाली तेज हवा ने धुएं और अधजले तेल के कणों को बादलों के भीतर खींच लिया। बादलों में मौजूद नमी तेल के कणों के चारों ओर जमा हुई, तो वे भारी होकर बारिश बनकर गिरने लगे। इन बूंदों में कार्बन और हाइड्रोकार्बन (तेल) मिला हुआ था, इसलिए इनका रंग काला हो गया। ………………………
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कतर ने अमेरिका-इजराइल और ईरान की बीच चल रही जंग में मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया है। कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल अजीज अल-खुलैफी ने कहा कि जंग बंद होने के बाद ही कतर कोई भूमिका निभाएगा। उन्होंने अल जजीरा से कहा कि कतर ईरान का दुश्मन नहीं है। पूरे रीजन को दुश्मन की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इस संकट का स्थायी समाधान सिर्फ बातचीत से ही निकल सकता है। पढ़ें पूरी खबर…