मंत्री के खिलाफ FIR; SHO ने लिखा- मेरा अपमान हुआ: डिप्रेशन में 2 दिन रहा; रिपोर्ट में धमकाने, गालियां देने का जिक्र – Chittorgarh News

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मंत्री के खिलाफ FIR; SHO ने लिखा- मेरा अपमान हुआ:  डिप्रेशन में 2 दिन रहा; रिपोर्ट में धमकाने, गालियां देने का जिक्र – Chittorgarh News

मंत्री के खिलाफ FIR; SHO ने लिखा- मेरा अपमान हुआ: डिप्रेशन में 2 दिन रहा; रिपोर्ट में धमकाने, गालियां देने का जिक्र – Chittorgarh News


राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक पर पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों को गालियां देने का आरोप है। दावा है कि अपने कार्यकर्ता से वसूली के आरोप में गौतम दक नाराज होकर स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद SHO ने उनके खिलाफ राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करवाया है। समझिए FIR में क्या लिखा थाना प्रभारी शैतान सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस सेवा के दौरान उनके साथ पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मंत्री के व्यवहार और धमकियों के कारण वे मानसिक तनाव में चले गए थे और दो दिन तक अवसाद की स्थिति में रहे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसी कारण मामला दर्ज कराने में देरी हुई। बाद में पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों को देने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने मंत्री के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 132, 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है। थाने के बाहर मंत्री के पहुंचने और गाली-गलौच करने का आरोप एफआईआर में थाना प्रभारी शैतान सिंह ने आरोप लगाया कि 25 मई की दोपहर मंत्री गौतम दक ने उन्हें फोन कर थाने के बाहर बुलाया। जब वे बाहर पहुंचे तो मंत्री ने कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु कुमार को भी सामने बुलाने को कहा। रिपोर्ट के अनुसार दोनों पुलिसकर्मी जैसे ही वहां पहुंचे, मंत्री बिना कोई पक्ष सुने गाली-गलौच करने लगे। आरोप है कि मंत्री ने आम लोगों के सामने ऊंची आवाज में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, पुलिसकर्मियों को अपमानित किया और डराने-धमकाने की कोशिश की। एफआईआर में यह भी लिखा गया कि मंत्री ने हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया तथा राजकार्य में बाधा पहुंचाई। पुलिस ने आरोप लगाया कि मंत्री ने अपने प्रभाव का डर दिखाते हुए ट्रांसफर कराने और नौकरी खराब करने तक की धमकी दी। मंत्री ने कहा- ऑडियो में आवाज मेरी नहीं लगती विवाद बढ़ने के बाद मंत्री गौतम दक ने अपनी सफाई भी दी। उन्होंने वायरल ऑडियो को लेकर कहा कि उसमें सुनाई देने वाली आवाज उनकी नहीं लगती। हालांकि उन्होंने पूरे मामले पर ज्यादा विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी। दूसरी ओर विपक्षी दलों और विरोधियों ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कई लोगों का कहना है कि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग मंत्री के समर्थन में उतरे, जबकि कई लोगों ने इसे सत्ता के अहंकार से जोड़कर देखा।

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