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रमजान में रोजाना 5 हजार रोजेदारों को इफ्तार: लखनऊ के 186 साल पुराने शाही किचन की स्टोरी; मोहर्रम में भी 10 दिन सेवा – Lucknow News

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रमजान में रोजाना 5 हजार रोजेदारों को इफ्तार:  लखनऊ के 186 साल पुराने शाही किचन की स्टोरी; मोहर्रम में भी 10 दिन सेवा – Lucknow News

रमजान में रोजाना 5 हजार रोजेदारों को इफ्तार: लखनऊ के 186 साल पुराने शाही किचन की स्टोरी; मोहर्रम में भी 10 दिन सेवा – Lucknow News

लखनऊ में जरूरतमंद रोजेदार भी शाही इफ्तार करते हैं। उन्हें रोजा खोलने के लिए कोई साधन जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे रोजेदारों के लिए छोटा इमामबाड़ा में शाही किचन चलता है। दशकों से चल रहे इस शाही किचन से 5 हजार लोगों को इफ्तारी मिलती है।

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शाही किचन को हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से चलाया जाता है। किचन के इंचार्ज मुर्तजा हुसैन ने बताया कि गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के लिए इफ्तारी बनती है। ऐसे लोगों को रमजान शुरू होने से पहले हुसैनाबाद ट्रस्ट में अपना नाम लिखवाना पड़ता है। आइए जानते हैं लखनऊ के इस 186 साल पुराने किचन की स्टोरी…

पहले पढ़िए उन्हें जो इस किचन को चलाते हैं, मेहनत करते हैं और यहां इफ्तारी करते हैं…

अब पढ़िए कि क्या-क्या बनाया जाता है…

मुर्तजा बताते हैं- किचन में आलू की सब्जी और दाल देसी घी में पकाई जाती है। वेज खाना होने के कारण रोजेदारों के अलावा अन्य लोग भी इसे खा सकते हैं। हुसैनाबाद ट्रस्ट में नाम लिखा चुके 2 हजार लोगों को रोजाना पर्ची के जरिए इफ्तार दिया जाता जाता है। इनके इफ्तार में 2 रोटियों के साथ दाल या सब्जी होती है।

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इसके अलावा हुसैनाबाद ट्रस्ट के अंतर्गत चलने वाली शहर की 18 मस्जिदों में 3 हजार लोगों का इफ्तार जाता है। मस्जिदों में जो इफ्तार भेजा जाता है उसमें 10 प्रकार के आइटम्स होते हैं। इसमें केला, केक, ब्रेड-मक्खन, पकौड़ी समेत कई पकवान शामिल रहते हैं।

शाही किचन में जरूरतमंद लोगों को इफ्तार दिया जाता है। इसमें रोटी के साथ दाल या सब्जी दी जाती है। दाल-सब्जी मिट्‌टी के पात्र में परोसते हैं।

दो साल छोटा इमामबाड़ा बना उसके बाद किचन

नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने बताया कि अवध के तीसरे ताजदार बादशाह मोहम्मद अली ने 1837 में छोटा इमामबाड़ा का निर्माण शुरू करवाया जो 1838 में पूरा हुआ। उसके बाद 1839 से शाही जुलूस और शाही किचन की शुरुआत कर दी गई।

मोहम्मद अली ने हुसैनाबाद मुबारक के नाम से ट्रस्ट स्थापित किया। उसके बाद शाही किचन में पर्ची के माध्यम से लोगों को इफ्तारी दी जाने लगी। इसमें सभी धर्म और समुदाय के लोग आते हैं। किसी के लिए कोई रोकटोक नहीं है।

तीन तस्वीरों में देखिए शाही किचन में इफ्तार बनने से लेकर बांटने तक क्या-क्या होता है…

शाही किचन में इफ्तारी लेने के पहुंचे लोगों के पर्चे देखे जाते हैं। इसके बाद उन्हें अंदर जाने दिया जाता है।

शाही किचन के अंदर हुसैनाबाद ट्रस्ट के कर्मचारी लोगों की पर्ची के आधार पर इफ्तारी देते हैं। एक पर्ची पर दो रोटियों के साथ दाल या सब्जी मिलती है।

छोटा इमामबाड़ा में दशकों पुराना शाही किचन है। इसमें रोजेदारों के लिए इफ्तारी तैयार की जाती है। हुसैनाबाद ट्रस्ट से जुड़ी 18 मस्जिदों की इफ्तारी में ज्यादा आइटम होते हैं।

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