मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती पर विशेष साहित्यिक गोष्ठी: वर्तमान परिवेश में प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा – Lucknow News h3>
लखनऊ16 मिनट पहले
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हिंदी कथा साहित्य के सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राजधानी में एक विशेष साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अभिव्यक्ति कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नगर के प्रमुख साहित्यकार, रंगकर्मी और कलाकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और समाजसेवी नागेश्वर नाथ उपाध्याय थे। मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। संस्था के अध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डाला।
वरिष्ठ नाट्य लेखक के.के अग्रवाल ने भूमिका प्रस्तुत की
गोष्ठी का विषय ‘वर्तमान सामाजिक परिवेश में मीडिया एवं मंच पर मुंशी प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता’ था। संस्था के सचिव और वरिष्ठ नाट्य लेखक के.के अग्रवाल ने भूमिका प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को मंचित करते समय अक्सर उनकी वर्तमान प्रासंगिकता पर सवाल उठते हैं।
मुख्य वक्ता पोखरिया ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी समाज जातिवाद, शोषण, लिंग भेद और गरीबी से जूझ रहा है। प्रेमचंद का साहित्य इन मुद्दों को बेबाकी से उठाता है। उनका साहित्य आज भी उतना ही सटीक है जितना सौ वर्ष पहले था।
फटे जूते’ वरिष्ठ रंगकर्मी भानु प्रकाश पांडेय द्वारा प्रस्तुत किया गया
कार्यक्रम में हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ वरिष्ठ रंगकर्मी भानु प्रकाश पांडेय द्वारा प्रस्तुत किया गया। के.के. अस्थाना ने ‘प्रेमचंद के फटे जूते – भाग 2’ स्वयं प्रस्तुत किया। दोनों लेखों में प्रेमचंद की सादगी और यथार्थवादी दृष्टिकोण को दिखाया।
मुख्य अतिथि उपाध्याय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य शाश्वत है। यह न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण भारत की भी आत्मा को छूता है और समाज के वंचितों की आवाज बनता है। कार्यक्रम के समापन पर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और ‘अभिव्यक्ति’ संस्था के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
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लखनऊ16 मिनट पहले
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हिंदी कथा साहित्य के सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राजधानी में एक विशेष साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अभिव्यक्ति कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नगर के प्रमुख साहित्यकार, रंगकर्मी और कलाकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और समाजसेवी नागेश्वर नाथ उपाध्याय थे। मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। संस्था के अध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डाला।
वरिष्ठ नाट्य लेखक के.के अग्रवाल ने भूमिका प्रस्तुत की
गोष्ठी का विषय ‘वर्तमान सामाजिक परिवेश में मीडिया एवं मंच पर मुंशी प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता’ था। संस्था के सचिव और वरिष्ठ नाट्य लेखक के.के अग्रवाल ने भूमिका प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को मंचित करते समय अक्सर उनकी वर्तमान प्रासंगिकता पर सवाल उठते हैं।
मुख्य वक्ता पोखरिया ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी समाज जातिवाद, शोषण, लिंग भेद और गरीबी से जूझ रहा है। प्रेमचंद का साहित्य इन मुद्दों को बेबाकी से उठाता है। उनका साहित्य आज भी उतना ही सटीक है जितना सौ वर्ष पहले था।
फटे जूते’ वरिष्ठ रंगकर्मी भानु प्रकाश पांडेय द्वारा प्रस्तुत किया गया
कार्यक्रम में हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ वरिष्ठ रंगकर्मी भानु प्रकाश पांडेय द्वारा प्रस्तुत किया गया। के.के. अस्थाना ने ‘प्रेमचंद के फटे जूते – भाग 2’ स्वयं प्रस्तुत किया। दोनों लेखों में प्रेमचंद की सादगी और यथार्थवादी दृष्टिकोण को दिखाया।
मुख्य अतिथि उपाध्याय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य शाश्वत है। यह न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण भारत की भी आत्मा को छूता है और समाज के वंचितों की आवाज बनता है। कार्यक्रम के समापन पर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और ‘अभिव्यक्ति’ संस्था के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
