मुंबई राजधानी एक्सप्रेस में ब्राह्मण महिला को चिकन परोस दिया: झांसी में हालत बिगड़ी तो रेलकर्मी बोले-कुछ नहीं होगा नींबू पानी पी लो, रातभर हुईं उल्टियां – Jhansi News h3>
मुम्बई राजधानी के B-1 कोच में सफर कर रहीं थीं राजेश्वरी देवी।
झांसी में मुंबई राजधानी एक्सप्रेस में कैटरिंग स्टाफ की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ट्रेन में यात्रा कर रही एक ब्राह्मण महिला यात्री को शाकाहारी खाने की जगह चिकन परोस दिया गया। अनजाने में महिला ने वह खाना खा भी लिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि यह चिक
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उनके बेटे ने इसकी शिकायत की तो झांसी में रेलवे स्टाफ ने उन्हें कहा कि कुछ नहीं होगा नींबू पानी पी लो। अब महिला और उनके बेटे ने इस पूरे मामले में रेलवे से कार्रवाई की मांग की है। घटना सोमवार की है।
मुम्बई राजधानी (22222) के B-1 कोच की 17 नंबर बर्थ पर थीं राजेश्वरी देवी।
अब पूरा मामला समझिए…
मुम्बई की रहने वालीं राजेश्वरी देवी (56) ने मुम्बई जा रही थीं। हजरत निजामुद्दीन-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस राजधानी एक्सप्रेस (22222) से अकेले यात्रा के लिए हजरत निजामुद्दीन से मुम्बई के कल्याण स्टेशन तक की टिकट बुक कराई थी। उन्हें थर्ड एसी के B-1 कोच में बर्थ नंबर 17 (लोअर बर्थ) आवंटित हुई थी।
टिकट बुक करते समय ही उन्होंने खाने के विकल्प में शाकाहारी (वेजिटेरियन) भोजन का चयन किया था। दिल्ली से ट्रेन में सवार होने के बाद वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन से पहले उन्हें रात करीब 9 बजे कैटरिंग स्टाफ ने डिनर परोसा। राजेश्वरी देवी ने खाना खाना शुरू किया। कुछ निवाले खा भी लिए। इसी दौरान उन्हें शक हुआ कि परोसा गया भोजन शाकाहारी नहीं है।
वीडियो साझा कर यात्री राजेश्वरी देवी ने बताई घटना।
इसके बाद उन्होंने आसपास बैठे यात्रियों को खाना दिखाकर पुष्टि कराई तो पता चला कि उन्हें सब्जी की जगह मुर्गे का मांस परोस दिया गया है। यह पता चलते ही वह घबरा गईं। उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टियां होने लगीं। राजेश्वरी देवी ने तुरंत दिल्ली में अपने बेटे शिवम त्रिपाठी को फोन कर घटना की जानकारी दी।
बेटे ने रेलवे हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराते हुए मां को मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। शिवम त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेन जब झांसी जंक्शन पहुंची तो रेलवे के कुछ कर्मचारी ट्रेन में आए। आरोप है कि उन्होंने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कहा कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। नींबू पानी पी लेने की सलाह देकर चले गए।
शिवम का आरोप है कि उनकी मां को लगातार घबराहट और उल्टियां होती रहीं, लेकिन रेलवे स्टाफ ने उचित इलाज या मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने खाना परोसने वाले कैटरिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शिवम त्रिपाठी, पीड़ित महिला के बेटे हैं।
पूरी रात होती रहीं उल्टियां राजेश्वरी देवी के अनुसार, हजरत निजामुद्दीन–छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस राजधानी एक्सप्रेस में नॉनवेज खाने की जानकारी होने के बाद उनकी तबीयत पूरी रात खराब रही और उन्हें बार-बार उल्टियां होती रहीं। उन्होंने दैनिक NEWS4SOCIALको जानकारी देते हुए वीडियो भी साझा किया।
उन्होंने बताया कि झांसी जंक्शन से ट्रेन चलने के बाद भी रात भर कई बार उल्टियां होती रहीं, जिससे वह निढाल हो गईं। सुबह घर पहुंचने के बाद उन्होंने उपवास कर धार्मिक अनुष्ठान भी किया। उन्होंने ये भी बताया कि मेरी हालत के बारे में रेलवे अधिकारी उस समय कोच में मौजूद यात्रियों से भी पूछ सकते हैं।
शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित महिला यात्री राजेश्वरी देवी के बेटे शिवम त्रिपाठी का आरोप है कि उन्होंने रेलवे और IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) से वेज की जगह नॉनवेज खाना परोसने वालों के खिलाफ कार्रवाई और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने सिर्फ औपचारिकता निभाकर मामला रफा-दफा कर दिया।
शिवम का कहना है कि टिकट बुक करते समय ही उन्होंने वेज खाने का विकल्प चुना था। इतना ही नहीं, जब वह अपनी मां को स्टेशन पर ट्रेन में बैठाने पहुंचे थे, तब भी ट्रेन में मौजूद कैटरिंग स्टाफ की नोटबुक में विशेष रूप से दर्ज कराया था कि उनकी मां को सुबह का नाश्ता और भोजन शाकाहारी ही दिया जाए। इसके बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही की गई।
ये है राजधानी एक्सप्रेस का पेंट्रीकार।
IRCTC ने कहा-मामले को दिखवा रहे हैं
इस पूरे मामले में आईआरसीटीसी ने शिकायत मिलने के बाद कहा कि घटना को तत्काल संज्ञान में लिया गया है। आईआरसीटीसी के अनुसार, पूरे मामले को संबंधित अधिकारी के पास जांच और आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी लापरवाही भविष्य में न हो।
ये है रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था
भारतीय रेल में ट्रेनों के अंदर खानपान की व्यवस्था सीधे तौर पर रेलवे नहीं करती। इसके लिए जिम्मेदारी IRCTC के माध्यम से निजी कांट्रैक्टरों को दी जाती है। लंबी दूरी तय करने वाली राजधानी, दूरंतो, सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में पेंट्रीकार (ट्रेन का रसोई कोच) का कांट्रैक्ट होता है।
इसमें ट्रेन के अंदर ही खाना तैयार कर यात्रियों को परोसा जाता है। वहीं, जिन ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं होता, वहां ठेकेदार रास्ते में आने वाले शहरों के थर्ड पार्टी होटल या रेस्टोरेंट से तैयार और पैक्ड खाना मंगवाकर यात्रियों तक पहुंचाते हैं।
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