राजमंदिर में 50 साल का सेलिब्रेशन: 5-फिल्में फ्री देखेंगे दर्शक: डेढ़ साल तक चली मूवी भी दिखाएंगे; राजकपूर ने कहा था- दुनिया को यहां देखना चाहिए फिल्में – Jaipur News

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राजमंदिर में 50 साल का सेलिब्रेशन: 5-फिल्में फ्री देखेंगे दर्शक:  डेढ़ साल तक चली मूवी भी दिखाएंगे; राजकपूर ने कहा था- दुनिया को यहां देखना चाहिए फिल्में – Jaipur News

राजमंदिर में 50 साल का सेलिब्रेशन: 5-फिल्में फ्री देखेंगे दर्शक: डेढ़ साल तक चली मूवी भी दिखाएंगे; राजकपूर ने कहा था- दुनिया को यहां देखना चाहिए फिल्में – Jaipur News


एशिया के सबसे प्रतिष्ठित सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में शामिल जयपुर का राजमंदिर सिनेमा हॉल अपनी गोल्डन जुबली मनाएगा। एक जून को 50 वर्ष पूरे होने पर 5 फिल्में दर्शकों को फ्री दिखाई जाएंगी। इनमें 2 फिल्में एक साल और डेढ़ साल तक चली थी। अपनी वास्तुकला, शानदार माहौल और सिनेमा देखने के अलग अनुभव के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाला राजमंदिर इस सेलिब्रेशन को खास अंदाज में मनाएगा। राजमंदिर सिनेमा के मालिक सौरभ सुराणा ने बताया- इस सिनेमा हॉल की शुरुआत वर्ष 1976 में हुई थी। 50 साल पूरे होना जयपुर और सिनेमा प्रेमियों के प्यार का परिणाम है। राजमंदिर की ओर से एक जून को दर्शकों को मुफ्त में फिल्में दिखाई जाएंगी। उन्होंने बताया- दर्शकों को टिकट बुकमायशो और राजमंदिर के बॉक्स ऑफिस विंडो से बुक करनी होगी। सौरभ सुराणा ने कहा- राजमंदिर को लोगों ने 50 वर्षों तक बहुत प्यार और समर्थन दिया है। हमने सोचा कि इस बार शहरवासियों को हमारी ओर से प्यार का एक छोटा सा तोहफा दिया जाए। सुराणा ने कहा- राज कपूर जब राजमंदिर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि दुनिया को सीखना चाहिए कि फिल्म को प्रदर्शित कैसे किया जाता है। दिखाई जाएंगी ये 5 क्लासिक फिल्में गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के तहत राजमंदिर में उन फिल्मों को दिखाया जाएगा, जिन्होंने सिनेमा प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है। इन फिल्मों में ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ और क्लासिक फिल्म ‘चुपके-चुपके’ शामिल हैं। सौरभ सुराणा ने बताया- फिल्मों का चयन परिवारों को ध्यान में रखकर किया गया है। खासतौर पर “हम आपके हैं कौन” फिल्म राजमंदिर में करीब डेढ़ साल तक चली थी। वहीं “राम तेरी गंगा मैली” इस सिनेमाघर में 52 सप्ताह तक चली थी। पहले देखें राजमंदिर सिनेमाहॉल की PHOTOS वास्तुकला के कारण अलग पहचान इस सिनेमा हॉल की वास्तुकला और डिजाइन दर्शकों को लुभाती है। राजमंदिर को आर्ट डेको स्टाइल में तैयार किया गया था। यहां की लकड़ी की नक्काशी, पीओपी डिजाइन, झूमर, विशेष लाइटिंग और अंदरूनी सजावट आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। दुनियाभर के पर्यटकों की पहली पसंद सौरभ सुराणा ने खास किस्सा शेयर करते हुए बताया- जब हिंदी सिनेमा के दिग्गज राज कपूर राजमंदिर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि दुनिया को सीखना चाहिए कि फिल्म को प्रदर्शित कैसे किया जाता है। उन्होंने कहा- कोविड महामारी के दौरान जब नई फिल्में रिलीज नहीं हो रही थीं, तब राजमंदिर ने पुरानी लोकप्रिय फिल्मों के जरिए दर्शकों को सिनेमा से जोड़े रखा। उस समय राजमंदिर में साउंड सिस्टम बदला गया। सीटिंग अरेंजमेंट को बेहतर बनाया गया और दर्शकों के आराम को प्राथमिकता दी गई। लोग यहां फिल्में नहीं, राजमंदिर देखने आते हैं राजमंदिर के जनरल मैनेजर अशोक तंवर 50 साल से इस सिनेमाघर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पुराने दौर की कई यादें साझा कीं। उन्होंने बताया- पहले के समय में सिनेमा हॉल चलाना आसान नहीं था। टिकट के लिए लंबी कतारें लगती थीं। वहीं टिकट के लिए बडे़ लोगों के लगातार फोन आते थे। उन्होंने कहा- जयपुर के कई सिनेमाघर बंद हो गए, लेकिन राजमंदिर आज भी चल रहा है, क्योंकि लोग यहां सिर्फ फिल्म देखने नहीं, बल्कि राजमंदिर देखने आते हैं। टिकट नहीं मिलने पर बडे़ अधिकारी बनने का लिया था फैसला अशोक तंवर ने दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया- हरेंद्र कुमार महावर टोंक से फिल्म देखने आए थे, लेकिन लंबी लाइन के कारण उन्हें टिकट नहीं मिल सका। उस व्यक्ति ने उसी दिन फैसला किया कि वह बड़ा अधिकारी बनेगा। बाद में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और IPS अधिकारी बने। वर्षों बाद जब उनकी जयपुर में पोस्टिंग हुई तो उन्होंने मुझे बुलाकर यह किस्सा बताया। आज वे कोटा में आईजी पद पर हैं। शुरू करने की कलेक्टर ने नहीं दी थी परमिशन अशोक तंवर ने कहा- राजमंदिर की परिकल्पना मेहताब चंद गोलछा की थी। जब यह बन रहा था, तब जेवियर्स स्कूल ने कोर्ट में केस कर दिया था कि सिनेमाघर के बनने से स्टूडेंट्स बिगड़ जाएंगे। कई साल केस चला। इसके बाद मेहताब चंद गोलछा ने सुराणा परिवार को इसे बेच दिया। केस जीतने के बाद इसे सुराणा परिवार ने चलाया। जब इसकी शुरुआत होनी थी, तब इसे कलेक्टर की ओर से परमिशन नहीं दी गई। लंबे समय तक यह मामला अटका रहा, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री हरदेव जोशी से बात की गई और उन्होंने ही इसका लाइसेंस दिलवाया और इसकी शुरुआत की। तंवर ने कहा- यह सिनेमाघर आसानी से शुरू नहीं हुआ। लगभग 15 साल तक अधर-झूल में रहा। इसके आर्किटेक्चर को डब्ल्यू.एम. नामजोशी ने तैयार किया था। वे मुम्बई के थे और वहां से कारीगर लेकर आए थे। आज भी उनकी लगी एक-एक चीज का सही तरीके से रखा गया है। खुश होकर राजकपूर देना चाहते थे इनाम 50 साल से राजमंदिर में फिल्म प्रोजेक्शन का काम देख रहे चीफ प्रोजेक्शन कैलाश शर्मा ने बताया- यहां पहली फिल्म ‘चरस’ लगी थी। लंबी-लंबी लाइनें यहां लगती थी। मैंने रील से जो भी फिल्म चलाई हैं, कभी खराब नहीं की। एक बार एक्टर राज कपूर साहब यहां अपनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ देखने आए थे। देखने के बाद उन्होंने चीफ टेक्निशियन को बुलाया। मैं डरते हुए गया कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो गई। तब उन्होंने पूछा कि यह जो प्रिंट चलाया है, यह बहुत सुंदर है, बिल्कुल ताजा है क्या। मैंने कहा कि सर दो हफ्ते से चला रहा हूं। तब उन्होंने कहा- तुमने कमाल कर दिया। मैं मुम्बई जाउंगा तो तुम्हारे लिए इनाम भेजूंगा। हालांकि इसके बाद उनकी डेथ हो गई थी।

राजमंदिर सिनेमा ने इन फिल्मों ने बनाया रिकॉर्ड

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