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बठिंडा में रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन: जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग, निजीकरण का विरोध, बोले-सरकारी खजाने को लूट रही सरकार – Bathinda News

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बठिंडा में रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन:  जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग, निजीकरण का विरोध, बोले-सरकारी खजाने को लूट रही सरकार – Bathinda News

बठिंडा में रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन: जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग, निजीकरण का विरोध, बोले-सरकारी खजाने को लूट रही सरकार – Bathinda News


मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को पंजाब रोडवेज पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब ने राज्यभर प्रदर्शन किया। इसी क्रम में बठिंडा में भी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी परिवहन विभाग के कच्चे कर्मचारियों ने जेल में बंद अपने साथियों की रिहाई की मांग की। बठिंडा डिपो के गेट पर आयोजित रैली को संबोधित करते हुए सरबजीत सिंह ने कहा कि, पंजाब सरकार परिवहन विभाग का निजीकरण करने और कर्मचारियों के अधिकार छीनने का काम कर रही है। उन्होंने ‘श्रम संहिता’ में संशोधन के नाम पर कर्मचारियों के अधिकार छीनने के केंद्र सरकार के प्रयासों का भी विरोध किया। परिवहन मंत्री के आवास के घेराव की चेतावनी यूनियन नेता ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर पहले भी कई प्रदर्शन किए गए हैं। उन्होंने आगामी आंदोलन की घोषणा करते हुए बताया कि, 10 मई को परिवहन मंत्री के आवास पर धरना दिया जाएगा, 18 मई को एक दिवसीय हड़ताल, तथा 25, 26 और 27 मई को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी है। यूनियन नेता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार, जो किसानों, मजदूरों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन करने का वादा करके सत्ता में आई थी, अब कॉर्पोरेट घरानों और कुछ खास लोगों की सरकार बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी मालिकों की ‘किलोमीटर स्कीम बसों’ के जरिए सरकारी खजाने की करोड़ों रुपए की लूट को जारी रखने के लिए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लाठी के जोर पर चुप कराया जा रहा : सरबजीत सिंह सरबजीत सिंह ने बताया कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ 307 मामले दर्ज किए गए हैं और इन कर्मचारियों को पिछले 5 महीने से संगरूर जेल में बंद रखा गया है। यूनियन का कहना है कि यह कार्रवाई अपने करीबियों की तिजोरियां भरने के लिए की गई है, और मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों, संगठनों तथा पत्रकार समुदाय को लाठियों के जोर पर मामले दर्ज करके चुप कराया जा रहा है। यूनियन ने इस तरह की नीतियों का कड़ा विरोध करने की बात कही है। उन्होंने 1886 में शिकागो के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए 8 घंटे काम के अधिकार के लिए हुए संघर्ष का भी उल्लेख किया। जिसकी शुरुआत 1 मई से हो गई है। आज, सरकार के इस असली चेहरे को बेनकाब करने के लिए विभिन्न शहरों के बस स्टैंडों पर एक ‘प्रचार अभियान’ शुरू किया जा रहा है। डिपो प्रेसिडेंट हरतार शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट कुलविंदर सिंह रोमाना और बलकार गिल ने कहा कि सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में एक भी सरकारी बस नहीं लगाई है।

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