Advertising
<

दालमंडी में भवन ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक: VDA की कार्रवाई को रोका, जज बोले – याची को सुने बिना नहीं कर सकते ध्वस्तीकरण – Varanasi News

0
दालमंडी में भवन ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक:  VDA की कार्रवाई को रोका, जज बोले – याची को सुने बिना नहीं कर सकते ध्वस्तीकरण – Varanasi News

दालमंडी में भवन ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक: VDA की कार्रवाई को रोका, जज बोले – याची को सुने बिना नहीं कर सकते ध्वस्तीकरण – Varanasi News


वाराणसी के दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में वीडीए द्वारा अवैध घोषित के मामले में मकानों को ध्वस्तीकरण की दी गई नोटिस पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। यह रोक परवीन फातिमा और तीन अन्य व्यक्तियों की याचिका पर कोर्ट ने लगाईं है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि जब तक विकास प्राधिकरण याचीगण की आपत्तियों का निस्तारण नहीं कर देता तब तक संबंधित पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे। 14 मई 2026 को जारी नोटिस को दी गई थी चुनौती दालमंडी के मकान संख्या सीके 39/2 की मकान मालिक परवीन फातिमा ने बताया – वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) तहत 14 मई 2026 को एक नोटिस जारी किया और उसे खाली करने का अल्टीमेटम देकर उसे धवस्तिकरण की बात कही है। जबकि हम वहां वर्षों से रह रहे हैं और भवन काफी पुराना है। ऐसे में इस नोटिस को इलाहबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। मनमाने तरीके से कर रहा है VDA कार्रवाई परवीन फातिमा ने कोर्ट को बताया – इस भवन में कई वर्षों से रह रही हूं। जो नोटिस आज वीडीए ने दी वैसी नोटिस आज तक हमें नहीं दी गई है। उन्होंने आशंका अव्यक्त करते हुए कहा कि विकास प्राधिकरण मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रहा है ताकि उन्हें उसका उचित मुआवजा न मिल सके। वीडीए के वकील ने दी अपने तर्क VDA के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि क्योंकि अधिनियम की धारा 27(2) के तहत अभी तक अपनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज नहीं कराई है। उसके पहले ही आप कोर्ट पहुंच गयी हैं। यदि याची अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करते हैं तो प्राधिकरण कानून के दायरे में रहकर उनपर विचार करने को तैयार है। एक सप्ताह में जमा करने होंगे दस्तावेज कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि याची एक सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां और इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करते हैं तो वीडीए उपाध्यक्ष तीन सप्ताह के अंदर उसपर निरनय लेंगे। यदि निर्धारित समय सीमा में आपत्तियां दाखिल नहीं हुई तो प्राधिकरण को पूरी तरह कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी।

उत्तर प्रदेश की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Uttar Pradesh News