बेटा खोया, घर-कारोबार तबाह, धराली की बर्बादी की कहानियां: विक्टिम बोले- लोगों को मरते देखा, 100-150 लोगों के दबे होने की आशंका h3>
धराली के रहने वाले आकाश पंवार सिर्फ 32 साल के थे। 5 अगस्त को उन्होंने कुछ दोस्तों को घर बुला लिया। आकाश की मां कामेश्वरी देवी और घर के बाकी लोग पास में ही लगे हारदूधा मेले में गए थे। धरोली कस्बा पहाड़ की तलहटी पर बसा है।
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अचानक ऊपर से पानी के साथ मलबा बहकर आया। शोर सुनकर आकाश से स्कूटी स्टार्ट की। स्कूटी घुमा ही रहे थे कि मलबा उनके घर तक आ गया। आकाश के सिर पर पत्थर लगा और उनकी वहीं मौत हो गई।
उत्तराखंड के धराली में लैंड स्लाइड की वजह से हुई तबाही के बाद लापता 50 से ज्यादा लोगों की तलाश चल रही है। हालांकि, धराली के लोग कह रहे हैं कि 100 से ज्यादा लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। कुल 5 मौतें हुई हैं, जिनमें से सिर्फ आकाश की डेडबॉडी मिली है। SDRF, ITBP, पुलिस और प्रशासन रेस्क्यू में जुटे हैं। धराली के लोगों को मातली के ITBP कैंप लाया रहा है।
दैनिक NEWS4SOCIALकी टीम ITBP कैंप पहुंची। यहां बर्बादी की कई कहानियां हैं। इनमें एक कहानी कामेश्वरी देवी की है।
बेटा खोया, घर-होटल, बगीचा सब बह गया आकाश धराली में होटल चलाते थे। उनकी मां कामेश्वरी देवी और बाकी परिवार ITBP कैंप में है। उन्हें एयर लिफ्ट करके यहां लाया गया था। हम उनसे हैलीपैड के ही पास मिले। आकाश का नाम सुनते ही रोने लगती हैं। उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है। डॉक्टर उनकी देखभाल कर रहे हैं।
ये आकाश की मां कामेश्वरी देवी हैं। बेटे की मौत के बाद से उनकी तबीयत ठीक नहीं है। वे बोल पाने की हालत में नहीं है।
कामेश्वरी देवी के पड़ोस में रहने वालीं रजनी कुकरेती उन्हें संभाल रही हैं। रजनी ने भी धराली को तबाह होते देखा हैं। इसके बाद से ही वे कामेश्वरी देवी के साथ हैं। रजनी बताती हैं, ‘आकाश के साथ कुछ दोस्त और गांव वाले भी थे। अब तक सिर्फ आकाश की डेडबॉडी मिल सकी है। कुछ सेकेंड की तबाही ने धराली में सब कुछ तबाह कर दिया।’
ये रजनी कुकरेती हैं। इनका दावा है कि धराली में मलबे के नीचे अब भी कई लोग दबे हैं। उनके बचने की उम्मीद न के बराबर है।
हैलीपैड पर मिले जयभगवान सिंह पंवार भी धराली के रहने वाले हैं। आकाश उनका भतीजा था। जयभगवान और उनके परिवार को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट करके लाया गया है। कैंप से उन्हें उत्तरकाशी ले जाया जाएगा।
जयभगवान कहते हैं, ‘मेरा 40 कमरे का होटल था। पूरी बिल्डिंग खत्म हो गई। दूसरी बार मलबा आया, तो मेरा बगीचा बह गया। कुछ नहीं बचा। कभी नहीं सोचा था कि ऐसी आपदा आएगी कि एक मिनट में हमारा इतना बड़ा गांव मलबे में दब जाएगा।’
हमने उनसे पूछा कि मलबे में कितने लोग दबे हो सकते हैं? जयभगवान कहते हैं- ‘कम से कम 150 लोग लापता हैं। आप ये मानकर चलो कि अब वे नहीं बचे होंगे। इतने मलबे में कौन ही जिंदा बचा होगा।
गांव के लोग, व्यापारी, काम करने वाले मजदूर, किसी का कुछ पता नहीं चला। घर, दुकानें, बाजार, मंदिर, बगीचे, स्कूल सब मलबे में दब गया है।
‘गांव में पहाड़ी की थोड़ी ऊंचाई पर बने मंदिर में मेला लगा था। हम सब मेले में गए थे। ऊंचाई पर होने की वजह से मेले में आए लोग बच गए। धराली अब रहने लायक नहीं रह गया है। हमारी खेती, घर, दुकान, कारोबार सब वहीं है।’
रजनी ने अपने मोबाइल में आकाश की फोटो दिखाई। आकाश का धराली में होटल का बिजनेस था।
वीडियो बनाने वाले बोले- सामने लोगों को दबकर मरते देखा धराली गांव के दूसरी तरफ सामने पहाड़ पर मुखवा गांव है। धराली में लैंडस्लाइड का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें पहाड़ से पानी बहकर आता दिख रहा है। फिर अचानक मिट्टी, पत्थर का मलबा आता है। इसी वीडियो से धराली में तबाही की भयावहता पता चली थी।
ये वीडियो मुखवा गांव के लोगों ने ही बनाया था। इनमें शामिल संयोगिता नौटियाल ITBP के कैंप में मिलीं। मुखवा में संयोगिता का मायका है। वे मेले में शरीक होने के लिए मायके गई थीं। उन्हें भी एयरलिफ्ट करके लाया गया है।
हादसे के वक्त धराली में मौजूद एक शख्स ने ये वीडियो बनाया था। इसमें धराली का पूरा मार्केट मलबे में दबा दिख रहा है।
संयोगिता बताती हैं, ‘जो वीडियो पूरी दुनिया ने देखा, उसे मेरे भाई ने बनाया है। हम जोर-जोर से सीटी बजाकर लोगों को भागने के लिए कह रहे थे। सब कुछ बहुत खतरनाक था। मैंने लोगों को मलबे में दबकर मरते देखा। किसी को कुछ करने या भागने का मौका नहीं मिला।’
‘धराली के मेरे जानने वाले 8 लोग थे। किसी से कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा। पिछले 5 दिन से बिजली, मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट कुछ नहीं है। हर्षिल और धराली के बीच हैलीपेड में झील बन गई है। ये झील हमारे घर के पीछे ही बनी है।’
आकाश को स्कूटी टर्न करते देखा, आवाज लगाई लेकिन बचा नहीं पाए गौतम सिंहवाल भी मुखवा के रहने वाले हैं। वे बताते हैं, ‘सामने से मलबा आता देखा, तो हमने जोर-जोर से आवाज लगाई। लोगों से भागने के लिए कहा। मैंने आकाश को भी देखा था। वो स्कूटी टर्न कर रहा था।
ITBP कैंप में अब्बू और भाई को तलाश रहीं नगमा उत्तरकाशी डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर से करीब 8 किमी दूर मातली के ITBP कैंप को रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है। धराली और हर्षिल से एयरलिफ्ट करके लोगों को यहीं लाया जा रहा है। राज्य और केंद्र की एजेंसियां यहां तैनात है। पुलिस ने अपना कैंप बनाया है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी रेस्क्यू करके लाए गए लोगों के चेक-अप और ट्रीटमेंट के लिए कैंप लगाया है। यहां से रेस्क्यू टीम को धराली के लिए छोटे-छोटे ग्रुप में रवाना किया जा रहा है।
रेस्क्यू करके ITBP कैंप में लाए जा रहे लोगों की लिस्ट बनाई जा रही है। उनकी पूरी डिटेल लिखी जा रही है।
यहां ऐसे भी लोग पहुंच रहे हैं, जिनके परिवार वाले धराली में थे। उनकी अब कोई खोज-खबर नहीं मिल पा रही। 26 साल की नगमा भी इनमें शामिल हैं। वे उत्तरकाशी की रहने वाली हैं। नगमा के अब्बू इब्राहिम खान और भाई फिरोज खान पेंटिंग के काम के लिए धराली में थे। नगमा ने अब्बू से लैंडस्लाइड से एक घंटे पहले बात की थी। उसके बाद से उनका फोन नहीं लगा।
नगमा ITBP कैंप में नगमा रेस्क्यू किए गए लोगों की अलग-अलग लिस्ट में अपने अब्बू का नाम तलाश रही हैं। हमने उनसे पूछा कि क्या प्रशासन से मदद मिली? नगमा जवाब देती हैं, ‘मुझसे कहा किया कि यहां आराम से बैठिए, जैसे ही कुछ पता चलेगा, हम आपको बताएंगे। सुबह से दोपहर हो गई, अब तक कुछ पता नहीं चला है।’
नगमा को उम्मीद है कि उनके अब्बू जिंदा होंगे। हालांकि, वक्त बीतने के साथ नगमा के भीतर डर गहराता जा रहा है।
गंगोत्री धाम जा रहे लोग भीमताल में फंसे, पैदल हर्षित पहुंचे एयरलिफ्ट किए गए लोगों में वे भी हैं, जो गंगोत्री धाम की यात्रा पर थे और धराली के आगे फंसे हुए थे। धराली में आई आपदा के बाद इन सारे लोगों को धराली से पहले भीमताल में रोक दिया गया था। लैंडस्लाइड के बाद आगे गंगोत्री तक बिजली और मोबाइल नेटवर्क नहीं है। ये सभी यात्री कहीं बातचीत न होने से परेशान थे।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से 18 लोगों का एक ग्रुप चारधाम यात्रा पर निकला था। पहले यमुनोत्री और फिर 5 अगस्त को गंगोत्री के दर्शन करके सभी गंगोत्री से उत्तरकाशी के रास्ते लौट रहे थे। धराली में आपदा आई, तब ये ग्रुप वहां से कुछ किमी पहले था।
ग्रुप में शामिल कृष्णा बताते हैं कि लैंडस्लाइड की वजह से टावर गिर गए और नेटवर्क चला गया। हमने मोबाइल नेटवर्क आने के बाद घर पर बताया कि हम सुरक्षित हैं।’
भैरों घाटी से पैदल हर्षिल तक आए लोग धराली से भी गुजरे। उन्होंने यहां के वीडियो बनाए हैं। वीडियो में हर तरफ सिर्फ मलबा और पत्थर दिखाई दे रहे हैं।
कृष्णा भैरों घाटी में फंसे हुए थे। हर्षिल तक पैदल चलकर आए। फिर धराली में मलबा पार करके हर्षिल तक पहुंचे। वे तबाह हो चुके धराली के ऊपर कई फीट जमे मलबे को पार कर रहे थे तो उन्होंने कुछ वीडियो रिकॉर्ड किए।
फंसे हुए यात्रियों को हर्षिल से रेस्क्यू किया जा रहा है। उन्हें एयरलिफ्ट करके मातली और उत्तरकाशी लाया जा रहा है। 9 अगस्त को शाम 5 बजे तक धराली और हर्षिल से 308 लोगों को एयरलिफ्ट करके ITBP कैंप और जॉलीग्रांट हेलीबेस तक लाया गया है। लोगों को हेलिकॉप्टर के अलावा 2 चिनूक हेलिकॉप्टर्स के जरिए रेस्क्यू किया जा रहा है। वहीं रेस्क्यू टीम के 155 स्टाफ को धराली भेजा गया है।
ITBP और सेना के जवान रेस्क्यू में लगे हैं। लोगों को खतरे वाली जगह से निकालकर ITBP कैंप पहुंचाया जा रहा है।
मौसम ठीक रहा तो 80% लोगों का रेस्क्यू जल्द गढ़वाल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे बताते हैं, ‘हर्षिल घाटी से लगातार एयर रूट से रेस्क्यू चल रहा है। मौसम का साथ मिला तो हम 80% लोगों को रेस्क्यू कर लेंगे। हमारी सारी टीमें रेस्क्यू में लगी हैं। हमने फंसे लोगों को दो कैटेगरी में बांटा है- बुजुर्गों को निलोंग से एयरलिफ्ट करेंगे और जो 3 किमी ट्रैक कर सकते हैं, उन्हें हम हर्षिल से एयरलिफ्ट कर लेंगे।’
हेलिकॉप्टर से 17 घायलों को हर्षिल से मातली लाया गया है। इनमें आर्मी के 10 जवान भी हैं।
लैंडस्लाइड में घायल जवानों को उत्तरकाशी में एडमिट किया गया है। हम उत्तरकाशी के जिला अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे। आर्मी के पोर्टर गोपाल हॉस्पिटल बेड पर लेटे मिले। हर्षिल के आर्मी कैंप में तैनात गोपाल के पास 5 और जवाव लेटे हैं। वे भी बुरी तरह जख्मी हैं।
ये आर्मी में पोर्टर गोपाल हैं। इनके चेहरे, हाथ और पैर पर चोट के निशान हैं। आंखों के पास टांके लगाए गए हैं।
गोपाल बताते हैं, ‘धराली में करीब डेढ़ बजे तेज आवाज हुई। हमें वीडियो मैसेज से पता लगा कि आपदा आई है। अफसरों ने आदेश दिया कि हमें धराली में रेस्क्यू के लिए जाना है। हमने अपनी गाड़ी तैयार की। बेलचा, गैंती, फावड़ा ले लिए। तभी पहाड़ से मलबा आता देखा। हमारा कैंप भी तबाह हो गया। बहाव इतना तेज था कि हम उसके साथ ही बह गए। आर्मी कैंप को भी बहुत नुकसान हुआ है।’
गंगवानी का ब्रिज टूटा, इसके बनने के बाद ही धराली का रास्ता खुलेगा उत्तरकाशी से धराली तक सड़के के रास्ते कनेक्टिविटी अब भी नहीं हो पाई है। उत्तरकाशी से भटवाड़ी और भटवाड़ी से गंगपानी तक रास्ता साफ है। आगे गंगवानी में पुल टूट गया है। हमने उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से धराली तक पहुंचने की कोशिश की।
उत्तरकाशी से भटवाड़ी तक हम एक दिन पहले पहुंच पाए थे, लेकिन भटवाड़ी में करीब 150 मीटर की रोड बह गई थी। इसे अब ठीक कर दिया गया है। यहां से करीब 15 किमी और आगे तक का रास्ता साफ हो गया है। वहां सबसे बड़ी चुनौती गंगवानी का ब्रिज है। इसे नए सिरे से बनाया जा रहा है।
ये काम बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन कर रहा है। BRO के अफसर केवीएन राजा कुमार ने बताया कि यहां बड़ा पुल था। हम जल्दी एक छोटा पुल बना रहे हैं। इसका शुरुआती काम किया है। अब ब्रिज बनाना शुरू करेंगे। इसे तैयार करने में कम से कम 48 घंटे लगेंगे।
गंगवानी का पुल पानी के तेज बहाव की वजह से टूट चुका है। धराली का रास्ता इसी पुल से गुजरता है। इसलिए इसे जल्दी बनाने की कोशिश की जा रही है।
आगे भी रोड क्लियरेंस में चुनौती कम नहीं है। पुल क्लियर होने के बाद भी धराली के रास्ते में कम से कम 2-3 जगह सड़क टूट गई है। पुल बनाने के बाद उसकी भी मरम्मत करने में वक्त लग सकता है। राहत और बचाव में सबसे बड़ी चुनौती रोड कनेक्टिविटी बन रही है।
धराली तक सड़क पूरी तरह से कब तैयार होगी? गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे बताते हैं, ‘रूट क्लियर करने के लिए हम युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। इसमें 48 से 72 घंटे का समय और लग सकता है। मुख्य चुनौती गंगनानी का पुल है। हमने बनाने का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद हैं कि ये जल्दी हो जाएगा।’
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धराली हादसे पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें लगा भूकंप आया और 40 सेकेंड में धराली तबाह, चश्मदीद बोले-लोग भाग भी नहीं पाए
5 अगस्त, मंगलवार की दोपहर पहाड़ों का मलबा बहकर आया और पूरा धराली उसमें दब गया। 5 लोग मारे गए, 100 से ज्यादा लापता हैं। सेना के 9 जवान भी बह गए। 50 से ज्यादा घर, 30 से ज्यादा होटल-रिजॉर्ट और 25 होम स्टे तबाह हो गए। धराली के लोग बताते हैं कि मलबा इतनी तेजी से बहकर आया कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला। पढ़िए पूरी खबर…
