जयपुर में पेट्रोल 2.82, डीजल 2.73 रुपए महंगा: महीने में चौथी बार बढ़ीं कीमतें, पेट्रोल अब 112.66 और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर हुआ – Jaipur News

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जयपुर में पेट्रोल 2.82, डीजल 2.73 रुपए महंगा:  महीने में चौथी बार बढ़ीं कीमतें, पेट्रोल अब 112.66 और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर हुआ – Jaipur News

जयपुर में पेट्रोल 2.82, डीजल 2.73 रुपए महंगा: महीने में चौथी बार बढ़ीं कीमतें, पेट्रोल अब 112.66 और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर हुआ – Jaipur News

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने पर विपक्ष राजस्थान सरकार से वैट घटाने की मांग कर रहा है।

पेट्रोल और डीजल एक बार फिर महंगा हुआ है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, जयपुर में पेट्रोल की कीमतें 2.82 और डीजल में 2.73 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। जयपुर में पेट्रोल की कीमत अब 109.84 से बढ़कर 112.66 और डीजल की कीमत 95.05 से

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ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है…

  • 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा।
  • 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था।
  • 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी।
  • 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।

एक्सपी पेट्रोल भी महंगा

एक्सपी पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ी हैं। एक्सपी पेट्रोल की कीमत 119.15 से बढ़कर 121.97 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने पर विपक्ष राजस्थान सरकार से इस पर वैट घटाने की मांग कर रहा है। इस बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्टेशन से लेकर उद्योग और व्यापार जगत पर असर होगा।

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।

खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।

बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं:

1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।

2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।

3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।

4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर डीलर्स को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।

5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती है।

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