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संस्कृति मंत्री ने ‘सिगरेट वाले सांसद’ को पकड़ा: कलेक्टर-SP ने फूल देकर समझाया ‘रूल’; कुलगुरु के रास्ते में फिर ‘रुकावट’ – Rajasthan News

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संस्कृति मंत्री ने ‘सिगरेट वाले सांसद’ को पकड़ा:  कलेक्टर-SP ने फूल देकर समझाया ‘रूल’; कुलगुरु के रास्ते में फिर ‘रुकावट’ – Rajasthan News

संस्कृति मंत्री ने ‘सिगरेट वाले सांसद’ को पकड़ा: कलेक्टर-SP ने फूल देकर समझाया ‘रूल’; कुलगुरु के रास्ते में फिर ‘रुकावट’ – Rajasthan News

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सिगरेट पीने वाले सांसद जी ने तर्क दिया कि मौजूदा सरकार में दिल्ली में पॉल्यूशन सबसे ज्यादा है। मेरे एक सिगरेट पीने से क्या फर्क पड़ जाएगा? केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने उन्हें संसद परिसर में सिगरेट पीते पकड़ लिया था। भरतपुर में बृज यूनिवर्सिटी वाले कुलगुरु को अपनी कार तक पहुंचने में बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। झालावाड़ में कलेक्टर-एसपी ने ‘रूल’ समझाने के लिए फूल का सहारा लिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…

1. दादा, आप सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा पहुंचा रहे

बाबू मोशाय को सिगरेट की तलब लगती है। वे TMC से सांसद हैं। उनका नाम सौगत राय है। अपने पास ई-सिगरेट रखते हैं। सदन में पी नहीं सकते। इसलिए परिसर में कश ले रहे थे। केंद्रीय संस्कृति मंत्री और केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।

संस्कृति मंत्री ने विश्व की चिंता करते हुए चेतावनी दी-दादा, आप सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा पहुंचा रहे हैं।

कपड़ा मंत्री ने व्यक्तिवाद की बात की-दादा, आपके अपने स्वास्थ्य को भी खतरा है।

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संस्कृति मंत्री ने दूसरी बार स्व-अस्तित्व की बात छेड़ी- दादा, आप हमारा स्वास्थ्य भी खतरे में डाल रहे हैं।

कपड़ा मंत्री ने बात में तंज लपेटा- दादा चोरी भी करते हैं तो खुलेआम करते हैं।

अपनी गलती मानने के बजाय दादा आखिरकार पार्टीबाजी पर आ गए। बोले- हाउस के अंदर सिगरेट पीना मना है। हाउस के बाहर खुली जगह में सिगरेट पीने में कोई हर्ज नहीं। इस सरकार के राज में दिल्ली में पॉल्यूशन का स्तर सबसे खतरनाक है। उस पर बात नहीं करते। मेरे एक के सिगरेट पीने से क्या ही फर्क पड़ जाएगा? ये लोग मुद्दा डायवर्ट करता है।

संसद परिसर में टीएमसी सांसद को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह और गिरिराज सिंह ने सिगरेट पीते पकड़ लिया।

2. छात्र ने वीसी का रास्ता रोक लिया

जिसको शिक्षा की चिंता होती है वह पढ़ाई करता है। जिसे राजनीति की आकांक्षा होती है वह हो-हल्ला करता है। हो-हल्ला करने वाले छात्रों का भविष्य राजनीति में उज्ज्वल माना जाता है।

बृज यूनिवर्सिटी के कुलगुरु की परेशानी ये कि वे चैन से अपनी कार तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। यूनिवर्सिटी जाते हैं तो वहां यह युवक पहुंच जाता है।

किसी बाहरी जगह कोई कार्यक्रम में जाएं तो वहां पहुंचकर हंगामा करने लगता है। छात्र का कहना है कि वीसी ने उसका एडमिशन कैंसिल कर दिया है।

उसे इस सवाल का जवाब चाहिए कि एडमिशन कैंसिल क्यों किया गया है? जवाब मिलता नहीं और वीसी साहब की रुकावट दूर होती नहीं।

साहब सोचते जरूर होंगे कि बिना एडमिशन ही लड़के ने जीना दूभर कर रखा है, एडमिशन के बाद तो न जाने क्या करेगा।

भरतपुर में बृज यूनिवर्सिटी के वीसी को एक युवक विष्णु सिंह ने रोका और एडमिशन कैंसिल करने को लेकर सवाल किया।

3. फूल देकर समझाया ‘रूल’

कुछ लोगों को लगता है कि वे कवच-कुंडल लेकर पैदा हुए हैं। उनके ऊपर से डंपर का टायर भी निकल जाए तब भी उनका कुछ न बिगड़ेगा और वे धूल झाड़ते हुए खड़े हो जाएंगे।

समाचारों में आप पढ़ते ही होंगे। रोड एक्सीडेंट में बल्क में मौतें हो रही हैं। पहले एक-दो की खबरें आती थीं। अब 7-8 नॉर्मल है। इतने हादसों के बाद भी कुछ लोग न तो हेलमेट पहनकर चलते हैं और न सीट बेल्ट लगाते हैं।

कुछ जागरूक लोगों को छोड़ दें तो कई ऐसे भी हैं जो कोहनी या मिरर में हेलमेट फंसाकर चलते हैं और ट्रैफिक पुलिस को देखते ही सिर पर टांग लेते हैं। ऐसे लोगों को क्या कहा जाए? अंग्रेजी वाले ‘फूल’ हैं।

झालावाड़ में सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है। बार-बार समझाने के बाद भी लोग अपनी ही जिंदगी के लिए सीरियस नहीं। कलेक्टर और एसपी महोदय ऐसे ‘धुरंधरों’ को समझाने के लिए फूल लेकर सड़क पर उतरे।

रूल तोड़ने वालों को रोका। हाथ जोड़े। फूल थमाया और कहा- आपका जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हेलमेट लगा लीजिए।

इसी तरह एक कार वाले को कलेक्टर महोदय सीट बेल्ट के लिए रोका था। कार वाला शान में मरा जा रहा था। बातें गटक-गटक सुनता रहा। एसपी साहब ने उसे याद दिलाया- अब तो सीट बेल्ट लगा लो।

झालावाड़ में कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ और एसपी अमित बुडानिया ने सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान फूल देकर ट्रैफिक रूल समझाए।

4. चलते-चलते..

शान के लिए आदमी कुछ भी करता है। भीलवाड़ा के लाखोला गांव में एक परिवार ने शादी में हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करके ऐसी लाइन खींच दी थी, जिसके पार जाना किसी भी परिवार के लिए संभव नहीं था।

लेकिन मांगीलाल की डिक्शनरी में असंभव शब्द नहीं। भले उनका बजट हेलिकॉप्टर वाला नहीं। लेकिन इरादे हेलिकॉप्टर की उड़ान से ऊंचे।

उन्होंने बेटे की शादी को यादगार बनाने के लिए हवा की जगह पानी को चुना। बारात के लिए 7 नावें बुक कीं। सभी नावों में डीजे की सेटिंग कराई। फूलों और गुब्बारों से सजावट कराई।

अब तैयार थी वो बारात जो पानी के रास्ते दुल्हन की दहलीज पर पहुंचने वाली थी। तालाब की शांत धाराओं पर जब डीजे की धुन पर कांपती नावें सरसराई तो हर कोई दूल्हे के पिता मांगीलाल का कायल हो गया।

हालांकि राजस्थान में नाव से तोरण स्थल पहुंचने का यह पहला मामला नहीं था। इससे पहले उदयपुर में भारतीय मूल के अमेरिकी बिजनेसमैन राम राजू मंटेना ने अपनी बेटी नेत्रा मंटेना के मंडप तक बारातियों को लाने के लिए पिछोला में नावें उतारी थीं।

गांव में अब यही चर्चा है- हमारा मांगीलाल क्या राम राजू मंटेना से कम है?

भीलवाड़ा में लाखोला गांव से बगैरा गांव तक 5 किलोमीटर का सफर बारात ने नाव से तय किया। इस दौरान नावों पर डीजे बजते रहे।

वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी…

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