पावर टैबलेट खाकर ट्यूशन टीचर की लाश से रेप: पत्नी और 2 बेटियों का सिर भी हथौड़े से कुचला, नहाकर पूजा की; जमशेदपुर मर्डर केस पार्ट-1 h3>
झारखंड के जमशेदपुर की तीस्ता रोड। तारीख 11 अप्रैल 2021 और वक्त रात के 9 बजे। TATA कॉलोनी के मकान नंबर 99 में पार्टी चल रही थी। प्लेट में मटन परोसा हुआ था। खाना खाते हुए आनंद साहू नाम का एक शख्स बोला- ‘जीजाजी पार्टी के लिए अच्छा दिन चुना है। कल से चैत
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हंसते हुए दीपक बोला- ‘और मटन लो… अच्छे से खाओ।’ दीपक की पत्नी वीना और दोनों बेटियां भी पास बैठकर खाना खा रही थीं। पार्टी के बाद आनंद अपने घर के लिए निकल गया।
वीना ने दोनों बेटियों, श्रावणी और शाणवी से कहा- ‘तुम दोनों अपने कमरे में जाकर सो जाओ, सुबह स्कूल भी जाना है।’ श्रावणी और शाणवी अपने कमरे में चली गईं। वीना और दीपक भी उठकर अपने कमरे में चले गए। वीना थकी थी, बेड पर जाते ही उसकी आंख लग गई, लेकिन दीपक वेब सीरीज देखने लगा।
सुबह के 3 बजे दीपक बेड से उठा और दबे पांव कमरे से बाहर आ गया। सोफे के पास गया और कोने में रखे झोले से हथौड़ा निकाला। मन ही मन बुदबुदाया- ‘इससे काम हो जाएगा।’
हाथ में हथौड़ा लिए दीपक वापस कमरे में गया। वीना गहरी नींद में थी। दीपक उसके सिर के पास जाकर खड़ा हो गया। हथौड़े को तीन बार प्रणाम किया। कुछ सोचा फिर पूरी ताकत से पत्नी के सिर पर हथौड़ा दे मारा। उसका सिर फट गया। वह चीख पड़ी। दीपक झट से बेड पर गया और वीना के पेट के ऊपर बैठ गया। तकिया उठाया और उसका मुंह दबा दिया।
वीना का दम घुटने लगा, हाथ-पैर पीटते हुए वह दीपक को धक्का देने लगी। तभी दीपक ने हथौड़ा उठाया और उसके सिर पर तीन-चार बार दे मारा। वीना शांत पड़ गई। खून के छींटे दीवारों पर पड़े। दीपक के मुंह और शर्ट पर भी खून के धब्बे लग गए। पूरा बेड खून से सन गया।
दीपक ने पत्नी वीना के सिर पर तीन-चार बार हथौड़ा दे मारा, वीना ने दम तोड़ दिया। स्केच: संदीप पाल
दीपक खून से रंगा हथौड़ा लिए कमरे से निकला और हॉल में आकर सोफे पर बैठ गया। कुछ देर सुस्ताने के बाद बच्चों के कमरे की तरफ बढ़ा। उसके हाथ में अभी भी हथौड़ा था। दोनों बेटियां गहरी नींद में थीं। पास गया, दोनों को ध्यान से देखा फिर लौट आया। हॉल में इधर-उधर टहलने लगा। फिर एक लंबी सांस ली और तेजी से बच्चों के कमरे में घुसा।
श्रावणी के पास गया। उसका माथा चूमा। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। कुछ सोचते हुए आंसू पोंछा, हथौड़ा उठाया और बेटी के सिर पर दे मारा। श्रावणी चीख पड़ी- ‘मम्मी…।’ तभी दीपक ने उसके मुंह पर तकिया रखकर दबा दिया। वह कुछ देर तड़पती रही, फिर उसकी सांसें रुक गईं।
‘पता नहीं मरी की नहीं मरी’। ये बुदबुदाते हुए दीपक ने तीन-चार बार हथौड़ा उसके सिर पर फिर से दे मारा। चारों तरफ खून फैल गया।
दीपक गहरी सांस लेते हुए बेड पर लेट गया। कुछ देर बाद उठा। शाणवी के सिर पर हाथ फेरते हुए बोला- ‘तुम अकेली जिंदा रहकर क्या करोगी।’ उसने शावणी का माथा चूमा और गले से लगा लिया। फिर अचानक हथौड़ा उठाया और पूरी ताकत से उसके सिर पर दनादन हथौड़ा मारने लगा। कमरे की दीवारों पर खून के धब्बे जम गए। पूरे बेड पर खून ही खून था।
लंबी सांस लेते हुए दीपक कमरे से बाहर निकला और सोफे पर आकर बैठ गया। उसकी नजर घड़ी पर पड़ी। सुबह के 5 बज चुके थे। वो वॉशरूम में गया। खून से सने कपड़े उतारकर वॉशिंग मशीन में डाला और शीशे के सामने खड़ा हो गया। उसका चेहरा खून से लाल था। फिर वो नहाने चला गया। नहाकर नए कपड़े पहने, चंदन-टीका लगाया और पूजा करने बैठ गया।
करीब 7 बजे वो पूजा करके उठा। ‘अभी तो बहुत वक्त है। इतने में तो आनंद के घर से लौट आऊंगा।’ ये सोचते हुए दीपक ने घर का दरवाजा लॉक किया और बरामदे में खड़ी बुलेट लेकर निकल गया। 2 घंटे बाद वापस लौटा। बरामदे में खड़े होकर एक नंबर डायल किया। यह नंबर उसके दोस्त रोशन साहू का था। रोशन, दीपक को मामा कहा करता था।
दीपक हंसते हुए बोला- ‘रोशन भांजा, बहुत दिन हो गए तुमसे मिले हुए। आज घर आओ साथ में लंच करते हैं।’
उधर से आवाज आई- ‘ठीक है मामा, आता हूं दोपहर में’, फोन कट गया। दीपक दरवाजा खोलकर घर में घुसा और सोफे पर जाकर बैठ गया।
इसी बीच किसी ने दरवाजा खटखटाया। एक लड़की ने आवाज दी, ‘श्रावणी बेटा, शाणवी बेटा, दरवाजा खोलो।’ ये सुनते ही दीपक कमरे की तरफ भागा। तभी लड़की ने दरवाजे को धक्का दे दिया। दरवाजा खुल गया। ये लड़की दीपक की बेटियों की ट्यूशन टीचर रिया घोष थी। जिसकी उम्र करीब 21 साल रही होगी।
रिया जैसे ही हॉल में आकर खड़ी हुई, देखा दीपक पत्नी की लाश को चादर में लपेट रहा था। चारों तरफ खून देखकर रिया सकपका गई। दीपक हड़बड़ाते हुए मेन गेट की तरफ भागा और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। फिर भागता हुआ किचन में गया और चाकू लेकर आया।
दीपक पत्नी वीना की लाश को चादर में लपेट रहा था, तभी ट्यूशन टीचर रिया घोष वहां पहुंच गई। स्केच: संदीप पाल
रिया की ओर चाकू दिखाते हुए बोला- ‘जरा भी हल्ला नहीं। थोड़ी भी आवाज की, तो यहीं पर काटकर रख दूंगा। चल कमरे में।’
रिया कमरे में चली गई। दीपक बोला- ‘चुपचाप पलंग पर बैठ जा।’ कांपती हुई रिया पलंग पर बैठ गई। दीपक ने बगल में रखा भूरे रंग का टेप उठाया। रिया चिल्लाने लगी। दीपक ने रिया की गर्दन पर चाकू लगा दिया। रिया चुप हो गई। फिर उसके दोनों हाथ पीछे की तरफ करके टेप लपेटना शुरू कर दिया। हाथ बांधने के बाद दीपक ने तकिया उठाया और रिया के मुंह पर रखकर दबा दिया। वो छटपटाने लगी। दीपक ने तकिया हटाया और उसके मुंह पर टेप लपेट दिया।
रिया जोर-जोर से पैर पटकने लगी। अब दीपक, रिया का गला दबाने लगा। कुछ देर बाद रिया की छटपटाहट रुक गई। शरीर ठंडा पड़ गया। दीपक ने लाश खींचकर जमीन पर पटक दी। फिर उसके दोनों पैर पकड़कर घसीटते हुए कमरे से बाहर ले जाने लगा।
लाश के निचले हिस्से के कपड़े हट गए। दीपक ने लाश वहीं छोड़ दी। दौड़कर पत्नी के कमरे में गया। अलमारी से पावर टैबलेट निकालकर खाई और फिर रिया की लाश के पास चला गया। लाश को खींचकर बेडरूम में ले गया और उठाकर पलंग पर पटक दिया। उसने लाश के साथ कई बार रेप किया। फिर सोचने लगा-‘अब इसका क्या करूं। रोशन आएगा, तो देख लेगा..…।’ उसने लाश जमीन पर पटक दी। पलंग का बॉक्स खोला और लाश के हाथ-पैर मोड़कर ठूंस दिया।
‘मारना तो 2 को था, पर मैंने सारे मार दिए। अब उसको भी निपटा देना है।’ ये कहते हुए दीपक वॉशरूम की तरफ चला गया। तब तक दोपहर के 12 बज चुके थे।
दीपक की पत्नी वीना, दोनों बेटी- श्रावणी और शाणवी, बेटियों की ट्यूशन टीचर रिया घोष की लाश।
दीपक ने पत्नी और दोनों बेटियों का कत्ल क्यों किया? कत्ल से पहले दीपक ने घर पर पार्टी क्यों रखी? रिया की लाश के साथ रेप क्यों किया? तीन मर्डर करने के बाद दीपक बुलेट मोटर साइकिल लेकर कहां गया था? सभी को मारने के बाद रोशन को लंच पर क्यों बुलाया? पूरी कहानी जमशेदपुर मर्डर केस के पार्ट-2 में…
12 अप्रैल 2021, रोशन कुमार साहू अपनी पत्नी मोनी से बोला, ‘दीपक मामा ने लंच पर बुलाया है, अपने भाई अंकित को भी साथ ले चलो, वो खुश हो जाएंगे।’ सुनते ही मोनी ने हामी भर दी। मोनी का भाई अंकित दो दिन पहले ही जमशेदपुर घूमने आया था। सभी कार में बैठकर दीपक के घर के लिए निकल गए। इधर, दीपक सोफे पर बैठा रोशन का इंतजार कर रहा था। पूरी कहानी पढ़िए जमशेदपुर मर्डर केस पार्ट-2 में
(नोट- यह पूरी कहानी पुलिस चार्जशीट, कोर्ट जजमेंट, एडवोकेट राजीव रंजन, डीएसपी मुकुंद ठाकुर और मृतक वीना के भाई आनंद साहू से बातचीत पर आधारित है। रेप पीड़िता का नाम बदला हुआ है। सीनियर रिपोर्टर नीरज झा ने क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल करते हुए इसे कहानी के रूप में लिखा है।)
