लेडी कॉन्स्टेबल ने रोड को बनाया ‘डांस-फ्लोर’: करप्शन पर सांसद बोले-‘2 साल में ये विकास?’; ‘स्टैंडिंग MLA’ पत्रकारों पर भड़के – Rajasthan News h3>
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तीन विधायकों का फंड सीज कर दिया गया है। हालांकि टेंडर में कमीशनखोरी राजनीति में हैरान करने वाली बात नहीं। इस पर नागौर सांसद ने खूब तंज कसे। बीकानेर में विधायकजी को बैठने के लिए सीट नहीं मिली तो पत्रकारों पर भड़ास निकाल दी। एक लेडी कॉन्स्टेबल का डांस वीडियो खूब घूम रहा है। मैडम हाईवे पर म्यूजिक सिस्टम लगाकर नाच रही हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. ‘जनता को क्रांति करनी पड़ेगी..’
वे ईमानदार थे। इसलिए राजनीति में नहीं चल सके। बाबूगिरी से रिटायर होकर पान की दुकान पर बैठने लगे। वहीं पत्रकार से भेंट हो गई। राजनीति की बातें चल पड़ीं।
वे मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह बोले- जिन विधायकों को विधायकी का लंबा अनुभव नहीं होता, वे चपेट में आ ही जाते हैं। टेंडर में कमीशनखोरी कौन सी नई बात है?
विधायक सत्ता पक्ष का हो, विरोधी पक्ष का हो या फिर निर्दलीय हो, कमीशन नहीं खाएगा तो पता कैसे चलेगा कि काम हो रहा है? वह नहीं खाएगा तो अधिकारी खा जाएंगे।
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विकास चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए। इसलिए विकास की मलाई का विभाजन भी चरणबद्ध ही होता है। यही रीत है। बजट का 30 फीसदी जनता के लिए छोड़ दिया जाता है, क्या यह कम है?
चपेट में आए एक विधायक उनसे ईमानदारी के गुर सीखने आते थे। उन्हीं को फोन लगाया। ज्ञान दिया- कोई बात नहीं। आरोप लगते रहते हैं। कैमरे में कैद हो गए तो भी कोई बात नहीं। पत्रकारों को बुलाकर कह दो कि मेरे खिलाफ षड्यंत्र है। सब झूठ है। फर्जी है। ईमानदारी की कसम।
फोन कटने के बाद उन्होंने कराह के स्वर में कहा- यह लंबे अनुभव की शुरुआत है। विधायक धीरे-धीरे सब सीख जाते हैं। आगे से ध्यान रखेंगे। चपेट में आना जरूरी है।
कुछ दिन सुर्खियों में रहेंगे वह भी अच्छा है। बदनाम होने से भी नाम ही होता है। फिर वे पान चबाने लगे। पत्रकार समझ गया कि चर्चा का समय समाप्त हो चुका है।
पत्रकार सांसद महोदय के दफ्तर जा पहुंचा। सांसद जी से विकास को लेकर सवाल किया। सांसद ने कहा-2 साल में यही विकास हुआ है। जनता को जागना होगा। जनता को क्रांति करनी होगी। जनता को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। मैं अकेला कहां तक भागता फिरूं।
नागौर सांसद ने सरकार के दो साल पर कहा कि तीन विधायकों का भ्रष्टाचार सामने आ गया। दो साल में यह हुआ है।
2. सांप निकलने के बाद लीक पीटने में कोई कसर नहीं
शेखावाटी ‘धुरंधर का ल्यारी’ बनता जा रहा है। आमने-सामने गैंगवार हो रही है। बदमाश ठगी-तस्करी के रास्ते पर चलकर बड़ा धंधा जमा चुके हैं। जमीनों का कारोबार करने लगे हैं। पुलिस को भनक ही नहीं।
हाल में दो गैंग खेतों में आमने सामने हो गईं। दोनों तरफ का एक-एक आदमी मारा गया। हिस्ट्रीशीटर ने बेल्ट से एक पकड़े हुए बदमाश को पीटा। वीडियो सोशल मीडिया पर भी आ गए।
अब पुलिस हिस्ट्रीशीटर की तलाश में निकाली। किसी ने पुलिस को गुप्त सूचना दी कि हो न हो, इस वारदात के बाद हिस्ट्रीशीटर अपने घर की छत पर गुनगुनी धूप में बैठकर गर्म दूध के साथ बाजरे की राबड़ी खा रहा होगा।
पुलिस दल-बल के साथ निकल पड़ा। सात-आठ गाड़ियों का काफिला निकला। दक्षिण भारतीय सिनेमा की तरह सभी गाड़ियां कच्ची सड़क पर धूल उड़ाते हुए कतार में पहुंचीं। हिस्ट्रीशीटर के बाड़े के दरवाजे के पास ही ब्रेक लगे।
पुलिसकर्मी दनदनाते हुए घर में दाखिल हो गए। मौके के चारों तरफ घेर लिया गया। दालान, चबूतरा, नोहरा, खेत, बैडरूम, गुसलखाना, छत, बाड़ा कुछ नहीं छोड़ा। चारे तक में जेली घुसा-घुसाकर हिस्ट्रीशीटर को तलाशा गया।
बेड के बॉक्स खोलकर डिब्बा-डिबली हटा-हटाकर हिस्ट्रीशीटर की खोज हुई। इतनी मेहनत के बाद भी हिस्ट्रीशीटर हाथ नहीं लगा। दबिश में कोई कमी नहीं। कागजी कार्रवाई पूरी की गई। कुछ दिन मामला गर्म रहेगा।
झुंझुनूं में हिस्ट्रीशीटर रविंद्र कटेवा की तलाश में पुलिस दबिश पर दबिश मार रही है।
3. ‘पत्रकार हो तो कुछ भी बोलोगे..?’
वहां सरकार के 2 साल के कामकाज गिनाए जा रहे थे। जिन्होंने विकास कार्यों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी उन्होंने पीछे घूमकर यह भी नहीं देखा कि विधायक जी के लिए कुर्सी का इंतजाम नहीं हुआ।
विधायक जी ‘स्टैंड बाई मोड’ पर रहे। प्रेस ब्रीफिंग शुरू हो गई। पूर्व विधायक तक कुर्सी पर बैठी थीं। कलेक्टर साहिबा के पास भी कुर्सी थी। विधायक जी को बुरा तो लगा होगा लेकिन कभी कभी खड़े रहने में भी शान है।
विधायक जी ने मन में सोचा- पत्रकार समूह मन ही मन गुणगान कर रहा होगा। क्या विधायक हैं। बैठते ही नहीं। अलर्ट रहते हैं। न जाने कब कौन सा काम निकल आए और वे खड़े-खड़े ही चल पड़ें। उन्होंने मन ही मन खुद को प्रणाम किया।
लेकिन पत्रकार, जैसा विधायक जी सोच रहे थे, उसके बिल्कुल उलट बर्ताव करने लगे। बॉर्डर पर सिपाही जैसे खड़े विधायक महोदय पर ही सवाल दाग दिया कि क्षेत्र में घूमते नहीं। कई काम पेंडिंग पड़े हैं।
एक तो सीट नहीं मिली, दूसरे, खड़े रहने का भी कोई फायदा नहीं हुआ, विधायक जी फट पड़े- कहां काम बाकी है। बताओ, दिखाओ। चलो मेरे साथ। पत्रकार हो इसका ये मतलब तो नहीं कि जैसा मन आएगा वैसा बोलोगे।
बीकानेर में हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर की मौजूदगी में विधायक जेठानंद व्यास पत्रकारों पर भड़क गए।
4. चलते-चलते..
‘पुलिसवाले भी इंसान हैं। उन्हें भी नाचने का अधिकार है। और फिर मैडम ऑन ड्यूटी थोड़े ही हैं जो इतना हंगामा मचा है।’
राजस्थान पुलिस की लेडी कॉन्स्टेबल का हाईवे पर डांस का वीडियो आने के बाद उन यूजर्स के बीच जंग छिड़ी थी, जिन्हें फुरसत में ऑनलाइन बहस का शौक रहा है।
इनमें से कई ऐसे हैं जो वकील बनना चाहते थे लेकिन सही समय पर सही निर्णय नहीं लेने के कारण एलएलबी में एडमिशन नहीं ले पाए थे और वर्तमान में परचून की दुकान पर बैठे थे।
उक्त तर्क ऐसे ही किसी महारथी ने दिया था। आगे उसने ‘टारगेटेड’ यूजर को लक्ष्य करते हुए प्राण-भेदी कमेंट किया-रात दिन तुम्हारी सुरक्षा में तैनात पुलिस दो पल भी आनंद के गुजार ले तो तुम्हारी जान सुलगने लगती है।
ट्रैक्टर में से सब्जी के कट्टे उतार कर जस्ट फ्री हुए ‘टारगेडेट यूजर’ ने फोन संभाला और कमेंट पढ़े। उसका पारा हाई हो गया। उसने गाजर की बोरी से पीठ टिकाई और कमेंट में जाकर जवाब दिया- सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है।
गलियों में घुसकर चालान काटे जा रहे हैं। पुलिस ऑन ड्यूटी भी पुलिस और ऑफ ड्यूटी भी पुलिस है। डांस करना है घर में करो। अगर हाईवे पर पुलिस का ऑफ ड्यूटी डांस करना जायज है तो सड़क पर ट्रक खड़ा कर चारपाई पर लेटने वाला ड्राइवर भी जायज है और रोड पर ठेला लगाकर भुट्टे बेचने वाला भी जायज है।
टारगेटेड यूजर आत्म मुग्ध था। उसे लगा कि उसने जॉली एलएलबी को भरे कोर्ट में पटखनी दे दी है। अब वीडियो के कमेंट बॉक्स में कोई भी उससे टकराने की जुर्रत नहीं करेगा।
राजस्थान पुलिस की कॉन्स्टेबल प्रियंका शेखावत का यह वीडियो सामने आया है जिसमें वे परिवार के साथ हाईवे पर म्यूजिक सिस्टम रख डांस कर रही हैं।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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तीन विधायकों का फंड सीज कर दिया गया है। हालांकि टेंडर में कमीशनखोरी राजनीति में हैरान करने वाली बात नहीं। इस पर नागौर सांसद ने खूब तंज कसे। बीकानेर में विधायकजी को बैठने के लिए सीट नहीं मिली तो पत्रकारों पर भड़ास निकाल दी। एक लेडी कॉन्स्टेबल का डांस वीडियो खूब घूम रहा है। मैडम हाईवे पर म्यूजिक सिस्टम लगाकर नाच रही हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. ‘जनता को क्रांति करनी पड़ेगी..’
वे ईमानदार थे। इसलिए राजनीति में नहीं चल सके। बाबूगिरी से रिटायर होकर पान की दुकान पर बैठने लगे। वहीं पत्रकार से भेंट हो गई। राजनीति की बातें चल पड़ीं।
वे मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह बोले- जिन विधायकों को विधायकी का लंबा अनुभव नहीं होता, वे चपेट में आ ही जाते हैं। टेंडर में कमीशनखोरी कौन सी नई बात है?
विधायक सत्ता पक्ष का हो, विरोधी पक्ष का हो या फिर निर्दलीय हो, कमीशन नहीं खाएगा तो पता कैसे चलेगा कि काम हो रहा है? वह नहीं खाएगा तो अधिकारी खा जाएंगे।
विकास चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए। इसलिए विकास की मलाई का विभाजन भी चरणबद्ध ही होता है। यही रीत है। बजट का 30 फीसदी जनता के लिए छोड़ दिया जाता है, क्या यह कम है?
चपेट में आए एक विधायक उनसे ईमानदारी के गुर सीखने आते थे। उन्हीं को फोन लगाया। ज्ञान दिया- कोई बात नहीं। आरोप लगते रहते हैं। कैमरे में कैद हो गए तो भी कोई बात नहीं। पत्रकारों को बुलाकर कह दो कि मेरे खिलाफ षड्यंत्र है। सब झूठ है। फर्जी है। ईमानदारी की कसम।
फोन कटने के बाद उन्होंने कराह के स्वर में कहा- यह लंबे अनुभव की शुरुआत है। विधायक धीरे-धीरे सब सीख जाते हैं। आगे से ध्यान रखेंगे। चपेट में आना जरूरी है।
कुछ दिन सुर्खियों में रहेंगे वह भी अच्छा है। बदनाम होने से भी नाम ही होता है। फिर वे पान चबाने लगे। पत्रकार समझ गया कि चर्चा का समय समाप्त हो चुका है।
पत्रकार सांसद महोदय के दफ्तर जा पहुंचा। सांसद जी से विकास को लेकर सवाल किया। सांसद ने कहा-2 साल में यही विकास हुआ है। जनता को जागना होगा। जनता को क्रांति करनी होगी। जनता को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। मैं अकेला कहां तक भागता फिरूं।
नागौर सांसद ने सरकार के दो साल पर कहा कि तीन विधायकों का भ्रष्टाचार सामने आ गया। दो साल में यह हुआ है।
2. सांप निकलने के बाद लीक पीटने में कोई कसर नहीं
शेखावाटी ‘धुरंधर का ल्यारी’ बनता जा रहा है। आमने-सामने गैंगवार हो रही है। बदमाश ठगी-तस्करी के रास्ते पर चलकर बड़ा धंधा जमा चुके हैं। जमीनों का कारोबार करने लगे हैं। पुलिस को भनक ही नहीं।
हाल में दो गैंग खेतों में आमने सामने हो गईं। दोनों तरफ का एक-एक आदमी मारा गया। हिस्ट्रीशीटर ने बेल्ट से एक पकड़े हुए बदमाश को पीटा। वीडियो सोशल मीडिया पर भी आ गए।
अब पुलिस हिस्ट्रीशीटर की तलाश में निकाली। किसी ने पुलिस को गुप्त सूचना दी कि हो न हो, इस वारदात के बाद हिस्ट्रीशीटर अपने घर की छत पर गुनगुनी धूप में बैठकर गर्म दूध के साथ बाजरे की राबड़ी खा रहा होगा।
पुलिस दल-बल के साथ निकल पड़ा। सात-आठ गाड़ियों का काफिला निकला। दक्षिण भारतीय सिनेमा की तरह सभी गाड़ियां कच्ची सड़क पर धूल उड़ाते हुए कतार में पहुंचीं। हिस्ट्रीशीटर के बाड़े के दरवाजे के पास ही ब्रेक लगे।
पुलिसकर्मी दनदनाते हुए घर में दाखिल हो गए। मौके के चारों तरफ घेर लिया गया। दालान, चबूतरा, नोहरा, खेत, बैडरूम, गुसलखाना, छत, बाड़ा कुछ नहीं छोड़ा। चारे तक में जेली घुसा-घुसाकर हिस्ट्रीशीटर को तलाशा गया।
बेड के बॉक्स खोलकर डिब्बा-डिबली हटा-हटाकर हिस्ट्रीशीटर की खोज हुई। इतनी मेहनत के बाद भी हिस्ट्रीशीटर हाथ नहीं लगा। दबिश में कोई कमी नहीं। कागजी कार्रवाई पूरी की गई। कुछ दिन मामला गर्म रहेगा।
झुंझुनूं में हिस्ट्रीशीटर रविंद्र कटेवा की तलाश में पुलिस दबिश पर दबिश मार रही है।
3. ‘पत्रकार हो तो कुछ भी बोलोगे..?’
वहां सरकार के 2 साल के कामकाज गिनाए जा रहे थे। जिन्होंने विकास कार्यों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी उन्होंने पीछे घूमकर यह भी नहीं देखा कि विधायक जी के लिए कुर्सी का इंतजाम नहीं हुआ।
विधायक जी ‘स्टैंड बाई मोड’ पर रहे। प्रेस ब्रीफिंग शुरू हो गई। पूर्व विधायक तक कुर्सी पर बैठी थीं। कलेक्टर साहिबा के पास भी कुर्सी थी। विधायक जी को बुरा तो लगा होगा लेकिन कभी कभी खड़े रहने में भी शान है।
विधायक जी ने मन में सोचा- पत्रकार समूह मन ही मन गुणगान कर रहा होगा। क्या विधायक हैं। बैठते ही नहीं। अलर्ट रहते हैं। न जाने कब कौन सा काम निकल आए और वे खड़े-खड़े ही चल पड़ें। उन्होंने मन ही मन खुद को प्रणाम किया।
लेकिन पत्रकार, जैसा विधायक जी सोच रहे थे, उसके बिल्कुल उलट बर्ताव करने लगे। बॉर्डर पर सिपाही जैसे खड़े विधायक महोदय पर ही सवाल दाग दिया कि क्षेत्र में घूमते नहीं। कई काम पेंडिंग पड़े हैं।
एक तो सीट नहीं मिली, दूसरे, खड़े रहने का भी कोई फायदा नहीं हुआ, विधायक जी फट पड़े- कहां काम बाकी है। बताओ, दिखाओ। चलो मेरे साथ। पत्रकार हो इसका ये मतलब तो नहीं कि जैसा मन आएगा वैसा बोलोगे।
बीकानेर में हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर की मौजूदगी में विधायक जेठानंद व्यास पत्रकारों पर भड़क गए।
4. चलते-चलते..
‘पुलिसवाले भी इंसान हैं। उन्हें भी नाचने का अधिकार है। और फिर मैडम ऑन ड्यूटी थोड़े ही हैं जो इतना हंगामा मचा है।’
राजस्थान पुलिस की लेडी कॉन्स्टेबल का हाईवे पर डांस का वीडियो आने के बाद उन यूजर्स के बीच जंग छिड़ी थी, जिन्हें फुरसत में ऑनलाइन बहस का शौक रहा है।
इनमें से कई ऐसे हैं जो वकील बनना चाहते थे लेकिन सही समय पर सही निर्णय नहीं लेने के कारण एलएलबी में एडमिशन नहीं ले पाए थे और वर्तमान में परचून की दुकान पर बैठे थे।
उक्त तर्क ऐसे ही किसी महारथी ने दिया था। आगे उसने ‘टारगेटेड’ यूजर को लक्ष्य करते हुए प्राण-भेदी कमेंट किया-रात दिन तुम्हारी सुरक्षा में तैनात पुलिस दो पल भी आनंद के गुजार ले तो तुम्हारी जान सुलगने लगती है।
ट्रैक्टर में से सब्जी के कट्टे उतार कर जस्ट फ्री हुए ‘टारगेडेट यूजर’ ने फोन संभाला और कमेंट पढ़े। उसका पारा हाई हो गया। उसने गाजर की बोरी से पीठ टिकाई और कमेंट में जाकर जवाब दिया- सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है।
गलियों में घुसकर चालान काटे जा रहे हैं। पुलिस ऑन ड्यूटी भी पुलिस और ऑफ ड्यूटी भी पुलिस है। डांस करना है घर में करो। अगर हाईवे पर पुलिस का ऑफ ड्यूटी डांस करना जायज है तो सड़क पर ट्रक खड़ा कर चारपाई पर लेटने वाला ड्राइवर भी जायज है और रोड पर ठेला लगाकर भुट्टे बेचने वाला भी जायज है।
टारगेटेड यूजर आत्म मुग्ध था। उसे लगा कि उसने जॉली एलएलबी को भरे कोर्ट में पटखनी दे दी है। अब वीडियो के कमेंट बॉक्स में कोई भी उससे टकराने की जुर्रत नहीं करेगा।
राजस्थान पुलिस की कॉन्स्टेबल प्रियंका शेखावत का यह वीडियो सामने आया है जिसमें वे परिवार के साथ हाईवे पर म्यूजिक सिस्टम रख डांस कर रही हैं।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
