संजीवनी घोटाले बोले गहलोत- अब केस वापसी का वक्त: शेखावत से कहा – पीड़ितों की पूरी बात सुन उन्हें न्याय दिलाने के लिए बैठकर करें बात – Jodhpur News h3>
जोधपुर दौरे पर आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान हर रोज सुर्खियों में बन रहे हैं। शुक्रवार को गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए संजीवनी घोटाले को लेकर पूछे गए सवाल पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अब केस वापसी का वक्त है। अब
.
उल्लेखनीय है कि एक तरफ हाईकोर्ट से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को क्लीन चिट मिल चुकी है, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर इसी मुद्दे पर जोधपुर में बड़ा बयान देकर सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
गहलोत का नया दांव: ‘अब केस वापस लें, पीड़ितों के लिए बैठकर बात करें’
जोधपुर प्रवास के दौरान गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अब तक 15 पेशियां हो चुकी हैं। शेखावत को मानहानि का केस वापस ले लेना चाहिए और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एक जगह बैठकर बात करनी चाहिए। अगर वे निर्दोष हैं, तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मेरा मकसद सिर्फ पीड़ितों को राहत दिलाना है।”
गहलोत ने आगे कहा, “शेखावत दो-तीन बार सांसद रह चुके हैं, अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में उन्हें आगे आकर इस घोटाले पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए। मैं, शेखावत, संघर्ष समिति और पीड़ितों के साथ बैठकर समाधान निकालने को तैयार हूं।”
क्या है संजीवनी घोटाला?
- 2008 में बाड़मेर से शुरू हुई संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी ने हाई रिटर्न, विदेश यात्रा और एजेंट कमीशन जैसे लालच देकर करीब डेढ़ लाख निवेशकों से 950 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की।
- निवेशकों के पैसे को फर्जी लोन और बोगस खातों में घुमाया गया। सोसाइटी की बही में 1100 करोड़ के ऋण दिखाए गए, जिनमें ज्यादातर ग्राहक फर्जी थे।
- मास्टरमाइंड विक्रम सिंह समेत कई गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन हजारों निवेशक अब भी अपनी रकम की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
शेखावत पर क्यों उठी उंगलियां?
- घोटाले के मास्टरमाइंड विक्रम सिंह से शेखावत की नजदीकियों और कुछ कंपनियों में शेयरहोल्डिंग को लेकर सवाल उठे।
- SOG की शुरुआती जांच रिपोर्ट में शेखावत और उनके परिवार के नाम का उल्लेख था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद SOG ने हाईकोर्ट में यू-टर्न लेते हुए शेखावत को आरोपी नहीं माना।
- हाईकोर्ट ने SOG की रिपोर्ट के आधार पर शेखावत को क्लीन चिट दे दी, लेकिन FIR रद्द नहीं की। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की इजाजत से आगे कार्रवाई की छूट दी है।
सियासी बयानबाजी और कानूनी लड़ाई
- गहलोत ने बार-बार शेखावत को घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि उनके पास बतौर सीएम जो दस्तावेज आए, उनमें शेखावत के परिवार का नाम था।
- शेखावत ने इसे साजिश बताते हुए दिल्ली की अदालत में गहलोत पर मानहानि का केस दर्ज कराया। अब तक 15 बार दोनों पक्ष कोर्ट में पेश हो चुके हैं।
- गहलोत का कहना है कि SOG की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्होंने बयान दिए, जबकि शेखावत का दावा है कि उनकी तीन पीढ़ियों का इस घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है।
गहलोत की मांग – रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बने एसआईटी
- गहलोत ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT बने, ताकि SOG की जांच पर लगे आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
- हाईकोर्ट ने भी सरकार से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है कि कितने मामलों में कौन-कौन सी धाराएं लागू होंगी।
