ट्रेन की ‘तत्काल टिकट’ चुराने वाली गैंग में 5वीं फेल: CBI ने जिसे सरगना बताया वो बेल पर छूटा; IIT–IIM वाले अफसर नहीं तोड़ पाए नेक्सस

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ट्रेन की ‘तत्काल टिकट’ चुराने वाली गैंग में 5वीं फेल:  CBI ने जिसे सरगना बताया वो बेल पर छूटा; IIT–IIM वाले अफसर नहीं तोड़ पाए नेक्सस

ट्रेन की ‘तत्काल टिकट’ चुराने वाली गैंग में 5वीं फेल: CBI ने जिसे सरगना बताया वो बेल पर छूटा; IIT–IIM वाले अफसर नहीं तोड़ पाए नेक्सस

अवैध सॉफ्टवेयर्स से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे हैं। एक आम यात्री जितनी देर में IRCTC ऐप पर डिटेल भर पाता है, उससे भी कम वक्त में ये सॉफ्टवेयर टिकट बुक कर देते हैं।

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25 से 30 सेकंड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300 से 500 रुपए तक का कमीशन लेकर बेचा जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन चार गुना तक हो जाता है।

इस नेक्सस को चलाने वाले सरगना 5वीं फेल हैं, वहीं जिन अफसरों पर धांधली रोकने जिम्मा है, वे IIT–IIM जैसे संस्थानों से पढ़े हैं, लेकिन गड़बड़ी को बंद नहीं करवा पा रहे।

हर 2–3 महीने में नई पहचान: ऐसे बदलते हैं वेबसाइट, सॉफ्टवेयर और बैंक अकाउंट

कभी नेक्सस में शामिल रहे एजेंट ने बताया कि, गिरोह का सरगना हर दो से तीन महीने में वेबसाइट, सॉफ्टवेयर के नाम, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर तक बदल देता है, ताकि किसी भी तरह की ट्रैकिंग से बचा जा सके। इस्तेमाल किए जाने वाले नंबर पूरी तरह फर्जी होते हैं, जबकि पैसों के लेन-देन के लिए म्यूल अकाउंट्स यानी लालच देकर या फर्जी तरीके से बनाए गए खातों का इस्तेमाल किया जाता है।

फिलहाल ‘टेस्ला’, ‘गदर’, ‘स्टारलिंक’, ‘स्पेसएक्स’, ‘सुपरमैन’, ‘बीएमडब्ल्यू’ और ‘थंडर’ जैसे नामों से सॉफ्टवेयर बेचे जा रहे हैं, जिन्हें सुपर मास्टर से लेकर यूजर तक अलग-अलग स्तर के एजेंट्स को दिया जाता है, जो टिकट बुकिंग का काम संभालते हैं। पूरा नेटवर्क वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए संचालित होता है, जहां सॉफ्टवेयर से जुड़ी हर जानकारी और अपडेट मैसेज के जरिए साझा किए जाते हैं।

अवैध टिकट खेल के 5 किरदार: ऑपरेटर से लेकर CBI तक, ऐसे चलता है पूरा नेटवर्क

ऑपरेटर : यही अवैध सॉफ्टवेयर चलाते हैं। डेवलपर और ट्रैवल एजेंट्स के बीच की कड़ी हैं। एजेंटों को अवैध सॉफ्टवेयर का लॉग-इन आईडी और पासवर्ड देते हैं। इससे एजेंट Tatkal टिकट खुलते ही तेजी से टिकट बुक कर पाते हैं।

टिकट एजेंट : अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके टिकट बुक करते हैं। इसके जरिए IRCTC वेबसाइट को ऑटोमेटिक एक्सेस करना, Captcha bypass करना और Tatkal टिकट सेकंडों में बुक करते हैं। कमीशन वसूलते हैं।

CRIS : अवैध सॉफ्टवेयर से बुकिंग रोकने में सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी CRIS की तकनीकी भूमिका है। रेलवे के आईटी सिस्टम को डेवलप करने, सर्वर लॉग और ट्रैफिक पैटर्न की निगरानी कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, ऐसे IP एड्रेस और यूजर अकाउंट को ब्लॉक करना, CAPTCHA, OTP जैसी सिक्योरिटी पुख्ता करने का जिम्मा।

RPF : रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी (RPF) पर टिकट दलालों, एजेंट नेटवर्क और अवैध बुकिंग गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई करना, छापे मारना और जांच करने का जिम्मा है।

CBI : इस धांधली से जुड़े तीन केस की जांच कर चुकी है, लेकिन अभी तक क्राइम को बंद नहीं करवा सकी। गिरोह के सरगनाओं को पकड़कर सलाखों के पीछे डालने की जिम्मेदारी है।

CBI ने सलमान–शमशेर को नेक्सस का किंगपिन बताया

CBI पिछले 14 साल से इसकी जांच कर रही है। 2012 में पहली FIR दर्ज की थी। तब चौथीं पढ़े सलमान, अहमदाबाद के आईटी प्रोफेशनल कुलवीर सिंह, सतीश तिवारी और सीताराम निषाद को अरेस्ट किया था।

एजेंसी ने चार्जशीट में यूपी के सलमान अहमद खान और शमशेर आलम को अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का किंगपिन बताया है। सलमान को 2018 और शमशेर को 2023 में भी पकड़ा गया, इससे साबित होता है कि दोनों अब भी नेक्सस चला रहे हैं।

अलग–अलग मामलों में CBI अब तक चार बार केस दर्ज कर चुकी है, लेकिन न नेक्सस बंद हुआ, न कोई केस अंजाम तक पहुंचा।

पहला केस : 2012 में पहली बार नाम सामने आया, लेकिन नेटवर्क नहीं टूटा

20 फरवरी 2012 को CBI और रेलवे विजिलेंस ने संयुक्त छापे में पहली बार इस धांधली को पकड़ा था। तब मेहताब अहमद खान, पी नागाकुमार, महबूब मलिक, संतराम यादव, सलमान अहमद खान और कुलबीर सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया था।

मौजूदा स्टेट्स : कोर्ट ने सभी को दोषी पाया था, लेकिन इन पर IPS की धारा 120B – आपराधिक साजिश और रेलवे एक्ट 143 लगाया गया। इसलिए कोर्ट ने महज 6 महीने कैद और जुर्माने की सजा दी।

2012 वाले केस में कोर्ट का ऑर्डर।

दूसरा केस : सॉफ्टवेयर माफिया के ‘सरगना’ बेनकाब, लेकिन मामला अभी ट्रायल में

2014–15 में केस रजिस्टर्ड किया। इस केस की चार्जशीट में सीबीआई ने लिखा कि, ‘सलमान सलीम खान मुख्य व्यक्ति है, जो शमशेर आलम के साथ मिलकर पूरे गिरोह को नियंत्रित करता है। दोनों को अवैध Tatkal रेलवे टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर बेचने के कारोबार के शीर्ष सरगना के रूप में पहचाना गया है।’

‘सलमान सलीम खान अवैध सॉफ्टवेयर कारोबार में टेक्निकल काम भी संभालता था, जैसे कि इंटरनेट डोमेन पर एप्लिकेशन को होस्ट करना, बिक्री और सेवा से संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंटों के साथ कोर्डिनेट करना’

सीबीआई ने शब्बीर खोजा, शेख सलीम, नवनीत प्रजापति, टी स्टालिन, मोहम्मद हामिद, नौमान सलीम खान, रईस अहमद अकबर, सलमान सलीम खान और शमशेर आलम को आरोपी बनाया है।

मौजूदा स्टेट्स : यह केस अभी ट्रायल के बीच में है। सबूत पेश और रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। केस की पहली सुनवाई 28 फरवरी 2017 को हुई थी। अगली सुनवाई 28 मार्च को है। सभी आरोपी बेल पर बाहर हैं।

CBI ने चार्जशीट में सलमान-शमशेर को किंगपिन बताया।

तीसरा केस : CBI का ही प्रोग्रामर बना मास्टरमाइंड, बिटकॉइन-हवाला से चलता था करोड़ों का खेल

25 दिसंबर 2017 को CBI ने अपने ही प्रोग्रामर अजय गर्ग के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोप है कि उसने WinZip, Neo, Reget जैसे अवैध सॉफ्टवेयर बनाए, जो IRCTC के तत्काल टिकट सिस्टम को बायपास कर सकता था। इस सॉफ्टवेयर की मदद से एजेंट तेजी से बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे, जिससे आम यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाते थे।

जांच में सामने आया कि अजय गर्ग ने अनिल गुप्ता और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह सॉफ्टवेयर देशभर में एजेंटों को बेचा। इसके बदले पैसे Bitcoin, हवाला और नकद के जरिए लिए जाते थे। छापों में करीब 89 लाख रुपए कैश और 61 लाख रुपए के जेवर बरामद हुए।

मौजूदा स्टेट्स : इस केस में CBI ने 2021 में चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 हटाया था, कोर्ट ने इस पर असहमति जताई। सीबीआई को फिर जांच के आदेश दिए। अभी आरोपों पर बहस चल रही है। गर्ग बेल पर बाहर है।

चौथा केस : 18 FIR, लेकिन जांच सिर्फ 2 मामलों में हुई

2020 में RPF में दर्ज 18 FIR को आगे बढ़ाने के लिए RPF के DG की तरफ से CBI जांच की मांग की गई। आरोपियों में सिराज अहमद खान, शमशेर आलम, किफायत आलम, जितेंद्र शर्मा उर्फ गोरा जीतू खोदारे, राजेश यादव, रामकुमार यादव और ऋषभ जैन के नाम शामिल थे।

मौजूदा स्टेट्स : 18 में से सिर्फ 2 एफआईआर की जांच हुई। बाकी केस की पड़ताल नहीं हुई। जबकि, खुद सीबीआई डायरेक्टर ने फाइल जांच के लिए आगे बढ़ाई है।

5400 एजेंट्स, करोड़ों का खेल- 1 लाख रुपए के 80 ई-टिकट बरामद हुए

मई 2018 में रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF और सेंट्रल रेलवे की विजिलेंस टीम ने मुंबई में सलमान खान को गिरफ्तार किया था। 2 मई 2018 को जोगेश्वरी इलाके में छापेमारी के दौरान उसे लैपटॉप के साथ पकड़ा गया।

जांच में सामने आया कि वह ‘Counter V2’ नाम के अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए देशभर में लगभग 5,400 एजेंटों का नेटवर्क चलाता था, जिससे एजेंट कुछ सेकंड में Tatkal टिकट बुक कर लेते थे।

कार्रवाई के दौरान उसके सिस्टम से करीब 1 लाख रुपए के 80 ई-टिकट बरामद हुए और बाद में सर्वर की जांच में 6,600 से ज्यादा PNR करीब 1.47 करोड़ कीमत के टिकटों का डेटा मिला। इस मामले में RPF, बायकुला ने रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत केस दर्ज किया था।

15 अप्रैल 2023 को RPF ने शमशेर आलम को तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के अनुसार शमशेर ने IRCTC की Tatkal टिकट बुकिंग को बायपास करने के लिए ‘Fusion’ सहित कई अवैध सॉफ्टवेयर तैयार किए थे और इन्हें देशभर के प्राइवेट टिकट एजेंटों को किराये पर देता था।

बताया गया कि वह पिछले लगभग 10 वर्षों से मुंबई के टिटवाला इलाके से नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था और उसके सॉफ्टवेयर के जरिए एजेंट सेकंडों में टिकट बुक कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए तक का अवैध कारोबार हुआ।

पूछताछ में सामने आया कि वह पहले ‘Sharp’, ‘Tez’, ‘Nexus++’ और ‘Fusion’ जैसे सॉफ्टवेयर मंथली रेंट पर देता था और बाद में साथियों के साथ मिलकर नेटवर्क को देशभर में फैलाया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। फिलहाल बेल पर बाहर है।

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‘सिक्योरिटी फीचर जुड़ते ही तोड़ भी निकल जाता है’

जांच करने वाले सीनियर अफसर ने बताया कि, ‘जांच में सामने आया था कि, ईस्टर्न यूपी में बैठकर आरोपी अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का रैकेट पूरे देश में चला रहे हैं। इनके सॉफ्टवेयर में डाटा पहले से फीड होता है। सेकंड्स में टिकट बुक हो जाते हैं।’

‘पूरा रैकेट अभी भी एक्टिव है, क्योंकि सब बेल पर बाहर हैं। IRCTC की तरफ से जो भी सिक्योरिटी फीचर जोड़े जाते हैं, ये लोग तुरंत उसका तोड़ निकाल लेते हैं, इसलिए अब आरपीएफ को इन्हें गिरफ्तार करना चाहिए। जिन लोगों के नाम चार्जशीट में हैं, वही रैकेट चला रहे हैं।’

IRCTC, CBI को सवाल भेजे – NEWS4SOCIALने इस मामले में IRCTC और CBI का पक्ष जानने के लिए उन्हें सवाल भेजे हैं। अभी तक जवाब नहीं आया है। रिप्लाई आते ही खबर में अपडेट किया जाएगा।

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