बांस की खेती से यूं बहुरेंगे बिहार में किसानों के दिन, 'हरा सोना' से उत्पाद बनाने का स्टार्टअप भी

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बांस की खेती से यूं बहुरेंगे बिहार में किसानों के दिन, 'हरा सोना' से उत्पाद बनाने का स्टार्टअप भी

बांस की खेती से यूं बहुरेंगे बिहार में किसानों के दिन, 'हरा सोना' से उत्पाद बनाने का स्टार्टअप भी

भागलपुर में टीएनबी कॉलेज परिसर में देश का पहला बंबू टिशू कल्चर लैब खुला है। यहां हर साल व्यावसायिक स्तर पर पौधे का उत्पादन हो रहा है। ये पौधे किसानों को भी सस्ती दर पर वन विभाग की ओर से दिया जा रहा है। कटिहार, खगड़िया, मुंगेर और बख्तियारपुर में इन पौधों से हाल ही में खेती शुरू हुई है।

Nishant Nandan हिन्दुस्तान, पटना, स्वाति आनंदTue, 17 Sep 2024 03:09 AM
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बिहार में बांस से किसानों के दिन बहुरेंगे। इस सुरक्षित फसल को ‘हरा सोना’ या ग्रीन गोल्ड भी कहा जाता है। लागत कम , मुनाफा ज्यादा होने से यह खेती किसानों के जीवन में हरियाली ला रही है। इसे बढ़ावा देने हर साल 18 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बांस दिवस मनाया जाता है। प्लांट टिशू क्लचर लैब, भागलपुर के परियोजना निदेशक व बिहार के बंबू मैन के नाम से प्रसिद्ध प्रो. अजय कुमार चौधरी ने बताया कि बंजर से बंजर जमीन पर होने वाली खेती से बिहार में एथनॉल उत्पादन की भी अपार संभावनाएं हैं। 

वो भू- भाग जो बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं, वैसे क्षेत्रों में इसकी खेती से बाढ़ की तीव्रता को कम किया जा सकता है। भागलपुर में टीएनबी कॉलेज परिसर में देश का पहला बंबू टिशू कल्चर लैब खुला है। यहां हर साल व्यावसायिक स्तर पर पौधे का उत्पादन हो रहा है। ये पौधे किसानों को भी सस्ती दर पर वन विभाग की ओर से दिया जा रहा है। कटिहार, खगड़िया, मुंगेर और बख्तियारपुर में इन पौधों से हाल ही में खेती शुरू हुई है।

लैब में हर साल 1.5-2 लाख पौधे का उत्पादन 

लैब में हर साल 1.5-2 लाख पौधे का उत्पादन हो रहा है जो वन विभाग लेता है। इनमें बम्बूसा टुल्डा, अबम्बूसा बालकोआ, डेंड्रोकैलेमस स्ट्रिक्टस समेत अन्य प्रजाति शामिल हैं। बांस का 1600 उपयोग है। एंटी फंगल व जीवाणुरोधी गुण होते हैं। फर्नीचर, वाद्ययंत्र समेत कई में काम आते हैं। 2017 में कटिहार के गुठौली गांव में महानंदा का तटबंध टूटा था। अरिहाना व गुठौली के बीच करीब 50 बिगहे में लगे बांस के पौधों ने बाढ़ की तीव्रता को कम कर दिया।

परियोजना निदेशक, (पीटीसीएल भागलपुर- अररिया), प्रो. डॉ. एके चौधरी ने कहा कि सहकारिता मंत्री अमित शाह ने चीनी मीलों से एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का विकल्प तलाशने को कहा है। जैव ईंधन विनिर्माण के लिए एथनॉल उत्पादन व मिश्रण का लक्ष्य हासिल करना है। ऐसे में बांस कारगर विकल्प होगा। ज्यादा पौधे तैयार कर विभाग को दिए जाएंगे।

बांस से उत्पाद बनाने का स्टार्टअप भी

बांस को अब प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पटना के युवा विवेक चौधरी ने बीटेक के बाद 2017 में बांस से उत्पाद बनाने का स्टार्टअप शुरू किया। वह बांस का आईडी कार्ड, चम्मच, कांटा, बोतल, डायरी समेत 40 तरह के उत्पाद तैयार कर रहे। इसके लिए कटिहार, अररिया, पूर्णिया के किसानों से बांस खरीदते हैं। इससे किसानों की भी आमदनी हो रही व इनको बाजार मिल रहा।

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