बेगूसराय- चचेरे भाइयों ने शूटर से कराया भाई का मर्डर: 5 लाख में दी सुपारी; टैक्स-रंगदारी वसूली में ही दोनों के पिता की भी गई थी जान – Begusarai News h3>
14 जुलाई को बेगूसराय के लोहिया नगर इलाके में बाघा गुमटी से 100 मीटर की दूरी पर दिनदहाड़े 7 से 8 राउंड फायरिंग की गई। फायरिंग में 30 साल के अमित महतो की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए।
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बेगूसराय पुलिस ने एक दिन बाद यानी 15 जुलाई को मामले का खुलासा कर दिया। सामने आया कि अमित के चचेरे भाई राहुल ने वर्चस्व की जंग में 5 लाख रुपए की सुपारी देकर हत्या की वारदात को अंजाम दिलाया। पुलिस ने मामले में मुख्य शूटर समेत तीन को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है।
अमित हत्याकांड की चर्चा पूरे बेगूसराय में है। वजह- अमित और उसके चचेरे भाईयों के बीच एक दशक पुरानी अदावत। इस अदावत में पहले जून 2016 में अमित के पिता सुनील महतो की हत्या हुई। फिर 27 महीने बाद यानी सितंबर 2018 में अमित हत्याकांड के मुख्य आरोपी राहुल और प्रेम के पिता दीपल महतो की हत्या हुई। पढ़िए अमित हत्याकांड की पूरी कहानी…
आइए, जानते हैं अमित और उसके चचेरे भाई राहुल के बीच वर्चस्व की पूरी कहानी
साल 2012-13… बेगूसराय के बाघा इलाके के रहने वाले दीपल और सुनील महतो उर्फ छोटू सरदार उर्फ छोटू महतो सगे भाई थे। दीपल बड़ा भाई था। नवंबर-दिसंबर 2012 और जनवरी-फरवरी 2013 में बाघा इलाके की जमीन पर शहरीकरण बढ़ रहा था। जमीन का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा था।
शहर से लोग इस इलाके में जमीन खरीद रहे थे। दीपल ने ये देखा तो उसने प्रॉपर्टी डिलिंग का काम शुरू कर दिया। बीच में कोई आता तो उसके साथ मारपीट करता और धमकाता था। धीरे-धीरे प्रॉपर्टी डिलिंग के जरिए उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।
बाघा में जमीन का रेट इसलिए बढ़ रहा था क्योंकि बेगूसराय रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड इस इलाके से मात्र 200 मीटर दूर था। बस स्टैंड के आसपास जब छोटी गाड़ियों यानी ऑटो का आना जाना शुरू हुआ, तो दीपल ने इनसे एजेंटी यानी चुंगी और रंगदारी वसूलना शुरू कर दिया।
इसके अलावा, बाघा रेलवे गुमटी के पास से वीरपुर इलाके की ओर से खुलने वाली बसों से भी रंगदारी वसूलने लगा। प्रॉपर्टी डिलिंग, रंगदारी वसूली और चुंगी से दीपल रातों-रात अकूत संपत्ति का मालिक बन गया।
छोटू सरदार उर्फ छोटू महतो ने जब बड़े भाई को रातोंरात अमीर होता देखा, तो उसका भी ध्यान इस ओर गया। छोटू सरदार ने भी अपने साथ कुछ लड़कों को जोड़ा और एक ग्रुप बना लिया। छोटू महतो ने भी जमीन की खरीद-बिक्री और चुंगी वसूलने लगा।
इससे दोनों भाइयों दीपल और सुनील महतो के बीच टकराव भी होने लगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दीपल महतो के ग्रुप ने 9 जून 2016 की रात सुनील महतो की हत्या कर दी। 10 जून की सुबह सुनील की लाश महमदपुर के पास मिली थी।
सुनील के परिवार ने दीपल के ही परिवार पर हत्या का आरोप लगाया। फिर दीपल और सुनील के परिवार के बीच बस स्टैंड और रेलवे स्टैंड समेत अन्य जगहों से चुंगी वसूली, रंगदारी वसूली को लेकर वर्चस्व की जंग छिड़ गई।
दीपल महतो के दो बेटे राहुल (35) और प्रेम (30) हैं, जबकि सुनील महतो के तीन बेटे अमित (30), अजित (35) और अमर (22) है। सुनील महतो की हत्या के बाद मुख्य तौर पर उस वक्त 25 साल का अजित और 20 साल के अमित पिता का कारोबार संभाल लिया।
सुनील की हत्या के 27 महीने तक दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल रहा और कभी-कभी नोंक-झोंक हो जाती थी। इसी बीच, 4 सितंबर 2018 को कुछ बदमाशों ने दीपल महतो की उनके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी।
वारदात को अंजाम देकर भाग रहे एक बदमाश को भीड़ ने पकड़ लिया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। बदमाश की पहचान तेघड़ा थाना क्षेत्र के नोनपुर गांव के रहने वाले शंभू सहनी के रूप में हुई थी। दीपल के परिवार ने हत्या का आरोप सुनील महतो के बेटों पर लगा दिया और अमित को नामजद आरोपी बनाया।
14 जुलाई को अमित की हत्या के बाद उसकी मां बार-बार बेहोश हो जा रही थी।
दोनों हत्या के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट, गोलीबारी जैसे आधा दर्जन मामले आए
दीपल महतो की हत्या के बाद उसके बेटों और सुनील के बेटों के गैंग के बीच वसूली, रंगदारी को लेकर मारपीट, गोलीबारी जैसे आधा दर्जन से अधिक मामले सुर्खियों में रहे। इसी बीच, 14 अक्टूबर 2019 को गढपुरा थाना क्षेत्र के दुनही के रहने वाले सौरभ कुमार उर्फ माया की गला रेत हत्या की गई थी। माया छोटू महतो का शागिर्द और शूटर रहा था।
पुलिस ने उसकी लाश मनोकामना मंदिर महमदपुर के समीप एक नवनिर्मित घर से बरामद किया था। माया हत्याकांड में अमित की संलिप्तता उजागर होने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था।
अब जानिए आखिर माया कौन था, अमित का नाम कैसे सामने आया?
सूत्र बताते हैं कि माया जब छोटू महतो का शूटर बना तो उसके घर आता-जाता रहता था। इसी दौरान छोटू की बेटी से माया को प्यार हो गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद छोटू ने माया के साथ मारपीट भी की। लेकिन माया इतना अच्छा शूटर और भरोसेमंद था कि छोटू उसे अपने से अलग नहीं कर पा रहा था।
2016 में जब छोटू महतो की हत्या हो गई तो माया के साथ उसकी बेटी घर से निकल गई और विष्णुपुर में किराए के मकान में लिव इन में रहने लगी। इसकी जानकारी के बाद अमित काफी गुस्से में था। अमित ने ही अपने शागिर्दों से गला काटकर माया की हत्या करा दी।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 14 जुलाई को गोलीबारी में मारे गए अमित के खिलाफ लोहिया नगर थाना में दो हत्या और दो रंगदारी यानी कुल चार मामले दर्ज थे। बाघा से लेकर पावर हाउस चौक और बस स्टैंड के गेट तक रंगदारी और चुंगी वसूली में अमित के गुर्गों का दबदबा था।
एक महीने पहले ही राहुल की मां ने अमित, उसकी मां के खिलाफ रंगदारी की FIR दर्ज कराई थी
अमित हत्याकांड से करीब एक महीने पहले यानी 16 जून को दीपल महतो की पत्नी रीता देवी ने लोहियानगर थाना में अमित कुमार और उसकी मां संध्या देवी को नामजद आरोपित बनाते हुए रंगदारी मांगे जाने की FIR दर्ज कराई थी। FIR में कहा था कि बाघा गुमटी के पास मेरे बेटे राहुल और प्रेम बैरियर संचालन करते हैं, इसके एवज में अमित की ओर से रोजाना एक हजार रुपए की रंगदारी मांगी गई थी। इस मामले में पुलिस ने अमित महतो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 14 जुलाई को हत्या से करीब एक सप्ताह पहले ही अमित जमानत पर जेल से बाहर आया था।
मुख्य आरोपी राहुल ने पुलिस को भेजी केदारनाथ की फोटो, कहां मैं इसमें शामिल नहीं
अमित हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में राहुल का नाम सामने आया। सोमवार को ही राहुल को जब अमित हत्याकांड की जानकारी हुई, तो उसने एक पुलिस पदाधिकारी को अपनी फोटो और लोकेशन का स्क्रीनशॉट भेजा और कहा कि मुझे बेवजह फंसाया जा रहा है, मैं तो केदारनाथ जा रहा हूं, रास्ते में हूं।
हालांकि, हत्याकांड के बाद अमित के परिजन और जांच पड़ताल के दौरान पकड़े गए बदमाशों ने अपने बयान में बताया कि राहुल ने इस हत्याकांड की न केवल साजिश रची, बल्कि अपने बचाव के लिए भी काफी जोरदार प्लान बनाया था और केदारनाथ चला गया था।
सामने आया कि राहुल ने पांच लाख में शूटर हायर किए गए थे और सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा के रहने वाले शूटर सूरज कुमार को 3 लाख रुपए एडवांस भी दिया था। इससे करीब 4 दिन पहले ही राहुल उत्तराखंड के लिए निकल गया था।
उधर, जब राहुल ने पुलिस को अपनी फोटो और लोकेशन भेजी तो पुलिस भी कुछ देर के लिए कन्फ्यूज हुई, लेकिन टेक्निकल एविडेंस और इनपुट के साथ-साथ हत्याकांड में शामिल पकड़े गए आरोपियों के बयान के बाद साफ हो गया कि राहुल की इस हत्याकांड में मुख्य भूमिका है।
एक गलती राहुल के छोटे भाई प्रेम ने भी कर दी। दरअसल, 14 जुलाई को अमित की हत्या के दौरान राहुल और प्रेम के एक गुर्गे शिवम को भी गोली लगी थी। वारदात के दौरान प्रेम हेलमेट पहनकर घटनास्थल पर ही था और उसने शिवम को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया था।
अमित से साथ-साथ अजित की भी हत्या की प्लानिंग थी!
अमित और उसके परिवार को करीब से जानने वालों के मुताबिक, अमित बस और रेलवे स्टैंड पर ऑटो से चुंगी (टैक्स) वसूलता था। इसके लिए अमित रोजाना दोपहर 12 के बाद ही चुंगी वसूले जाने वाले जगह यानी स्टैंड पर जाता था।
अमित से पहले उसका बड़ा भाई अजीत स्टैंड जाता था। घर से स्टैंड की दूरी मात्र 100 मीटर है। सोमवार को एक युवक अचानक अमित को आवाज देकर घर से बुलाया, इसके बाद डेढ़ घंटा पहले यानी करीब 10 बजकर 30 मिनट पर अमित स्टैंड पहुंच गया।
अमित करीब 11 बजे तक वहीं बैठा रहा। 11:04 बाघा गुमटी की ओर से दो बाइक पर सवार छह युवक आए। सभी चेहरा पूरी तरह से ढंके हुए थे, रुके और ताबड़तोड़ गोली चलानी शुरू कर दी। गोली लगने के बाद अमित बगल के गली की ओर भागा, लेकिन 20 फीट से अधिक भाग नहीं सका और गिर गया। इसके बाद बदमाश आगे की ओर भाग निकले।
