‘हम केजरीवाल के रिश्तेदार नहीं, हमें क्यों हटा रहे’: मोहल्ला क्लिनिक स्टाफ बोले- फोन पर इस्तीफा मांग रहे, CM मैडम बताएं हमारी क्या गलती h3>
’CM मैडम आरोग्य मंदिर खोल रही हैं। हमें उससे दिक्कत नहीं। हम बस यही चाहते हैं कि नया स्टाफ बुलाने के बजाय पहले हमें नौकरी दी जाए। हमने फर्स्ट एड की ट्रेनिंग ली है। दिल्ली सरकार का एग्जाम भी पास किया है। हमें प्रेफरेंस मिले। ऐसा नहीं है कि हम केजरीवाल
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दीपक कुमार दिल्ली में मंगोलपुरी के मोहल्ला क्लिनिक में पिछले 6 साल से काम कर रहे हैं। वो समय पर सैलरी न मिलने से पहले से परेशान हैं। अब दिल्ली में बीजेपी सरकार के हेल्थ स्कीम शुरू करने के बाद उन्हें नौकरी जाने का डर सता रहा है।
दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार ने दिल्ली में नई हेल्थ स्कीम आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू की है। इसके तहत पुरानी डिस्पेंसरी को मॉडिफाई करके इनकी जगह आरोग्य मंदिर खोले जा रहे हैं। फर्स्ट फेज में 33 सेंटर खोले जा चुके हैं। इनमें स्टाफ की भर्ती भी हो गई है। जबकि दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने मोहल्ला क्लिनिक के स्टाफ को भर्ती में प्राथमिकता देने का वादा किया था।
लिहाजा, आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक (AAMC) के संविदा डॉक्टर्स समेत बाकी स्टाफ ने 28 जुलाई को इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की। कर्मचारियों ने नौकरी से हटाने पर रोक लगाने और समय पर सैलरी दिए जाने की मांग की है। स्टाफ का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक में जानबूझकर ऐसे हालात बनाए जा रहे हैं कि वे खुद बंद हो जाएं।
दैनिक NEWS4SOCIALकी टीम दिल्ली की रोहिणी और मंगोलपुरी इलाके पहुंची। यहां हमने मोहल्ला क्लिनिक के स्टाफ, डॉक्टरों और मरीजों से बात कर मौजूदा हालात समझा।
सबसे पहले जानिए क्या कह रहा स्टाफ… फोन कॉल पर इस्तीफा मांग रहे, विरोध करने पर ट्रांसफर हमने मौजूदा हालात को लेकर मोहल्ला क्लिनिक के स्टाफ से बात की। उनका आरोप है कि उन्हें एक-एक कर बिना कारण बताए हटाया जा रहा है। कर्मचारियों से फोन कॉल पर इस्तीफे मांगे जा रहे हैं। उन्हें कोई लिखित आदेश भी नहीं दिया गया है।
CM रेखा गुप्ता ने कहा था कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मोहल्ला क्लिनिक का स्टाफ ट्रांसफर किया जाएगा, लेकिन अब हमसे जबरदस्ती नया MoU साइन कराया जा रहा है। उसमें लिखा है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में नए स्टाफ की भर्ती होगी और उनके आते ही आपको हटा दिया जाएगा। इसका विरोध करने पर जबरन ट्रांसफर किया जा रहा है।
इनके आरोपों को समझने के लिए हम मंगोलपुरी में मौजूद मोहल्ला क्लिनिक पहुंचे। यहां हमें दीपक कुमार मिले। वो मोहल्ला क्लिनिक में 2019 से काम कर रहे हैं और मल्टी-पर्पज वर्कर (MPW) की पोस्ट पर तैनात हैं।
दीपक इससे पहले DTC बस में कंडक्टर की नौकरी करते थे। वे सिलेक्शन को लेकर बताते हैं, ‘2018 में दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लिनिक में नियुक्ति के लिए फॉर्म निकाला था। दिल्ली की IP यूनिवर्सिटी ने एग्जाम लिया था। मेरी 180 रैंक आई और सिलेक्शन भी हो गया, जिसके बाद 25 अगस्त 2019 को हमारी भर्ती हुई।
दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक के बाहर लगे पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की फोटो को भी कवर कर दिया गया है।
सैलरी पहले से कम हुई, नौकरी जाने का डर अलग दीपक बताते हैं, ‘पहले हमें अच्छी सैलरी मिल जाती थी। प्रति मरीज के 8 रुपए के हिसाब से हमें महीने का 30 हजार रुपए तक मिल जाता था। अब किसी महीने 15 हजार तो किसी महीने 10 हजार रुपए ही मिलते हैं।‘
वजह पूछने पर दीपक बताते हैं, ‘पिछले साल केजरीवाल सरकार ने नियम बनाया था कि एक दिन में एक क्लिनिक पर सिर्फ 150 मरीज ही देख सकते हैं। एक भी मरीज ज्यादा हो जाता है तो उसे लौटाना पड़ता था। इस वजह से हमारी सैलरी भी कम हो गई है। जबकि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्टाफ की फिक्स सैलरी है, फिर चाहे एक ही मरीज आए।’
‘कुछ MPW की तो 2 हजार सैलरी भी आ रही है। उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। मेरा बड़ा परिवार है। माता-पिता, बीवी और दो बच्चे हैं। बच्चों की फीस भरनी है। बीमार मां का इलाज भी कराना है। इतने पैसों में सब कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।’
CM मैडम बोलती कुछ हैं और करती कुछ हैं दीपक आगे बताते हैं, ‘CM मैडम ने खुद बोला था कि जब भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोलेंगे, सबसे पहले हमें वहां शिफ्ट किया जाएगा। अब हो कुछ और रहा है। वो बोलती कुछ, और करती कुछ हैं। अब तक जितने भी आरोग्य मंदिर खुले हैं, कहीं भी मोहल्ला क्लिनिक का स्टाफ नहीं लिया गया। वहां RML और अन्य अस्पतालों से परमानेंट स्टाफ भेजा जा रहा है।’
हमें CM ने कोई गारंटी भी नहीं दी है कि नौकरी मिलेगी। बल्कि इस साल हमारा कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म हो रहा है। कॉन्ट्रैक्ट में लिखा है कि हमारी नियुक्ति सिर्फ मार्च 2026 तक ही है। उसके बाद हमारा क्या होगा, कुछ नहीं पता।
‘जब से BJP सरकार आई है, तब से हमें नौकरी जाने का डर लगा हुआ है।’
दीपक कहते हैं, ‘हम हेल्थ सेक्रेटरी पंकज गुप्ता से भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन नौकरी को लेकर कभी कोई आश्वासन नहीं मिला। हेल्थ मिनिस्टर बोलते हैं कि हमें हटा दिया जाएगा। मैं चाहता हूं हमें जॉब सिक्योरिटी दी जाए।’
दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट परिसर में खुले ‘शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ की तस्वीर। पहले इसी जगह पर मोहल्ला क्लिनिक संचालित होता था।
मैटर्निटी लीव मिलती नहीं, प्रेग्नेंसी का पता चलते ही नौकरी से निकाला निधि मंगोलपुरी मोहल्ला क्लिनिक में बतौर मेडिकल कंसल्टेंट काम करती हैं। वो भी 2019 से यहां काम कर रही हैं।
वे बताती हैं, ‘CM रेखा गुप्ता ने मोहल्ला क्लिनिक के स्टाफ को ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर में लेने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। आरोग्य मंदिर में नया और परमानेंट स्टाफ नियुक्त किया जा रहा है। इन्हें दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों से बुलाया जा रहा है। जबकि हमें धीरे-धीरे हटाने का काम हो रहा है।’
हमें सैलरी क्लिनिक पर आने वाले मरीजों की संख्या के हिसाब से मिलती है। हर महीने मुश्किल से 17 से 18 हजार रुपए ही बनते हैं। आप ही बताइए इसमें कैसे घर चलाएं।
‘इतनी सैलरी में बच्चों की पढ़ाई ही मुश्किल से हो पाती है। हमारे लिए तो मैटर्निटी लीव तक की व्यवस्था नहीं है। अब हमारी नौकरी पर भी खतरा मंडरा रहा है।’
‘यहां पास के ही मोहल्ला क्लिनिक में मेरी एक दोस्त की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। उसे छुट्टी देने के बजाय नौकरी से निकाल दिया गया। यहां हाल ऐसा है कि बच्चे को जन्म देने के 10 दिन के अंदर ही दोबारा नौकरी जॉइन करने का दबाव बनाने लगते हैं।’
दिल्ली में कई मोहल्ला क्लिनिकों में दवाइयों का स्टॉक खत्म हो रहा है। कई मरीज इसे लेकर शिकायत कर रहे हैं।
हम केजरीवाल के सगे नहीं, फिर ये बर्ताव क्यों वे आगे कहती हैं, ‘रेखा गुप्ता सरकार के आने के बाद से हमारी परेशानी बढ़ गई है। क्लिनिक पर पिछले दो महीने से दवाइयां नहीं आ रहीं। मेडिकल का बाकी सामान भी नहीं मिल रहा। यहां जानबूझकर ऐसी कोशिशें की जा रही हैं कि मोहल्ला क्लिनिक खुद बंद हो जाए।’
‘हम केजरीवाल के सगे नहीं हैं, जो हमारे साथ ये बर्ताव हो रहा है। आज BJP सरकार है। अगली बार कोई और सरकार आएगी। क्या हर सरकार हमें ऐसे ही टहलाती रहेगी?’
समय पर सैलरी नहीं आती, BJP सरकार में दिक्कतें बढ़ गईं सुनील अरोड़ा सुल्तानपुरी मोहल्ला क्लिनिक में बतौर फार्मासिस्ट काम करते हैं। उनकी तकलीफ भी बाकी स्टाफ की ही तरह है। वो कम सैलरी और पिछले 6 साल से इंक्रीमेंट न होने से नाराज हैं। अब नौकरी जाने का खतरा परेशानी की नई वजह बन गया है।
वे कहते हैं, ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर में भी मोहल्ला क्लिनिक की तरह नर्स, डॉक्टर, MCW और फार्मासिस्ट की जरूरत है। हमारे पास अनुभव है। हमने कोविड के वक्त भी काम किया है। हमारे बारे में सरकार कुछ नहीं सोच रही। अब हमारी उम्र भी नहीं बची कि सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर लें।‘
‘यहां काम करने का कोई एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट भी नहीं मिलता। हमें जॉब सिक्योरिटी दी जाए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हमारी नियुक्तियां की जाएं। हमारे पास अनुभव और डिग्री दोनों है।’
बाकी परेशानियां सुनाते हुए सुनील कहते हैं, ‘प्रति मरीज 12 रुपए मिलते हैं। इस तरह 27 हजार रुपए महीने की तनख्वाह बन पाती है। पिछले 6 साल से 12 रुपए का ही क्राइटेरिया है। इस सैलरी में आज के वक्त में गुजारा करना बहुत मुश्किल है। हमें कोई इन्क्रीमेंट भी नहीं मिलता। न ही कोई मेडिकल फैसिलिटी मिलती है।’
‘छुट्टी लेने पर उस दिन के पैसे नहीं बनते। जिस दिन डॉक्टर छुट्टी लेते हैं, उस दिन क्लिनिक बंद रहती है। इसलिए उस दिन का भी पैसा नहीं मिलता। घर में मेरी तीन बहनें, माता-पिता और दादी हैं। मुझे ही घर चलाना होता है। हर छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी करने के लिए लोन लेना पड़ता है। समय पर सैलरी नहीं आती तो किस्त भरना भी मुश्किल हो जाता है।’
मोहल्ला क्लिनिक के बाकी स्टाफ की तरह ही सुनील भी मानते हैं कि BJP सरकार के आने के बाद से हालात और खराब हो गए हैं। वे कहते हैं, ‘केजरीवाल के समय भी दिक्कत थी, लेकिन अब बढ़ गई है।’
अब मरीजों की बात… मोहल्ला क्लिनिक बंद नहीं होना चाहिए, यहां इलाज-दवा-टेस्ट सब फ्री हमने मोहल्ला क्लिनिक में इलाज कराने आए कुछ मरीजों से भी बात की। सुल्तानपुरी में हमारी मुलाकात फिरोजा से हुई। वो अपना और अपने पति का इलाज कराने आई थीं। फिरोजा कहती हैं, ‘मैं जब भी बीमार होती हूं तो मोहल्ला क्लिनिक ही आती हूं। यहां शायद ही ऐसी कोई दवा हो जो न मिले या बाहर से लेनी पड़े।’
तकलीफ पूछने पर फिरोजा कहती हैं, ‘मेरे घुटनों में दिक्कत है। यहां से ट्यूब ले जाती हूं, लेकिन इस बार खत्म हो गई है। जब से मोहल्ला क्लिनिक खुला है, तब से बहुत आराम है।’
यहां सुल्तानपुरी और मंगोलपुरी के अलावा बुद्ध विहार से भी लोग आते हैं। जो नौकरी पर जाते हैं वो यहीं से दवा लेकर आगे काम पर निकल जाते हैं।
इसके बाद हम रोहिणी पहुंचे। यहां एक मोहल्ला क्लिनिक पर मिले मोहित शर्मा कहते हैं, ‘मैं पिछले 5 साल से अपनी मां को यहां लेकर आ रहा हूं। उन्हें डायबिटीज है। दवा यहीं से मिल जाती है। टेस्ट भी यहीं हो जाते हैं। हमें कोई पैसा नहीं देना पड़ता। आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुलने और फिर पूरी तरह फंक्शनल होने में वक्त लगेगा। जिन्हें हर हफ्ते दवाई लेनी होती है, अगर उन्हें नहीं मिलेगी तो परेशानी हो जाएगी।’
मोहल्ला क्लिनिक बंद हो जाए, जानबूझकर ऐसे हालात बना रहे हमने मोहल्ला क्लिनिक में काम कर रहे डॉक्टरों से भी बात की, लेकिन कोई कैमरे पर आने को राजी नहीं हुआ। एक डॉक्टर ने हमें बताया, ‘सरकार जो कर रही है, वो बिना प्लानिंग के हो रहा है। मोहल्ला क्लिनिक पहले से जमी-जमाई व्यवस्था है। अब इसे हटाना या बंद करना सही फैसला नहीं है। यहां कई सालों से मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर को भी पता है किस मरीज को क्या तकलीफ है। एक रिश्ता बन गया है।’
‘पिछले कुछ समय से ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं कि मोहल्ला क्लिनिक बंद हो जाएं या लोग वहां न जाएं। हम दो महीने से अस्पतालों से दवाइयां मांग रहे हैं। ये डायबिटीज, फ्लू, वायरल, फीवर जैसी आम बीमारियों की दवाएं हैं। ये हर क्लिनिक में होनी ही चाहिए। हमारे यहां स्टॉक खत्म होने वाला है। हम CDMO को भी मेल पर लिख चुके हैं, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं कराई जा रही।’
अब जानिए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं… BJP सरकार बोली- नए सिस्टम में किसी की नौकरी नहीं जाएगी दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को सरकार से कहा है कि अगर वो अगले साल 31 मार्च से पहले आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक (AAMC) के स्टाफ की सर्विसेज खत्म करने का प्रस्ताव करती है, तो उन्हें कम से कम दो हफ्ते पहले नोटिस देना होगा। इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि AAMC के किसी भी स्टाफ की सेवाएं समाप्त करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
CM रेखा गुप्ता और हेल्थ मिनिस्टर पंकज सिंह ने भरोसा दिया है कि किसी भी स्टाफ के साथ अन्याय नहीं होगा और मौजूदा स्टाफ को प्राथमिकता दी जाएगी।
वहीं हेल्थ मिनिस्टर ने भी भरोसा दिलाया कि सरकार किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘सभी योग्य डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी हमारे साथ रहेंगे। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।’
AAP : अरविंद केजरीवाल ने पहले ही दी थी चेतावनी इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने BJP सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहितकारी योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद कर रही है, जैसा कि अरविंद केजरीवाल ने पहले ही चेताया था।
सौरभ ने बताया कि दिल्ली सरकार की एक बैठक में कहा गया कि दिल्ली की ज्यादातर मोहल्ला क्लिनिकों को बंद कर दिया जाएगा। क्योंकि उनकी जगह आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले जा रहे हैं। ये भी कहा गया कि जहां भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर होगा, वहां पास में मोहल्ला क्लिनिक की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए उन क्लीनिकों को बंद कर दिया जाएगा।
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‘हमारा परिवार बंगाल से दिल्ली काम करने के लिए आया, लेकिन यहां हमें परेशान किया जा रहा है। हम बंगाली बोलते हैं और मुस्लिम भी हैं। भाषा और धर्म के आधार पर हमें टारगेट किया जा रहा है। हमें बांग्लादेशी बताकर बेदखल क्यों किया जा रहा है। हम तो अपने देश में ही सुरक्षित नहीं हैं।‘ अमानुर शेख पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से 20 साल पहले दिल्ली आ गए थे। अचानक बदले माहौल से परेशान हैं। पढ़िए पूरी खबर…
