मधेपुरा का सरकारी स्कूल बना आदर्श मॉडल,टाइल्स-वॉटर कूलर लगे: फ्रांस के एल्सटॉम इंडिया ने दीवारों पर बनाई कोर्स से जुड़े चित्र, अब 100% बच्चों की उपस्थिति – Madhepura News h3>
बिहार के सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर खराब भवन, सीमित संसाधन और गुणवत्ता की कमी की तस्वीर उभरती है। लेकिन मधेपुरा के बालम गढ़िया पंचायत के चकला गांव का उत्क्रमित मध्य विद्यालय इस सोच को पूरी तरह बदल रहा है। यह स्कूल अब मॉडल स्कूल बनकर उभरा है। इसके प
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CSR पहल के तहत बदली स्कूल की तस्वीर
एल्सटॉम इंडिया ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के तहत इस सरकारी विद्यालय का कायाकल्प कर दिया है। स्कूल में न केवल बुनियादी ढांचे को सुधारा गया है, बल्कि मॉडर्न सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जो इसे किसी भी अच्छे निजी स्कूल के समकक्ष बना देती हैं।
तस्वीरों में देखिए दीवार पर बने चित्र, जो बच्चों के पढ़ाई से जुड़ा है।
बदलाव जो दिखता है: मार्बल फ्लोर से वाईफाई तक
अब इस विद्यालय में छात्रों को मिल रही हैं-
- मार्बल टाइल्स से सजे क्लासरूम
- सभी कक्षाओं में एलईडी बल्ब और नए पंखे
- दीवारों पर शैक्षणिक चित्र, विश्व मानचित्र और सौर मंडल
- आरओ युक्त पेयजल की व्यवस्था
- लड़कियों और लड़कों के लिए सुलभ शौचालय
- स्कूल परिसर में वाई-फाई नेटवर्क
यह बदलाव केवल भौतिक नहीं, बल्कि छात्रों की सोच और प्रदर्शन में भी झलकने लगा है।
क्लासरूम में पढ़ते स्टूडेंट्स।
STEM लैब ने खोले विज्ञान की दुनिया के दरवाजे
स्कूल के प्रिंसिपल ब्रिंदेश कुमार ने बताया कि एल्सटॉम ने स्थापित STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) लैब ने छात्रों को विज्ञान और तकनीक की दुनिया से जोड़ दिया है। इससे अब छात्र राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग ले रहे हैं।
एल्सटॉम के कर्मचारियों ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो हमारे लिए सपनों जैसा है। यहां के हर एक ग्रामीण इस स्कूल की फैसिलिटी को देखकर उत्सुक हैं। इस वजह से जिस क्लास में पहले 10-20 बच्चे हुआ करते थे अब वहां पर 100% बच्चों की उपस्थिति हो गई है। घर की तरह इस स्कूल को मेंटेन कर के बनाया गया है।
छात्र ने हासिल किया राष्ट्रीय पहचान
कक्षा आठ के सत्यम कुमार का चयन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इंस्पायर अवॉर्ड-मानक के लिए हुआ है। यह विद्यालय और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है। स्कूल की दीवारों पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाया गया है, जो हमारे कोर्स से जुड़ा हुआ है।
क्लास 8 में पढ़ने वाले शिवम कुमार ने बताया कि पहले स्कूल में कम बच्चे एडमिशन लेते थे। लेकिन अब हमारे और अगल-बगल के गांव के बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ने आ रहे हैं। पहले स्कूल की दीवारें, पीने का पानी सही नहीं था। लेकिन अब सारी चीजों को रेनोवेट किया गया है। इसके लिए मैं एल्सटॉम के कर्मचारियों को धन्यवाद दूंगा।
बच्चों के लिए पानी पीने के लिए लगाए गए नल।
पीछे है एल्सटॉम के IR हेड का विजन
प्रधानाध्यापक ने एल्सटॉम के आईआर हेड सैयद मोहिब हुसैन का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिनके मार्गदर्शन और सक्रिय सहयोग से यह क्रांतिकारी बदलाव संभव हुआ।
फैक्ट्री से गांवों तक फैल रहा बदलाव का उजाला
एल्सटॉम इंडिया मधेपुरा में एशिया की सबसे तेज और शक्तिशाली विद्युत रेल इंजन बनाने वाली फैक्ट्री संचालित करती है। इसके साथ ही कंपनी आसपास के पांच गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के कौशल विकास, कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी सराहनीय कार्य कर रही है।
