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यूपी के सहकारी बैंक कर्मचारियों की पहली संवाद बैठक: EPF को लेकर बड़ी मांग, 11 मुद्दों पर CM को देंगे ज्ञापन; 15 दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन – Lucknow News

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यूपी के सहकारी बैंक कर्मचारियों की पहली संवाद बैठक:  EPF को लेकर बड़ी मांग, 11 मुद्दों पर CM को देंगे ज्ञापन; 15 दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन – Lucknow News

यूपी के सहकारी बैंक कर्मचारियों की पहली संवाद बैठक: EPF को लेकर बड़ी मांग, 11 मुद्दों पर CM को देंगे ज्ञापन; 15 दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन – Lucknow News

लखनऊ16 मिनट पहले

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लखनऊ में कोऑपरेटिव बैंक वर्कर्स यूनियन उत्तर प्रदेश द्वारा पहली बार ‘कर्मचारी संवाद और परिचर्चा बैठक’ का आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक बैठक डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन के सभागार में संपन्न हुई, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में सहकारी बैंक कर्मचारियों ने भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता संगठन अध्यक्ष विशाल त्रिवेदी ने की और मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व वरिष्ठ सहकारी नेता एस.एन मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश संगठन मंत्री नरेश द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री शिशिर शर्मा, उपमहामंत्री रौनिक भारद्वाज और दीवान सिंह कुंतल ने कर्मचारियों की विभिन्न समस्याएं विस्तार से रखीं।

समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन होगा

बैठक में निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों की 11 प्रमुख समस्याओं पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि 15 दिनों में समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। अंत में पहलगाम हमले के शहीदों और आगरा यूनिट अध्यक्ष स्व. विनोद सागर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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भविष्य निधि एक समान रूप से ईपीएफओ में जमा की जाए

इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री शिशिर शर्मा ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य के सहकारी बैंकों के कर्मचारियों की भविष्य निधि एक समान रूप से ईपीएफओ (EPFO) में जमा की जाए। इससे कर्मचारियों को अधिक ब्याज, पेंशन और बीमा का लाभ मिल सकेगा। वर्तमान में यह निधि विभिन्न संस्थानों में जमा हो रही है, जिससे कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच नियुक्त कर्मचारियों को अब तक सीसी लिमिट, वेतनवृद्धि और पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है। इस कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संगठन ने इस पर ठोस कार्रवाई करने का संकल्प लिया।

कर्मचारियों की संख्या में कमी को देखते हुए रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग की गई। साथ ही, ‘एक काम, एक दाम’ नीति लागू कर सभी कर्मचारियों को समान वेतनमान देने की भी वकालत की गई।

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