बंगाल में लेडी डॉक्टर से दरिंदगी के खिलाफ सड़क पर उतरे चिकित्सक, ओपीडी सेवा ठप h3>
बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। पश्चिम बंगाल की महिला ट्रेनी चिकित्सक की दरिंदगी के बाद हत्या के खिलाफ जिलेभर के सभी तरह के चिकित्सक हड़ताल पर रहते हुए सड़क पर उतर आये। उसके बाद विरोध प्रदर्शन करते हुए आक्रोश जताया। चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से सरकारी व निजी अस्पतालों में शनिवार को ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। इससे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी। 24 घंटे के लिए हड़ताल पर चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से 200 से अधिक मरीज बिना निबंधन व इलाज कराये लौट गये। हालांकि, हड़ताल के बाद भी सदर अस्पताल में 25 इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया गया। आईडीए के जिलाध्यक्ष डॉ. मुरारी मोहन ने घटना की भर्त्सना की। सदर अस्पताल में कुल 36 चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें से दो चार को छोड़कर पहले अपनी हाजिरी बनायी उसके बाद सभी हड़ताल पर चले गये। डीएस कार्यालय में डीएस संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में चिकित्स्कों की बैठक हुई। इसमें चिकित्सकों के आरोपितों को फांसी दिलाने के लिए रणनीति बनायी गयी। उसके बाद सभी चिकित्सक अपने हाथ में तख्ती लेकर सड़क पर उतर गये। उसके बाद जुलुस निकालकर विरोध प्रदर्शन करते हुए महिला चिकित्सक को न्याय दिलाने तक संघर्ष तेज करने पर बल दे रहे थे। यह जुलूस सदर अस्पता परिसर से निकलकर शहरी क्षेत्र में घूमकर प्रदर्शन करते रहे। मौके पर डीएस डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ.अरविंद कुमार, डॉ.अखिलेश कुमार आदि थे। मरीजों की जुबानी उनकी ही परेशानी सदर अस्पताल में पहली पाली में ओपीडी सेवा नौ बजे पूर्वाह्न से दो बजे अपराह्न तक व दूसरी पाली में चार बजे अपराह्न से छज बजे शाम तक ओपीडी सेवा चलता है। चिकित्सकों की हड़ताल के बाद भी दिनभर में 25 इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया गया। दिन के 10.46 मिनट पर निबंधन काउण्टर पर लोगों की भीड़ थी। इस उम्मीद में अब पुर्जा कटेगा व इलाज होगा। लेकिन हड़ताल की वजह से निबंधन काउण्टर नहीं खुला। कर्मी तैनात रहे। भीड़ में नावकोठी के समसा गांव निवासी उपेंद्र पासवान ने बताया कि वह टीवी का मरीज है। उन्हें पता ही नहीं था कि आज हड़ताल है। दो आदमी आये थे। 300 रुपये खर्च हो गये। निराश होकर लौट रहे हैं। बगल में कसहा की कुमारी चेकअप कराने आयी थी। लेकिन हड़ताल की वजह से लौटना पड़ रहा है। इस दौरान इमरजेंसी काउण्टर पर छह मरीजों का निबंधन हो चुका था। 11.21 एएम बजे इनियार की रहने वाली जुली कुमारी ने बताया कि अल्ट्रा साउंड कराने आयी थी। उन्होंने बताया कि यदि चिकित्सकों को हड़ताल पर जाना था तो दो चार दिन पहले ही प्रचार प्रसार कराते कि फलाने दिन ओपीडी सेवा ठप रहेगी। हमलोग नहीं आते। बलिया बरियारपुर की पल्लवी कुमारी पेट दर्द से कराह रही थी। मां के सहारे वह वह बेहोश पड़ी थी। इमरजेंसी काउण्टर पर तैनात एक नर्स ने उनका पुर्जा बनबाया व चिकित्स्क से इलाज कराया। आरोपितों को मिले स्पीडी ट्रायल के तहत सजा: आईएमए बेगूसराय। बंगाल में महिला चिकित्सक के साथ की गई दरिंदगी से न केवल बेगूसराय बल्कि पूरे देश के चिकित्सकों का आक्रोश चरम पर है। देश भर के चिकित्सकों के विभिन्न संगठनों का आक्रोशपूर्ण धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। चरणबद्ध आंदोलन के क्रम में शनिवार को बेगूसराय में सभी तरह की नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं ठप रही। केवल इमरजेंसी सेवा ही बहाल रही ताकि मरणासन्न मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। सबेरे नौ बजे सैकड़ों चिकित्सक सदर अस्पताल में एकत्रित हुए और वहां से शांतिपूर्ण मार्च निकाल कर कालीस्थान होते हुए आईएमए हॉल की परिसर में गये। जहां दिन के क़रीब दो बजे तक बैठक चली। आईएमए सचिव डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध के विरोध में बेगूसराय सहित पूरे देश में सरकारी तथा प्राइवेट हॉस्पिटल, क्लिनिक में सभी प्रकार की रूटीन सेवाएँ चौबीस घण्टे के लिए बंद रहेगी। केवल इमरजेंसी सेवा बहाल रहेगी ताकि मरणासन्न मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। आईएमए सचिव ने इसमें चिकित्सकों ने सरकार से मांग रखी कि जल्द से जल्द दोषी को स्पीडी ट्रायल के तहत सजा मिले और पीड़िता को न्याय। साथ ही चिकित्सकों की सुरक्षा की गारंटी हो। अगर आईएमए की मांगे नहीं मानी गयी तो हम देशव्यापी पूर्ण हड़ताल करेंगे। इसमें ओपीडी, आईपीडी, और इमरजेंसी सारी सुविधा को बंद करने की चेतावनी दी गयी। हड़ताल के समर्थन में कूदे होम्योपैथिक चिकित्सक बेगूसराय। बंगाल में पीजी मेडिकल के छात्रा के साथ नाइट ड्यूटी के दौरान दरिंदगी तथा क्रूरता पूर्वक हत्या की घटना के विरुद्ध होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया बिहार ब्रांच के द्वारा किए गए आह्वान का असर पूरे बिहार में देखने को मिला। सभी होम्योपैथिक चिकित्सालय एवं होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालयों को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ। इंडिया बिहार ब्रांच के महासचिव डॉ.बीके तिवारी ने बताया कि जिलेभर के चिकित्सक अपने क्लीनिक को बंद रखा। अपने बिहार ब्रांच के आह्वान को सफल बनाकर सभी अपने संघ के प्रति मजबूती से खड़े रहने का परिचय दिया। कार्यालय में बैठक के दौरान सभी चिकित्सकों ने इस जघन्य कृत्य की भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए हम सरकार से कानून की मांग करते हैं एवं सभी दोषियों को स्पीडी ट्रायल के तहत फांसी की सजा दिलाने की मांग की। मौके पर अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिंह, डॉ. अजय कुमार आदि थे। डॉक्टर ने की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कड़े कानून बनाने की मांग गढ़पुरा, निज संवाददाता। कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्रा की दुष्कर्म व हत्या के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) समेत डॉक्टरों के कई संगठनों की तरफ से जारी देशव्यापी हड़ताल का गढ़पुरा में भी व्याप्क असर देखने को मिला। शनिवार सुबह 6:00 बजे से ओपीडी सेवा पूर्ण रूप से ठप रही। वही इमरजेंसी सेवा चालू रखा गया। गढ़पुरा हॉस्पिटल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रामनरेश शर्मा ने बताया कि कुल मिलाकर 10 मरीज का इमरजेंसी में इलाज किया गया है। ओपीडी सेवा संभाल रहे डॉक्टर विनोद कुमार ठाकुर ने बताया कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए कोई कारगर कानून नहीं है। एंबुलेंस सेवा भी नियमित रूप से जारी रहा। सात किमी. कौड़ा से आए अंकित कुमार ने बताया कि घाव का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन ओपीडी सेवा ठप रहने से अब दूसरे दिन हॉस्पिटल आना पड़ेगा। भंसी गांव की सुनीता देवी अपने बच्चों को सर्दी खांसी का इलाज कराने के लिए पहुंची थी। साहेबपुरकमाल में डाक्टरों की हड़ताल का दिखा असर साहेबपुरकमाल। निज संवाददाता। आइएएम के आह्वान पर शनिवार को हड़ताल का प्रखंड क्षेत्र में मिला-जुला असर दिखा। हडताल के कारण प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी सेवा प्रभावित रहीं। ओपीडी सेवा बंद रही। इस कारण रोज की तरह ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की भीड़ नहीं दिखी। वहीं इमर्जेंसी वार्ड में चिकित्सक व कर्मी इमर्जेंसी में आये मरीजों का इलाज करते नजर आये। हालांकि इमर्जेंसी में भी मरीज कम ही दिखे। इमर्जेंसी में मरीज को लेकर आये एक परिजन ने बताया चिकित्सक ने उनका इलाज किया और दवाईयां भी दी। बंगाल की घटना से ठप रहा चिकित्सकीय कार्य तेघड़ा, निज प्रतिनिधि। महिला चिकित्सक की हत्या के विरोध में चिकित्सकों द्वारा आउटडोर बंद रखने का निर्णय पर तेघड़ा अस्पताल भी सुनसान रहा। कुछ मरीज आए भी तो उन्हें लौटा दिया गया। चिकित्सा कर्मियों ने घटना पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना काफी शर्मनाक है। चिकित्सक हमेशा मानव सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसे में महिला चिकित्सक के साथ हुई घटना माफी लायक नहीं है। बंगाल की सरकार इसमें दोषी लोगों को सख्त कार्रवाई करे। तेघड़ा अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामकृष्ण ने बताया कि चिकित्सक काम पर आए, लेकिन आउटडोर ठप रहा। हलांकि इमरजेंसी सेवा को प्रभावित होने नही दिया गया। प्रसव पीड़ित सहित अन्य रोगियों के लिए एंबुलेंस भी काम करता रहा। बछवाड़ा सीएचसी में नहीं हुआ एक भी मरीज का रजिस्ट्रेशन बछवाड़ा, निज संवाददाता। सीएचसी बछवाड़ा में शनिवार को सभी चिकित्सकों ने हड़ताल कर ओपीडी सेवा को पूरी तरह ठप रखा। ओपीडी में उपचार के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर पर एक भी मरीज का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। अस्पताल के ओपीडी में उपचार करवाने पहुंचे मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि अस्पताल में प्रसव व अन्य इमरजेंसी सेवा सामान्य दिनों की तरह जारी रखी गई थी। बुखार, त्वचा रोग, पेट दर्द आदि बीमारियों से परेशान नारेपुर पश्चिम के शैलेंद्र कुमार महतो, राजेंद्र प्रसाद, दादुपुर के शिव यतन आदि मरीजों ने बताया कि वे अस्पताल में उपचार करवाने सुबह नौ बजे पहुंचे थे किंतु अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने हड़ताल की बात कह उन्हें लौटा दिया है। हेल्थ मैनेजर मोहम्मद इमरान ने बताया कि चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर अस्पताल की ओपीडी सेवा पूरी तरह बाधित रही।
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बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। पश्चिम बंगाल की महिला ट्रेनी चिकित्सक की दरिंदगी के बाद हत्या के खिलाफ जिलेभर के सभी तरह के चिकित्सक हड़ताल पर रहते हुए सड़क पर उतर आये। उसके बाद विरोध प्रदर्शन करते हुए आक्रोश जताया। चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से सरकारी व निजी अस्पतालों में शनिवार को ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। इससे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी। 24 घंटे के लिए हड़ताल पर चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से 200 से अधिक मरीज बिना निबंधन व इलाज कराये लौट गये। हालांकि, हड़ताल के बाद भी सदर अस्पताल में 25 इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया गया। आईडीए के जिलाध्यक्ष डॉ. मुरारी मोहन ने घटना की भर्त्सना की। सदर अस्पताल में कुल 36 चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें से दो चार को छोड़कर पहले अपनी हाजिरी बनायी उसके बाद सभी हड़ताल पर चले गये। डीएस कार्यालय में डीएस संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में चिकित्स्कों की बैठक हुई। इसमें चिकित्सकों के आरोपितों को फांसी दिलाने के लिए रणनीति बनायी गयी। उसके बाद सभी चिकित्सक अपने हाथ में तख्ती लेकर सड़क पर उतर गये। उसके बाद जुलुस निकालकर विरोध प्रदर्शन करते हुए महिला चिकित्सक को न्याय दिलाने तक संघर्ष तेज करने पर बल दे रहे थे। यह जुलूस सदर अस्पता परिसर से निकलकर शहरी क्षेत्र में घूमकर प्रदर्शन करते रहे। मौके पर डीएस डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ.अरविंद कुमार, डॉ.अखिलेश कुमार आदि थे। मरीजों की जुबानी उनकी ही परेशानी सदर अस्पताल में पहली पाली में ओपीडी सेवा नौ बजे पूर्वाह्न से दो बजे अपराह्न तक व दूसरी पाली में चार बजे अपराह्न से छज बजे शाम तक ओपीडी सेवा चलता है। चिकित्सकों की हड़ताल के बाद भी दिनभर में 25 इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया गया। दिन के 10.46 मिनट पर निबंधन काउण्टर पर लोगों की भीड़ थी। इस उम्मीद में अब पुर्जा कटेगा व इलाज होगा। लेकिन हड़ताल की वजह से निबंधन काउण्टर नहीं खुला। कर्मी तैनात रहे। भीड़ में नावकोठी के समसा गांव निवासी उपेंद्र पासवान ने बताया कि वह टीवी का मरीज है। उन्हें पता ही नहीं था कि आज हड़ताल है। दो आदमी आये थे। 300 रुपये खर्च हो गये। निराश होकर लौट रहे हैं। बगल में कसहा की कुमारी चेकअप कराने आयी थी। लेकिन हड़ताल की वजह से लौटना पड़ रहा है। इस दौरान इमरजेंसी काउण्टर पर छह मरीजों का निबंधन हो चुका था। 11.21 एएम बजे इनियार की रहने वाली जुली कुमारी ने बताया कि अल्ट्रा साउंड कराने आयी थी। उन्होंने बताया कि यदि चिकित्सकों को हड़ताल पर जाना था तो दो चार दिन पहले ही प्रचार प्रसार कराते कि फलाने दिन ओपीडी सेवा ठप रहेगी। हमलोग नहीं आते। बलिया बरियारपुर की पल्लवी कुमारी पेट दर्द से कराह रही थी। मां के सहारे वह वह बेहोश पड़ी थी। इमरजेंसी काउण्टर पर तैनात एक नर्स ने उनका पुर्जा बनबाया व चिकित्स्क से इलाज कराया। आरोपितों को मिले स्पीडी ट्रायल के तहत सजा: आईएमए बेगूसराय। बंगाल में महिला चिकित्सक के साथ की गई दरिंदगी से न केवल बेगूसराय बल्कि पूरे देश के चिकित्सकों का आक्रोश चरम पर है। देश भर के चिकित्सकों के विभिन्न संगठनों का आक्रोशपूर्ण धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। चरणबद्ध आंदोलन के क्रम में शनिवार को बेगूसराय में सभी तरह की नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं ठप रही। केवल इमरजेंसी सेवा ही बहाल रही ताकि मरणासन्न मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। सबेरे नौ बजे सैकड़ों चिकित्सक सदर अस्पताल में एकत्रित हुए और वहां से शांतिपूर्ण मार्च निकाल कर कालीस्थान होते हुए आईएमए हॉल की परिसर में गये। जहां दिन के क़रीब दो बजे तक बैठक चली। आईएमए सचिव डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध के विरोध में बेगूसराय सहित पूरे देश में सरकारी तथा प्राइवेट हॉस्पिटल, क्लिनिक में सभी प्रकार की रूटीन सेवाएँ चौबीस घण्टे के लिए बंद रहेगी। केवल इमरजेंसी सेवा बहाल रहेगी ताकि मरणासन्न मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। आईएमए सचिव ने इसमें चिकित्सकों ने सरकार से मांग रखी कि जल्द से जल्द दोषी को स्पीडी ट्रायल के तहत सजा मिले और पीड़िता को न्याय। साथ ही चिकित्सकों की सुरक्षा की गारंटी हो। अगर आईएमए की मांगे नहीं मानी गयी तो हम देशव्यापी पूर्ण हड़ताल करेंगे। इसमें ओपीडी, आईपीडी, और इमरजेंसी सारी सुविधा को बंद करने की चेतावनी दी गयी। हड़ताल के समर्थन में कूदे होम्योपैथिक चिकित्सक बेगूसराय। बंगाल में पीजी मेडिकल के छात्रा के साथ नाइट ड्यूटी के दौरान दरिंदगी तथा क्रूरता पूर्वक हत्या की घटना के विरुद्ध होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया बिहार ब्रांच के द्वारा किए गए आह्वान का असर पूरे बिहार में देखने को मिला। सभी होम्योपैथिक चिकित्सालय एवं होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालयों को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ। इंडिया बिहार ब्रांच के महासचिव डॉ.बीके तिवारी ने बताया कि जिलेभर के चिकित्सक अपने क्लीनिक को बंद रखा। अपने बिहार ब्रांच के आह्वान को सफल बनाकर सभी अपने संघ के प्रति मजबूती से खड़े रहने का परिचय दिया। कार्यालय में बैठक के दौरान सभी चिकित्सकों ने इस जघन्य कृत्य की भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए हम सरकार से कानून की मांग करते हैं एवं सभी दोषियों को स्पीडी ट्रायल के तहत फांसी की सजा दिलाने की मांग की। मौके पर अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिंह, डॉ. अजय कुमार आदि थे। डॉक्टर ने की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कड़े कानून बनाने की मांग गढ़पुरा, निज संवाददाता। कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्रा की दुष्कर्म व हत्या के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) समेत डॉक्टरों के कई संगठनों की तरफ से जारी देशव्यापी हड़ताल का गढ़पुरा में भी व्याप्क असर देखने को मिला। शनिवार सुबह 6:00 बजे से ओपीडी सेवा पूर्ण रूप से ठप रही। वही इमरजेंसी सेवा चालू रखा गया। गढ़पुरा हॉस्पिटल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रामनरेश शर्मा ने बताया कि कुल मिलाकर 10 मरीज का इमरजेंसी में इलाज किया गया है। ओपीडी सेवा संभाल रहे डॉक्टर विनोद कुमार ठाकुर ने बताया कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए कोई कारगर कानून नहीं है। एंबुलेंस सेवा भी नियमित रूप से जारी रहा। सात किमी. कौड़ा से आए अंकित कुमार ने बताया कि घाव का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन ओपीडी सेवा ठप रहने से अब दूसरे दिन हॉस्पिटल आना पड़ेगा। भंसी गांव की सुनीता देवी अपने बच्चों को सर्दी खांसी का इलाज कराने के लिए पहुंची थी। साहेबपुरकमाल में डाक्टरों की हड़ताल का दिखा असर साहेबपुरकमाल। निज संवाददाता। आइएएम के आह्वान पर शनिवार को हड़ताल का प्रखंड क्षेत्र में मिला-जुला असर दिखा। हडताल के कारण प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी सेवा प्रभावित रहीं। ओपीडी सेवा बंद रही। इस कारण रोज की तरह ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की भीड़ नहीं दिखी। वहीं इमर्जेंसी वार्ड में चिकित्सक व कर्मी इमर्जेंसी में आये मरीजों का इलाज करते नजर आये। हालांकि इमर्जेंसी में भी मरीज कम ही दिखे। इमर्जेंसी में मरीज को लेकर आये एक परिजन ने बताया चिकित्सक ने उनका इलाज किया और दवाईयां भी दी। बंगाल की घटना से ठप रहा चिकित्सकीय कार्य तेघड़ा, निज प्रतिनिधि। महिला चिकित्सक की हत्या के विरोध में चिकित्सकों द्वारा आउटडोर बंद रखने का निर्णय पर तेघड़ा अस्पताल भी सुनसान रहा। कुछ मरीज आए भी तो उन्हें लौटा दिया गया। चिकित्सा कर्मियों ने घटना पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना काफी शर्मनाक है। चिकित्सक हमेशा मानव सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसे में महिला चिकित्सक के साथ हुई घटना माफी लायक नहीं है। बंगाल की सरकार इसमें दोषी लोगों को सख्त कार्रवाई करे। तेघड़ा अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामकृष्ण ने बताया कि चिकित्सक काम पर आए, लेकिन आउटडोर ठप रहा। हलांकि इमरजेंसी सेवा को प्रभावित होने नही दिया गया। प्रसव पीड़ित सहित अन्य रोगियों के लिए एंबुलेंस भी काम करता रहा। बछवाड़ा सीएचसी में नहीं हुआ एक भी मरीज का रजिस्ट्रेशन बछवाड़ा, निज संवाददाता। सीएचसी बछवाड़ा में शनिवार को सभी चिकित्सकों ने हड़ताल कर ओपीडी सेवा को पूरी तरह ठप रखा। ओपीडी में उपचार के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर पर एक भी मरीज का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। अस्पताल के ओपीडी में उपचार करवाने पहुंचे मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि अस्पताल में प्रसव व अन्य इमरजेंसी सेवा सामान्य दिनों की तरह जारी रखी गई थी। बुखार, त्वचा रोग, पेट दर्द आदि बीमारियों से परेशान नारेपुर पश्चिम के शैलेंद्र कुमार महतो, राजेंद्र प्रसाद, दादुपुर के शिव यतन आदि मरीजों ने बताया कि वे अस्पताल में उपचार करवाने सुबह नौ बजे पहुंचे थे किंतु अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने हड़ताल की बात कह उन्हें लौटा दिया है। हेल्थ मैनेजर मोहम्मद इमरान ने बताया कि चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर अस्पताल की ओपीडी सेवा पूरी तरह बाधित रही।

