जनता के लिए अलग, नेताओं के लिए अलग कानून क्यों?: भारत चाणक्य परिषद ने दो सीटों से चुनाव, जेल से नामांकन पर उठाए सवाल – Sirohi News h3>
भारत चाणक्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री गोपाल सिंह राव पोसालिया ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के लिए अलग-अलग कानूनों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की कि देश में लागू दोहरे मापदंड खत्म करने के लिए लोकसभा में विधेयक लाकर स्पष्ट कानून बनाया जाए। पत्र में चुनाव, शैक्षिक योग्यता, आपराधिक मामलों, शारीरिक मानदंड और पेंशन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। दो सीटों से चुनाव लड़ने पर सवाल गोपाल सिंह राव पोसालिया ने पत्र में पूछा कि जब भारतीय संविधान के तहत एक मतदाता दो जगह मतदान नहीं कर सकता, तो एक नेता को दो सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति क्यों दी जाती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में असमानता बताते हुए नियमों में समानता लागू करने की मांग की। जेल में बंद कैदी वोट नहीं डाल सकता, लेकिन चुनाव लड़ सकता है? पत्र में उन्होंने इस विसंगति को भी उठाया कि जेल में बंद कैदी को मतदान का अधिकार नहीं मिलता, जबकि कई नेताओं को जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की अनुमति मिल जाती है। उन्होंने सवाल किया कि आम नागरिक और जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए गए हैं। सरकारी नौकरी के लिए योग्यता जरूरी, नेता बनने के लिए क्यों नहीं? राव पोसालिया ने कहा कि सरकारी नौकरी पाने के लिए शैक्षिक योग्यता, प्रतियोगी परीक्षाएं और अन्य नियम अनिवार्य होते हैं, लेकिन विधायक और सांसद बनने के लिए कोई न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय नहीं है। उन्होंने पूछा कि एक अनपढ़ व्यक्ति शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है, जबकि पढ़े-लिखे युवाओं को छोटी नौकरी के लिए भी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। शारीरिक मानदंडों को लेकर भी उठाए सवाल उन्होंने कहा कि सेना, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में शारीरिक मानदंड जरूरी होते हैं, लेकिन विधायक, सांसद या रक्षा मंत्री बनने के लिए ऐसे मानदंड क्यों नहीं रखे गए हैं। उन्होंने इस व्यवस्था को भी दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया। आपराधिक मामलों वाले नेता गृह मंत्री कैसे बन सकते हैं? पत्र में यह मुद्दा भी उठाया गया कि जिन नेताओं पर दर्जनों आपराधिक मामले चल रहे हों, वे भी पुलिस विभाग के मुखिया यानी गृह मंत्री बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक अपराधी व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती, लेकिन वही व्यक्ति चुनाव जीतकर विधायक या सांसद बन सकता है। विधायकों और सांसदों की पेंशन बंद करने की मांग गोपाल सिंह राव पोसालिया ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को लंबी सेवा के बाद पेंशन मिलती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर पेंशन देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद जनता के सेवक हैं, सरकारी कर्मचारी नहीं, इसलिए उनकी पेंशन व्यवस्था बंद की जानी चाहिए। देशभर के लोगों से समर्थन की अपील राव पोसालिया ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इन विसंगतियों को समाप्त करने के लिए कानून बनाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने देशभर के आम नागरिकों से भी इस मुद्दे को उठाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की अपील की है।
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