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‘लखनऊ में स्वच्छ भारत की गाइडलाइन का पालन कराया’: IAS इंद्रजीत बोले- खुद पढ़ता, अधिकारियों को पढ़ाता रहा – Lucknow News

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‘लखनऊ में स्वच्छ भारत की गाइडलाइन का पालन कराया’:  IAS इंद्रजीत बोले- खुद पढ़ता, अधिकारियों को पढ़ाता रहा – Lucknow News

‘लखनऊ में स्वच्छ भारत की गाइडलाइन का पालन कराया’: IAS इंद्रजीत बोले- खुद पढ़ता, अधिकारियों को पढ़ाता रहा – Lucknow News

‘पहले खुद ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की गाइडलाइन पढ़ता था। इसके बाद पूरी टीम को पढ़ाता था। प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी टीम ने काम किया। हमारी टीम शानदार थी। सभी के साझे काम से लखनऊ देश का तीसरा और प्रदेश का पहला स्वच्छ शहर बना।’

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यह कहना है लखनऊ के पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह का। वह 27 जून 2022 से 24 अप्रैल 2025 तक लखनऊ नगर आयुक्त रहे। उनके कार्यकाल में लखनऊ को यह उपलब्धि मिली। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) ने डायरेक्टर हैं। दैनिक भास्कर ने इंद्रजीत सिंह से बातचीत की।

उन्होंने लखनऊ के स्वच्छ शहर बनने में रोड़ा बने कूड़े के पहाड़ और रोजाना निकलने वाले कचरे को कैसे निस्तारित किया, सड़कें कैसे साफ बनीं, भविष्य को लेकर कौन-कौन सी योजनाएं बनाईं समेत अन्य सवालों के खुलकर जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

पहले 3 तस्वीरें देखिए…

स्वच्छ भारत मिशन के प्रोटोकॉल को IAS इंद्रजीत सिंह नगर निगम के अधिकारियों के साथ साझा करते थे। (फाइल फोटो)

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लखनऊ के टॉप-3 में आने पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने शहर को सम्मानित किया। इस दौरान शहर को रिप्रजेंट करने के लिए नगर विकास मंत्री एके शर्मा, मेयर सुषमा खर्कवाल और IAS इंद्रजीत सिंह मौजूद रहे। (फाइल फोटो)

शहर की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए IAS इंद्रजीत सिंह फील्ड पर पहुंचते रहते थे। (फाइल फोटो)

अब पढ़िए सवाल-जवाब…

सवाल : लखनऊ को स्वच्छ और सुंदर बनाने का पूरा विजन कैसे तैयार किया ?

जवाब : स्वच्छ सर्वेक्षण में भारत सरकार की गाइडलाइन है। उसको हमने 2022 से पूरा देखा। रिव्यू किया। इसके पहले भी इस पर बहुत काम हुआ था। हम 12वीं रैंक और 17वीं रैंक पर भी रह चुके हैं। हमने पूरी गाइडलाइन फॉलो की। हमने सबसे पहला काम लीगेसी वेस्ट यानी पुराने कूड़े पर किया।

हमारे पास 24 लाख मैट्रिक टन पुराना कूड़ा था। इसको हमने खत्म किया। यह शिवरी और घैला में था। घैला में मियां बाकी फॉरेस्ट और प्रेरणा स्थल बनाया गया। शिवरी में जो नया प्लांट लगाया गया, वहां 2000 से 2400 मीट्रिक टन कूड़े को प्रोसेस करना शुरू किया।

वेट प्रोसेसिंग प्लांट लगाया। हार्टिकल्चर वेस्ट के लिए अलग से काम किया गया। मेटेलिक वेस्ट के लिए हमने काम किया। इसमें वेस्ट टू वंडर पार्क बनाए। शहर के सभी पार्कों में सीवर के पानी को हमने यूज किया। गाड़ियों को इलेक्ट्रिक कर दिया गया। डोर टू डोर कलेक्शन की 1400 नई गाड़ी लगाई गई।

रोड स्वीपिंग की 135 नई ईवी गाड़ियां लगाईं। रोड स्वीपिंग के कर्मचारियों के वेलफेयर के लिए काम किया। स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई। ये मेजर स्टेप था। सिटिजन पार्टिसिपेशन पर हमने काम किया। आरोग्य वाटिका, हर घर हरियाली और एक पेड़ मां के नाम; सिटिजन पार्टिसिपेशन के लिए काम किया गया।

जागरूकता के लिए पूरे साल काम हुआ। इसमें प्राइवेट सेक्टर, एक्सपर्ट और सोशल मीडिया की टीम ने भी काम किया है। इसके साथ ही अलग-अलग प्रजेंटेशन पर भी हमने काम किया।

सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को IAS इंद्रजीत सिंह ट्रेनिंग देते रहते थे। तस्वीर में तत्कालीन अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और जीएम जलकल कुलदीप सिंह हैं। (फाइल फोटो)

सवाल : शिवरी प्लांट के सफल संचालन ने स्वच्छ लखनऊ की तस्वीर बदली? इस पर क्या प्रमुख काम हुआ ?

जवाब : कूड़ा निस्तारण प्लांट रन करना सिटी के लिए चैलेंज रहा। 2010 में प्लांट बना। इसके बाद यह चला नहीं, लेकिन डंपिंग शुरू हो गई। सबसे पहले हमने यहां आने वाले कूड़े की छंटनी करके मैकेनिकल निस्तारण करना शुरू किया। इसमें से निकलने वाला आरडीएफ हम सीमेंट फैक्ट्री में भेजने लगे।

नगर निगम की सैनेटरी लैंड फिल साइट भी है। इसमें भी कूड़े का निस्तारण शुरू किया गया। शहर में दो ट्रक नारियल के छिलके निकलते हैं। नारियल के छिलकों से रस्सी बनाने का काम शुरू किया। इसके साथ ही पैलेट्स भी बनाने लगे। उसे फायरिंग के लिए पेपर मिल और सीमेंट फैक्ट्री में भेजने लगे। अब वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और बॉयो सीबीजी के प्लांट भी लगाए जाने हैं। मंडियों के साथ में कोलाबरेशन भी होना है।

सवाल : स्वच्छ भारत के रिपोर्ट कार्ड में गारबेज सेग्रेशन और पब्लिक टॉयलेट में उतने अंक नहीं मिले, जितने अन्य में मिले। इसे कैसे देखते हैं?

जवाब : पब्लिक टॉयलेट में हमने 13 टॉयलेट बनाए थे। अभी शहर में कई टॉयलेट बढ़ाने की जरूरत है। कई के लोकेशन बदलने की जरूरत है। शहर बड़ा हो रहा है। यह गैप देखने को मिला है। कूड़े का सेग्रेशन लगातार जारी रखने की जरूरत है। इस तरह के जो कुछ प्वाइंट रह गए हैं, जिनमें अहमदाबाद और भोपाल आगे गए हैं। इन चीजों को आइडेंटिफाई किया गया है। नगर निगम के अधिकारी अब इन चीजों को आगे लेकर जाएंगे।

सवाल : इंदौर सेनिटेशन में लगातार अच्छा कर रहा है, उसे लखनऊ में कैसे आगे बढ़ाया जाए ?

जवाब : इंदौर सहित इन शहरों में स्वच्छता प्राइड का रूप ले चुकी है। यह आम जनता के साथ में कर्मचारियों तक में है। पब्लिक पार्टिशिपेशन इन शहरों में कमाल का है। एमआरएफ सेंटर इन शहरों में बहुत बड़े हैं। बॉयो सीबीजी प्लांट से बड़े स्तर पर म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट से कंप्रेस्ड बॉयो गैस बनाते हैं।

सवाल : नगर निगम में किए काम को मिस कर रहे हैं ?

जवाब : नगर निगम में दो महीने कम तीन साल तक हमने काम किया। इसमें पूरी टीम ने साथ में काम किया। मैं, यह मूवमेंट चेरिस कर रहा हूं। अभी रिनुअलेबल एनर्जी में काम मिला है। यह काम कर रहा हूं। हम लोगों की टीम फार्मेशन बहुत अच्छी हो गई है।

हमारे 12 हजार सफाई कर्मचारियों के वेलफेयर का काम अच्छा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मेयर सुषमा खर्कवाल का विशेष रोल रहा। उनके मार्गदर्शन में हमने काम किया। सभी के सहयोग से लखनऊ को स्वच्छता में नंबर एक बनाना है।

सवाल : राष्ट्रपति से अवॉर्ड मिलने के बाद क्या कोई बात हुई?

जवाब : दिल्ली में इंदौर और अहमदाबाद सिटी के कुछ एक्सपर्ट से बातचीत हुई। कुछ सिटी वर्ल्ड लेवल पर इसमें अच्छा कर रही हैं। अभी वेस्ट टू एनर्जी प्लांट है, जो 6वीं जेनरेशन का सॉल्यूशन है। यह बिजली आपूर्ति करेगा। लागत भी कम होगी। कंप्रेस्ड बॉयो गैस प्लांट में हम बदल सकते हैं।

छोटे से बड़े प्लांट लगा सकते हैं। मंडी के लिए अलग से प्लांट लगा सकते हैं। बल्क के लिए अलग से प्लांट लगा सकते हैं। इस तरह की प्रैक्टिस करते हुए हम अच्छा कर सकते हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण में अब यह भी आ गया है कि ईच सिटी विल एडॉप्ट वन मोर सिटी। इसमें हमें लखनऊ की नगर पालिकाओं को एडॉप्ट करते हुए उसे आगे बढ़ाना है।

सवाल : स्वच्छता पर लखनऊ की जनता से क्या कहना चाहेंगे ?

जवाब : स्वच्छता हर सिटिजन की ड्यूटी है। यह हमारे लिए घर से स्टार्ट होती है। यह हमारे कल्चर में है हम इसे रिसाइकल होती है। घर में हर चीज का रीयूज होता है। कपड़े से लेकर रसाई से निकलने वाले कचरे तक का।

हमें स्वच्छता को घर से करने की जरूरत है। किचन का कूड़ा हम बाहर न फेंके। घर में ही इसे गमले में डालकर खाद बनाएं। सभी की सहभागिता से लखनऊ स्वच्छ-सुंदर और स्वस्थ शहर बनेगा।

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