दूसरों के लिए नियमों का अंबार, अपने लिए सबकुछ गुलजार…. AAP से सवाल तो बनता है!

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दूसरों के लिए नियमों का अंबार, अपने लिए सबकुछ गुलजार…. AAP से सवाल तो बनता है!

दूसरों के लिए नियमों का अंबार, अपने लिए सबकुछ गुलजार…. AAP से सवाल तो बनता है!

नई दिल्‍ली: मेट्रो रेल और एम्‍स परियोजना में देरी की जा सकती है। हर साल ऑड-ईवन थोपा जा सकता है। पटाखे छुड़ाने पर बैन किया जा सकता है। पेड़ काटने पर फाइन और जेल की हवा खिलाई जा सकती है। घर की खरीद-बिक्री में सौ नियम गिनाए जा सकते है। लेकिन, यह सब सिर्फ दूसरों के लिए है। अपने लिए कुछ नहीं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने यह साबित किया है। हर बात में नियम-कायदों की दुहाई देने वाली AAP सरकार आज खुद सवालों के घेरे में है। ‘ऑपरेशन शीशमहल’ ने दिल्‍ली सरकार के इस दोहरे चेहरे को बेनकाब किया है। सीएम अरविंद केजरीवाल के ‘महल’ को बनाने में जिस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, उससे यही लगता है कि कानून-कायदे सिर्फ दूसरों के लिए बने हैं। एक के बाद एक खुलासों ने AAP सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस पूरे मामले में पार्टी कोई भी संतोषजनक जवाब दे पाने में नाकाम साबित हुई है। इसने ईमानदारी का दम भरने वाली AAP की साख को बड़ा बट्टा लगा दिया है।

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न‍ियमों को ताक पर रखकर खड़ा हुआ ‘महल’
‘ऑपरेशन शीशमहल’ के पार्ट-5 में तो जो खुलासा हुआ है, उसने अब तक हुए सभी खुलासों को पीछे छोड़ दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि यह शीशमहल नियमों को ताक पर रखकर कैसे तैयार हुआ। सवाल यह है कि दिल्‍ली सीएम आवास के लिए इजाजत सिर्फ रेनोवेशन की थी तो नया आवास कैसे बना? पुराने सीएम आवास की छत गिरने का दावा अगर सही है तो फिर दो साल सीएम अरविंद केजरीवाल उसमें कैसे रहे? क्‍या दिल्‍ली सीएम आवास के निर्माण के लिए पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाई गईं? ऐसे ढेरों सवाल हैं जिनके जवाब शायद सीएम केजरीवाल के पास अभी नहीं हैं। पार्ट-5 में दावा क‍िया गया है क‍ि रेनोवेशन नहीं। अलबत्‍ता, पूरा का पूरा ‘शीशमहल’ नया बना है। इस क्रम में पुराने सीएम आवास को ग‍िरा द‍िया गया।

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नियम-कायदों का पाठ क्‍या स‍िर्फ दूसरों के ल‍िए?
यह वही केजरीवाल सरकार है जो हर समय नियम-कायदों का पाठ पढ़ाया करती है। अक्सर इन्‍हीं को लेकर वह दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल (LG) से भिड़ जाती है। ताजा मामले में भी इसकी बानगी देखने को मिली है। दिल्‍ली के एलजी ने शनिवार को सीएम आवास मामले में 15 दिनों के भीतर अधिकारियों से रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिए थे। अगले ही दिन AAP की मंत्री आतिशी ने एलजी को चिट्ठी लिखकर उनकी हद याद दिलाई। इस चिट्ठी में उन्‍होंने लिखा कि एलजी के पास ऐसा करने के अधिकार नहीं हैं। वह सीधे किसी अधिकारी को इस तरह का आदेश नहीं दे सकते हैं।

ऑपरेशन शीशमहल: सीएम केजरीवाल के पास नहीं हैं किन सवालों के जवाब?
सवाल यह है कि क्‍या सारे नियम दूसरों के लिए ही बने हैं। जब रेनोवेशन की परमिशन पर कंस्‍ट्रक्‍शन करा दिया गया तो नियमों की याद क्‍यों नहीं आई। ‘शीशमहल’ बनाने में पेड़ों की कुर्बानी दी गई तब नियम कहां चले गए थे। रेनोवेशन के नाम पर लाखों के पर्दे और कमोड लगाए गए तो क्‍यों कुछ याद नहीं रहा। करोड़ों के मार्बल लगाकर करदाताओं की गाढ़ी कमाई फूंकी गई तो नियम कहां चले गए थे। क्‍या आम आदमी पार्टी सिर्फ दूसरों से ही नियमों के पालन की अपेक्षा करना जानती है। ऐसी अपेक्षा रखना शायद गलत ही होगा। आज जिन हालातों में AAP खड़ी है उसमें लोगों का सवाल करना तो बनता है।

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