सीहोर कलेक्टर ने नरवाई जलाने पर लगाया प्रतिबंध: उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई, 31 दिसंबर तक आदेश प्रभावी रहेगा – Sehore News h3>
सीहोर कलेक्टर बालागुरू के. ने जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में नरवाई जलाने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश सोमवार को जारी किया जो आगामी 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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यह निषेधात्मक आदेश पर्यावरण संरक्षण, जनसुरक्षा और आगजनी की घटनाओं की रोकथाम को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। नरवाई जलाने से वायुमंडल में धुआं फैलता है, जिससे वातावरण प्रदूषित होता है और मानव स्वास्थ्य पर भी हानिकारक असर पड़ता है।
आदेश के अनुसार, जिन किसानों को अपने खेतों की जुताई करनी है, वे रोटावेटर या अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं। यदि कोई किसान नरवाई जलाते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नरवाई जलाने वाले किसानों से पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जाएगा। जिन किसानों की भूमि दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ से कम है, उनसे प्रति घटना पांच हजार रुपए का मुआवजा लिया जाएगा। इसी प्रकार, पांच एकड़ या उससे अधिक भूमि वाले किसानों से प्रति घटना पंद्रह हजार रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जाएगा।
कलेक्टर बालागुरू के. ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों को नरवाई न जलाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, नरवाई जलाने की घटनाओं की निगरानी करें, ताकि कोई भी व्यक्ति खेतों में नरवाई न जलाए।
जिले में फसलों की कटाई के बाद कई किसान खेतों में बची हुई नरवाई, भूसा या फसल अवशेषों को जलाकर नष्ट करते हैं। इस प्रक्रिया से मिट्टी की उर्वरता घटती है, भूमि की नमी समाप्त होती है और मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, खेतों के समीप से गुजरने वाली बिजली की लाइनों को क्षति पहुंचने की संभावना रहती है, जिससे विद्युत आपूर्ति बाधित होती है और कभी-कभी गंभीर दुर्घटनाएं भी घटित हो जाती हैं। वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी रोगों में वृद्धि होती है और आस-पास के प्राकृतिक वनस्पति तंत्र तथा जैव विविधता को भी क्षति पहुंचती है। कई बार आगजनी की घटनाएं फैलकर आवासीय क्षेत्रों, पशुओं और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
