लोग 17 अप्रैल से खुद कर सकेंगे डिजिटल गणना-DM: सुपौल में जनगणना 2027 की तैयारी पूरी, 2 मई से घर-घर सर्वे – Supaul News h3>
सुपौल में जनगणना 2027 को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होने जा रही है, क्योंकि इसे पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से मोबाइल एप और वेब पोर्टल के जरिए संपन्न किया जाएगा।
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गुरुवार शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाधिकारी सावन कुमार ने इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।
जिले में कुल 17 चार्ज बनाए गए
डीएम ने बताया कि जनगणना का पहला चरण “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” 2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान जिले में घर-घर जाकर मकानों की गिनती की जाएगी। इसके लिए सुपौल जिले में कुल 17 चार्ज बनाए गए हैं।
जिलाधिकारी सावन कुमार।
जिनमें 11 ग्रामीण और 6 शहरी क्षेत्र शामिल हैं। इस कार्य के लिए कुल 4621 प्रगणक और 785 पर्यवेक्षक (सुरक्षित सहित) तैनात किए गए हैं, जो निर्धारित गणना ब्लॉकों में जाकर मकानों का सर्वेक्षण करेंगे।
BDO चार्ज गणना अधिकारी की भूमिका निभाएंगे
उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) तथा नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी इस कार्य में चार्ज गणना अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि सर्वेक्षण कार्य सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।
डीएम सावन कुमार ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जनगणना 2027 में पहली बार आम नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प दिया गया है। यह प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक चलेगी। इस दौरान कोई भी व्यक्ति घर बैठे वेब पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपना विवरण स्वयं दर्ज कर सकता है।
पोर्टल पर जाकर अपना राज्य चयन करना होगा
उन्होंने बताया कि स्व-गणना की प्रक्रिया बेहद सरल है। सबसे पहले व्यक्ति को पोर्टल पर जाकर अपना राज्य चयन करना होगा, उसके बाद मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य है। मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, जिसे दर्ज करते ही जनगणना का पूरा प्रश्नावली (Questionnaire) खुल जाएगा।
इसमें कुल 33 प्रश्न होंगे, जिनका उत्तर भरकर व्यक्ति अपना विवरण जमा कर सकता है। डीएम ने कहा कि नागरिक चाहें तो ईमेल आईडी भी दर्ज कर सकते हैं, लेकिन मोबाइल नंबर अनिवार्य है क्योंकि उसी के माध्यम से OTP प्राप्त होगा।
अपना जिला, गांव या वार्ड चयन करना होगा
पोर्टल पर आगे बढ़ते हुए व्यक्ति को अपना जिला, गांव या वार्ड चयन करना होगा। इसके बाद एक मैप इंटरफेस के माध्यम से अपने घर की लोकेशन निर्धारित करनी होगी, जिसमें 100 मीटर के दायरे में अपना मकान पहचान कर उसे क्लिक करना होगा। इसके साथ ही पिनकोड सहित पूरी जानकारी भरनी होगी। प्रश्नावली में मकान के प्रकार (कच्चा या पक्का), कमरों की संख्या, घर के मुखिया का नाम, परिवार के सदस्यों की जानकारी समेत अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने होंगे। डीएम ने स्पष्ट किया कि जब तक फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया जाता है, तब तक उसमें संशोधन (Edit) किया जा सकता है, लेकिन एक बार सबमिट होने के बाद उसमें कोई बदलाव संभव नहीं होगा।
एक से अधिक बार दर्ज न करें कोई जानकारी
उन्होंने नागरिकों को सावधान करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी जानकारी एक से अधिक बार दर्ज न करे। डुप्लीकेट एंट्री से बचना बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर मकान है, तो वह केवल उसी स्थान का विवरण दर्ज करे जहां वह वर्तमान में रह रहा है। उदाहरण देते हुए डीएम ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति शहर में किराए के मकान में रह रहा है, तो उसे उसी मकान का विवरण दर्ज करना होगा। वहीं यदि उसके माता-पिता गांव में रहते हैं, तो वे अपने घर का अलग से विवरण दर्ज करेंगे और उसमें शहर में रहने वाले व्यक्ति का नाम शामिल नहीं करेंगे। इसी तरह हर परिवार को अपने-अपने वास्तविक निवास के आधार पर अलग-अलग प्रविष्टि करनी होगी।
किसी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं डीएम सावन कुमार ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल है और इसके लिए किसी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं है। कोई भी व्यक्ति कहीं से भी इंटरनेट के माध्यम से अपना डेटा दर्ज कर सकता है। उन्होंने इसे जनभागीदारी का महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज करें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने यह भी बताया कि स्व-गणना के दौरान जो अंतिम संख्या (Reference Number) प्राप्त होगी, उसे सुरक्षित रखना आवश्यक है। जब 2 मई से प्रगणक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे, तब नागरिक इस नंबर को दिखाकर अपने विवरण की पुष्टि कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।
आंध्र प्रदेश,ओडिशा के बाद बिहार में भी लागू किया
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीएम ने बताया कि राज्य स्तर पर यह अभियान 17 अप्रैल से शुरू हो रहा है और सुपौल जिला भी इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और अब बिहार में भी इसे लागू किया जा रहा है।
जनगणना सरकारी प्रक्रिया नहीं, विकास की आधारशिला
अंत में जिलाधिकारी ने मीडिया के माध्यम से आम जनता तक यह संदेश पहुंचाने की अपील की कि जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के विकास की आधारशिला है। सही और सटीक जानकारी से ही सरकार योजनाएं बनाती है और संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करती है।
इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपनी जानकारी सही तरीके से दर्ज करे और इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में सहयोग दे।
