यूनिपोल का ‘जाल’: शास्त्री ब्रिज पर ही 12 होर्डिंग, कितने वैध-अवैध निगम को पता नहीं – Indore News h3>
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- There Are 12 Hoardings On Shastri Bridge Alone, But The Corporation Doesn’t Know How Many Are Legal Or Illegal.
इंदौर10 मिनट पहले
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शहर में यूनिपोल और होर्डिंग्स का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शास्त्री ब्रिज पर ही 10-12 बड़े होर्डिंग्स लगे हुए हैं। सबसे खास बात यह है कि शहर में कितने वैध और किसने अवैध होर्डिंग्स हैं, इसके बारे में निगम को ही नहीं पता है।
कोर्ट की फटकार के बाद सर्वे का काम शुरू तो हुआ, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसी बीच स्मार्ट सिटी कंपनी ने भी एलईडी स्क्रीन लगाई है, जिस पर विज्ञापन दिखता है। बताया जा रहा है कि इसके टेंडर की भी समय सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है। इधर, शहर में 5-6 हजार एलईडी स्क्रीन और लगाने की तैयारी है। वहीं हवा-आंधी में हमेश यूनिपोल गिरने की आशंका बनी रहती है। इसकी भी कोई तैयारी नहीं है।
शहर में कहीं छोटे तो कहीं बड़े यूनिपोल खड़े हो चुके हैं, लेकिन निगम का मार्केट विभाग इस पर कोई ठोस निगरानी नहीं कर रहा। जेंट्री गेट अब नेताओं के प्रचार का माध्यम बन चुके हैं। कुछ साल पहले शहर की सुंदरता के नाम पर होर्डिंग्स हटाए गए थे, लेकिन अब फिर से डिवाइडर, साइकिल स्टैंड और चार्जिंग स्टेशनों तक बड़े विज्ञापन बोर्ड खड़े हो गए हैं।
पोल और डिवाइडर भी नहीं बचे निगम अब अपने साढ़े छह हजार पोल पर भी एलईडी लगाने की तैयारी में है। इसके लिए चार करोड़ सालाना का ठेका प्रस्तावित है। हाल ही में 10 सड़कों के डिवाइडर पर 300 से ज्यादा ‘लॉलीपॉप’ लगाने का ठेका 1.65 करोड़ में दिया है। अगर डिवाइडर पर भी एलईडी लगती हैं तो वहां चलने की जगह और कम हो जाएगी। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने अवैध होर्डिंग, यूनिपोल और टेंडर घोटाले का आरोप खुद की निगम पर ही लगाया था।
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44 जेंट्री गेट और 3 पुल का ठेका दो साल पहले ही खत्म हो चुका, मुफ्त में विज्ञापन शहर में अब 5 से 6 हजार एलईडी स्क्रीन लगाने की तैयारी है। हद यह है कि खुद एमआईसी ने इसे मंजूरी दी है, जबकि एमआईसी सदस्य शहर में हो रहे विज्ञापन को लेकर विरोध भी दर्ज करवा रहे हैं। नगर निगम के 44 जेंट्री गेट और 3 पैदल पुलों का ठेका दो साल पहले खत्म हो चुका है। इसके बाद से यहां मुफ्त में विज्ञापन हो रहा है। दो बार टेंडर निकाले, लेकिन शर्तें इतनी जटिल और राशि इतनी ज्यादा रखी गई कि कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। अब तीसरा टेंडर जारी किया गया है, जिसमें साढ़े छह करोड़ रुपए की मांग रखी गई है।
नियम अनुसार डिवाइडर और फुटपाथ पर होर्डिंग/विज्ञापन बोर्ड लगाना प्रतिबंधित मप्र नगर निगम अधिनियम तथा मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के अनुसार डिवाइडर और फुटपाथ पर होर्डिंग/विज्ञापन बोर्ड लगाना प्रतिबंधित है, इसके बावजूद शहर के सेंट्रल डिवाइडर, फुटपाथों, ट्रैफकि सिग्नल के पास, ऐतिहासकि धरोहरों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के आसपास अवैध यूनिपोल और होर्डिंग लगाकर विज्ञापन चलाए जा रहे हैं। निगम को इस तरह की शकिायतें भी मिली हैं कि दरें 2019 वाली ही लागू रखी गईं, जिससे चार साल की अवधि में लगभग 16 करोड़ रुपए की राजस्व हानि हुई।
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इंदौर10 मिनट पहले
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शहर में यूनिपोल और होर्डिंग्स का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शास्त्री ब्रिज पर ही 10-12 बड़े होर्डिंग्स लगे हुए हैं। सबसे खास बात यह है कि शहर में कितने वैध और किसने अवैध होर्डिंग्स हैं, इसके बारे में निगम को ही नहीं पता है।
कोर्ट की फटकार के बाद सर्वे का काम शुरू तो हुआ, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसी बीच स्मार्ट सिटी कंपनी ने भी एलईडी स्क्रीन लगाई है, जिस पर विज्ञापन दिखता है। बताया जा रहा है कि इसके टेंडर की भी समय सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है। इधर, शहर में 5-6 हजार एलईडी स्क्रीन और लगाने की तैयारी है। वहीं हवा-आंधी में हमेश यूनिपोल गिरने की आशंका बनी रहती है। इसकी भी कोई तैयारी नहीं है।
शहर में कहीं छोटे तो कहीं बड़े यूनिपोल खड़े हो चुके हैं, लेकिन निगम का मार्केट विभाग इस पर कोई ठोस निगरानी नहीं कर रहा। जेंट्री गेट अब नेताओं के प्रचार का माध्यम बन चुके हैं। कुछ साल पहले शहर की सुंदरता के नाम पर होर्डिंग्स हटाए गए थे, लेकिन अब फिर से डिवाइडर, साइकिल स्टैंड और चार्जिंग स्टेशनों तक बड़े विज्ञापन बोर्ड खड़े हो गए हैं।
पोल और डिवाइडर भी नहीं बचे निगम अब अपने साढ़े छह हजार पोल पर भी एलईडी लगाने की तैयारी में है। इसके लिए चार करोड़ सालाना का ठेका प्रस्तावित है। हाल ही में 10 सड़कों के डिवाइडर पर 300 से ज्यादा ‘लॉलीपॉप’ लगाने का ठेका 1.65 करोड़ में दिया है। अगर डिवाइडर पर भी एलईडी लगती हैं तो वहां चलने की जगह और कम हो जाएगी। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने अवैध होर्डिंग, यूनिपोल और टेंडर घोटाले का आरोप खुद की निगम पर ही लगाया था।
44 जेंट्री गेट और 3 पुल का ठेका दो साल पहले ही खत्म हो चुका, मुफ्त में विज्ञापन शहर में अब 5 से 6 हजार एलईडी स्क्रीन लगाने की तैयारी है। हद यह है कि खुद एमआईसी ने इसे मंजूरी दी है, जबकि एमआईसी सदस्य शहर में हो रहे विज्ञापन को लेकर विरोध भी दर्ज करवा रहे हैं। नगर निगम के 44 जेंट्री गेट और 3 पैदल पुलों का ठेका दो साल पहले खत्म हो चुका है। इसके बाद से यहां मुफ्त में विज्ञापन हो रहा है। दो बार टेंडर निकाले, लेकिन शर्तें इतनी जटिल और राशि इतनी ज्यादा रखी गई कि कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। अब तीसरा टेंडर जारी किया गया है, जिसमें साढ़े छह करोड़ रुपए की मांग रखी गई है।
नियम अनुसार डिवाइडर और फुटपाथ पर होर्डिंग/विज्ञापन बोर्ड लगाना प्रतिबंधित मप्र नगर निगम अधिनियम तथा मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के अनुसार डिवाइडर और फुटपाथ पर होर्डिंग/विज्ञापन बोर्ड लगाना प्रतिबंधित है, इसके बावजूद शहर के सेंट्रल डिवाइडर, फुटपाथों, ट्रैफकि सिग्नल के पास, ऐतिहासकि धरोहरों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के आसपास अवैध यूनिपोल और होर्डिंग लगाकर विज्ञापन चलाए जा रहे हैं। निगम को इस तरह की शकिायतें भी मिली हैं कि दरें 2019 वाली ही लागू रखी गईं, जिससे चार साल की अवधि में लगभग 16 करोड़ रुपए की राजस्व हानि हुई।
