मेडिकल कॉलेज टीचर्स ने अमानक दवाइयों की होली जलाई: बोले- सरकार ने कंपनियों पर एक्शन नहीं लिया, अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन – Khandwa News h3>
खंडवा में मेडिकल कॉलेज के टीचर्स ने अमानक दवाईयों की सप्लाई को लेकर विरोध जताया। प्रतीकात्मक रूप में दवाइयों के पैम्फलेट की होली जलाई। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में नकली दवाइयां बांटी गई। जिन कंपनियों ने इन अमानक दवाईयों की सप्लाई की, उन पर प्
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चिकित्सक महासंघ के बैनर तले मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन खंडवा द्वारा चलाए जा रहे चरणबद्ध आंदोलन के तहत शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में दवा गोदाम के पास प्रतीकात्मक रूप से अमानक दवाइयों की होली जलाई गई। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज के टीचर्स शामिल हुए। इस दौरान डॉ. विनीत गोहिया, डॉ. रणजीत बडौले, डॉ. सुनिल बाजोलिया, डॉ. विशाल अहाके, डॉ. गौरव भानावत, डॉ. दुर्गेश सोनारे आदि मौजूद रहे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विनीत गोहिया ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेशभर में जारी है। प्रदेश के 51 जिला अस्पताल, 68 सिविल अस्पताल, 97 सिविल डिस्पेंसरी, 335 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 1170 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के मेडिकल ऑफिसर्स, 18 चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सा शिक्षक, ईएसआई अस्पतालों के मेडिकल ऑफिसर्स, मेडिको लीगल संस्थानों के विशेषज्ञ, संविदा चिकित्सक और जूनियर डॉक्टर्स ने काली पट्टी बांधकर अमानक दवाइयों का दहन किया।
अमानक दवाईयों की होली जलाई।
डॉक्टर्स की यह मांगे, जिसे लेकर प्रदर्शन
डॉक्टर्स ने इस दौरान एकजुट होकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित उच्च स्तरीय समिति के गठन, कैबिनेट से पारित डीएसीपी और एनपीए का सही क्रियान्वयन, सातवें वेतनमान का लाभ 1 जनवरी 2016 से लागू करने, नेशनल टास्क फोर्स के सुरक्षा निर्देशों के पालन और चिकित्सा क्षेत्र में प्रशासनिक हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग उठाई।
आगे भी जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन
आगामी विरोध कार्यक्रम 22 फरवरी शनिवार को समस्त चिकित्सक सामूहिक उपवास रखेंगे और मास्क पहनकर भोजन अवकाश में दोपहर 12.30 से 1 बजे तक अपने कार्यस्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 24 फरवरी, सोमवार को चिकित्सक एक घंटे (12.30 से 1.30) तक कार्यस्थल के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
यदि मांगे नहीं मानी गईं तो 25 फरवरी, मंगलवार से प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। चिकित्सकों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और अतार्किक नीति निर्धारण के कारण उन्हें आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ा है।
