झालावाड़ में वन्यजीवों की बढ़ी रौनक: पहली बार दिखे पैंथर, एक साल में 978 वन्यजीव बढ़े – jhalawar News h3>
झालावाड़ जिले में वन्यजीवों की दुनिया से उत्साहजनक खबर सामने आई है। वन विभाग की ग्रीष्मकालीन वन्यजीव गणना 2026 के अनुसार जिले में कुल वन्यजीवों की संख्या बढ़कर 6151 पहुंच गई है, जबकि पक्षियों सहित कुल संख्या 8512 दर्ज की गई। सबसे खास बात यह रही कि पहली बार जिले में लेपर्ड की प्रामाणिक मौजूदगी दर्ज हुई है। एक साल में 978 वन्यजीव बढ़ना वन संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि मगरमच्छ, लोमड़ी और कुछ अन्य प्रजातियों की घटती संख्या चिंता भी बढ़ा रही है। वन्यजीवों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में कुल 5173 वन्यजीव थे, जो 2026 में बढ़कर 6151 हो गए। यानी एक साल में करीब 978 वन्यजीवों की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं पक्षियों की संख्या लगातार दूसरे वर्ष 2361 पर स्थिर रही। वन अधिकारियों का कहना है कि जल स्रोतों का विकास, वन संरक्षण और शिकार पर नियंत्रण जैसे प्रयासों का सकारात्मक असर अब साफ दिखाई देने लगा है। पहली बार लेपर्ड की मौजूदगी दर्ज इस गणना की सबसे बड़ी उपलब्धि जिले में पहली बार लेपर्ड यानी तेंदुए की मौजूदगी का रिकॉर्ड होना रहा। वर्ष 2025 में तेंदुए का कोई रिकॉर्ड नहीं था, जबकि इस बार दो लेपर्ड दर्ज किए गए हैं। वन विभाग इसे जिले के पारिस्थितिक संतुलन और बेहतर वन प्रबंधन का संकेत मान रहा है।
मांसाहारी वन्यजीवों में भी बदलाव मांसाहारी वन्यजीवों की संख्या में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं। सियारों की संख्या 1172 से बढ़कर 1224 हो गई। जंगली बिल्लियां 92 से बढ़कर 106 पहुंच गईं। भेड़ियों की संख्या 29 से बढ़कर 50 हो गई, जो उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। हालांकि कुछ प्रजातियों में गिरावट भी दर्ज हुई है— लकड़बग्घे 138 से घटकर 136 रह गए। लोमड़ियों की संख्या 150 से घटकर 131 हो गई। रैटल (हनी बैजर) 57 से घटकर 46 रह गए। शाकाहारी वन्यजीवों में बड़ा उछाल झालावाड़ में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में सबसे ज्यादा वृद्धि देखने को मिली। नीलगाय 1738 से बढ़कर 2081 पहुंच गई। चिंकारा 308 से बढ़कर 378 हो गए। जंगली सूअर 581 से बढ़कर 651 दर्ज किए गए। लंगूरों की संख्या 612 से बढ़कर 834 पहुंच गई। काला हिरण 80 से बढ़कर 273 हो गया, जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साही 42 से बढ़कर 63 और खरगोश 65 से बढ़कर 75 हो गए। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की बेहतर उपलब्धता से इन प्रजातियों को फायदा मिला है। मगरमच्छों की घटती संख्या बनी चिंता रेप्टाइल्स श्रेणी में मगरमच्छों की संख्या घटकर 16 रह गई है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 20 थी। विशेषज्ञ इसे चिंता का विषय मान रहे हैं। उनका कहना है कि जल स्रोतों में बदलाव और प्राकृतिक आवासों पर दबाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। पक्षियों में मोर सबसे ज्यादा पक्षियों की बात करें तो जिले में सबसे ज्यादा संख्या मोरों की दर्ज की गई। मोर – 2092 सारस – 44 तीतर – 78 वहीं गिद्धों की लॉन्ग बिल्ड, व्हाइट बैक्ड और इजिप्शियन प्रजातियों की संख्या बेहद सीमित पाई गई, जिससे इनके संरक्षण की जरूरत और अधिक महसूस की जा रही है।
